लोकसभा में गिरा महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल, जानें- समर्थन और विरोध में कितने पड़े वोट

महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका, क्योंकि इसे आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला. यह घटनाक्रम संसद के एक विशेष तीन-दिवसीय सत्र के बीच सामने आया है, जो 16 से 18 अप्रैल तक आयोजित किया गया था.

महिला आरक्षण बिल Image Credit: PTI

लोकसभा ने शुक्रवार को उस बिल को खारिज कर दिया, जिसका मकसद महिलाओं के लिए आरक्षण को तेजी से लागू करना और नई जनगणना कराए बिना ही सीटों का परिसीमन करना था. इस विधेयक का उद्देश्य परिसीमन के लिए नई जनगणना की अनिवार्यता को दरकिनार करना था.

वोटिंग के बाद गिरा बिल

वोटिंग के बाद यह प्रस्ताव गिर गया. इसके पक्ष में 298 सदस्यों ने वोट दिया, जबकि 230 सदस्यों ने इसके खिलाफ वोट दिया. सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को इस बिल को पास कराने के लिए 326 वोटों की जरूरत थी. इस वोटिंग में कुल 489 सांसदों ने हिस्सा लिया.

तीन-दिवसीय सत्र

यह घटनाक्रम संसद के एक विशेष तीन-दिवसीय सत्र के बीच सामने आया है, जो 16 से 18 अप्रैल तक आयोजित किया गया था. इस सत्र का उद्देश्य ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम‘ (यानी महिला आरक्षण अधिनियम) में प्रस्तावित संशोधनों पर विचार करना था. इस कानून में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था.

प्रस्तावित संशोधनों का लक्ष्य

प्रस्तावित संशोधनों का लक्ष्य 2029 तक इस आरक्षण को लागू करना संभव बनाना था. इसके साथ ही, अगले आम चुनावों से पहले आरक्षण व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या को बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव भी रखा गया था. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को समायोजित करने के लिए सीटें बढ़ाई जानी थीं.

11 साल के मोदी सरकार के कार्यकाल में यह पहला मौका है, जब सरकार सदन में कोई विधेयक पारित नहीं करवा पाई. बिल गिरने के बाद संसदीय राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि और दो बिल पर सदन में आगे चर्चा नहीं होगी. उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को अधिकार देकर रहेगी. इसके साथ ही लोकसभा अध्यक्ष ने लोकसभा की कार्यवाही शनिवार सुबह 11 बजे तक स्थगित करने का ऐलान कर दिया.

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