Jio IPO में सिर्फ टेलीकॉम की कहानी नहीं! टेक्नोलॉजी के दम पर बड़ी वैल्यूएशन की तैयारी, उठ रहे ये सवाल

जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO से पहले कंपनी खुद को सिर्फ टेलीकॉम कंपनी के बजाय टेक्नोलॉजी और डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में पेश कर रही है. कंपनी के पास 550 मिलियन ग्राहक, 6,800 से ज्यादा पेटेंट आवेदन और तेजी से बढ़ता डिजिटल कारोबार है. हालांकि, संभावित 120 बिलियन डॉलर से 140 बिलियन डॉलर की वैल्यूएशन को सही ठहराने के लिए इन टेक्नोलॉजी क्षमताओं से वास्तविक कमाई कितनी होगी, यह बड़ा सवाल बना हुआ है.

जियो के आईपीओ Image Credit: Canva/Money9live

Highlights

  • जियो भारत के मोबाइल बाजार में सबसे बड़े खिलाड़ियों में शामिल है और करीब 55 करोड़ ग्राहकों को सेवाएं दे रही है.
  • जियो और उसकी सहायक कंपनियों ने 4G, 5G, 6G और AI नेटवर्क ऑटोमेशन समेत कई क्षेत्रों में इतने पेटेंट के लिए आवेदन किए हैं.
  • इतनी संभावित वैल्यूएशन को देखते हुए जियो की टेक्नोलॉजी और डिजिटल कारोबार की भविष्य की कमाई अहम होगी.

मुकेश अंबानी की जियो अब सिर्फ टेलीकॉम कंपनी के तौर पर नहीं, बल्कि एक टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म के रूप में अपनी पहचान बनाने की तैयारी में है. जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड के आगामी IPO के ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस में कंपनी ने अपने कारोबार की तकनीकी क्षमता, डिजिटल सेवाओं, 5G, AI और पेटेंट पोर्टफोलियो को प्रमुखता से रखा है. कंपनी के मुताबिक उसके 11,000 से ज्यादा कर्मचारी डिजिटल प्रोडक्ट और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट टीमों में काम करते हैं, जबकि मार्च 2026 तक जियो और उसकी सहायक कंपनियों ने 4G, 5G, 6G और AI आधारित नेटवर्क ऑटोमेशन समेत कई क्षेत्रों में 6800 से ज्यादा पेटेंट के लिए आवेदन किए हैं.

लेकिन सवाल यह है कि क्या इन तकनीकी क्षमताओं के दम पर जियो को एक सामान्य टेलीकॉम कंपनी से कहीं ज्यादा वैल्यूएशन मिल पाएगा. रिपोर्ट में जियो की पेटेंट क्षमता और उसके व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर कुछ जानकारों की ओर से सवाल उठाए गए हैं.

जियो की टेक्नोलॉजी कहानी पर सवाल

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, जियो अपने IPO दस्तावेज में यह बताने की कोशिश कर रही है कि उसका कारोबार सिर्फ वायरलेस सेवाओं तक सीमित नहीं है. कंपनी के बिजनेस मॉडल में खुद की टेक्नोलॉजी, डिजिटल सेवाओं का प्लेटफॉर्म, AI आधारित नेटवर्क ऑटोमेशन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टेक्नोलॉजी लाइसेंसिंग की संभावनाएं शामिल हैं.

ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस में कंपनी ने अपने बिजनेस मॉडल की तुलना ग्लोबल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म कंपनियों की कुछ विशेषताओं से की है. यही बात जियो की संभावित वैल्यूएशन को लेकर चर्चा का बड़ा आधार बन रही है.

5.5 करोड़ नहीं, 550 मिलियन ग्राहकों का बड़ा आधार

2016 में 4G सेवा के साथ बाजार में उतरने के बाद जियो ने भारत के मोबाइल सेवा बाजार में अपनी मजबूत स्थिति बना ली है. सस्ती डेटा सेवाओं और मुफ्त वॉयस कॉल के शुरुआती दौर के बाद कंपनी अब करीब 550 मिलियन यानी 55 करोड़ ग्राहकों को सेवाएं दे रही है. भारत में पहले करीब एक दर्जन कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा थी, लेकिन अब बाजार मुख्य रूप से दो बड़े खिलाड़ियों के बीच सिमट गया है. जियो की आमदनी का बड़ा हिस्सा डेटा आधारित मोबाइल सेवाओं से आता है.

हालांकि, रिटर्न ऑन नेट वर्थ के मामले में जियो अभी भारती एयरटेल से काफी पीछे है. इसके बावजूद बाजार में जियो प्लेटफॉर्म्स की संभावित वैल्यूएशन $120 बिलियन से 140 बिलियन डॉलर के बीच आंकी जा रही है.

₹3 लाख करोड़ के मुनाफे पर इतनी बड़ी वैल्यूएशन क्यों?

जियो प्लेटफॉर्म्स ने पिछले साल करीब 300 बिलियन डॉलर यानी 30,000 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया. इस स्तर के मुनाफे और 120 बिलियन डॉलर से 140 बिलियन डॉलर की संभावित वैल्यूएशन को देखते हुए कंपनी का पी/ई मल्टीपल भारती एयरटेल के करीब 40 के स्तर के आसपास या उससे ज्यादा हो सकता है.

ऐसे में जियो के लिए सिर्फ मौजूदा टेलीकॉम कारोबार के आधार पर ऊंची वैल्यूएशन हासिल करना आसान नहीं होगा. यही वजह है कि कंपनी के भविष्य के डिजिटल और टेक्नोलॉजी कारोबार को काफी अहम माना जा रहा है.

डिजिटल कारोबार टेलीकॉम से तेज बढ़ा

जियो के लिए डिजिटल सेवाएं भविष्य की ग्रोथ का एक अहम हिस्सा बन सकती हैं. पिछले साल कंपनी के डिजिटल सर्विसेज कारोबार में 28 फीसदी की वृद्धि हुई, जबकि सामान्य टेलीकॉम कारोबार की वृद्धि दर 13 फीसदी रही.

डिजिटल सेवाओं में मनोरंजन कंटेंट, AI सब्सक्रिप्शन और दूसरी अतिरिक्त सेवाएं शामिल हैं. अगर डिजिटल कारोबार आगे भी टेलीकॉम कारोबार से तेज गति से बढ़ता है, तो इससे कंपनी के रिटर्न ऑन कैपिटल में सुधार की संभावना बन सकती है.

IPO से मिलने वाले करीब $4 बिलियन का क्या होगा?

Jio IPO से करीब 4 बिलियन डॉलर जुटाने की संभावना बताई जा रही है. ऐसे में IPO निवेशकों के लिए बड़ा सवाल यह है कि इस रकम का इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा. कंपनी के लिए मौजूदा कर्ज को कम करना एक विकल्प है, जिससे ब्याज खर्च घट सकता है. वहीं, 6G से जुड़ा बड़ा खर्च अभी कुछ साल दूर माना जा रहा है. ऐसे में कंपनी की टेक्नोलॉजी क्षमता और भविष्य के डिजिटल कारोबार की कहानी IPO के समय काफी महत्वपूर्ण हो सकती है.

6,800 से ज्यादा पेटेंट आवेदन, लेकिन असली सवाल उनका इस्तेमाल

जियो और उसकी सहायक कंपनियों ने मार्च 2026 तक 6,800 से ज्यादा पेटेंट के लिए आवेदन किए हैं. इनमें करीब 2,400 आवेदन भारत में और 4,400 विदेशों में किए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, इन पेटेंट आवेदनों में करीब 85% पिछले चार वर्षों में दाखिल किए गए. Google Patents पर ट्रैक किए जा सकने वाले 6,100 से ज्यादा आवेदनों में करीब 95% लंबित दिखाई देते हैं.

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जियो के चीफ टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट ऑफिसर आयुष भटनागर का नाम करीब 77% फाइलिंग में आविष्कारक के तौर पर दर्ज है.

इन आंकड़ों के आधार पर सवाल यह उठता है कि जियो के पेटेंट पोर्टफोलियो की वास्तविक व्यावसायिक कीमत कितनी है और इनमें से कितनी टेक्नोलॉजी भविष्य में लाइसेंसिंग के जरिए कमाई कर सकती है.

5G टेक्नोलॉजी को दुनिया में बेचने की चुनौती

जियो की टीम ने क्रिकेट प्रसारण जैसे क्षेत्रों के लिए कुछ तकनीकी समाधान तैयार किए हैं, जिनसे दर्शकों को ज्यादा इंटरैक्टिव अनुभव मिल सकता है. लेकिन घरेलू स्तर पर तैयार 5G टेक्नोलॉजी को दूसरे देशों में बेचने और उससे बड़ा कारोबार खड़ा करने के लिए उसकी व्यावसायिक उपयोगिता साबित करना जरूरी होगा.

टेलीकॉम इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों के मुताबिक, जियो के करीब 550 पेटेंट आवेदन वैश्विक कम्युनिकेशन स्टैंडर्ड से जुड़े हो सकते हैं. हालांकि, इन पेटेंट से भविष्य में रॉयल्टी के रूप में कितनी कमाई हो सकती है, इसे लेकर स्पष्टता नहीं है.

भारत में फिक्स्ड वायरलेस कारोबार में जियो मजबूत

भारत के फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस बाजार में 2019 के बाद से तीन गुना वृद्धि हुई है. हाल के समय में नए ग्राहकों में से करीब दो-तिहाई जियो ने जोड़े हैं. कंपनी बिना लाइसेंस वाले रेडियो फ्रीक्वेंसी स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल करके इस बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है. जियो के मुताबिक, भारत में उसका नेटवर्क चीन के बाहर सबसे बड़ा है और इसी अनुभव को उन 95 अन्य देशों में इस्तेमाल किया जा सकता है, जहां आधी से कम आबादी के घरों तक ब्रॉडबैंड कनेक्शन पहुंचा है. कंपनी के दस्तावेज में इस बाजार को करीब 75 बिलियन डॉलर सालाना का अवसर बताया गया है.

Nokia, Ericsson और Samsung जैसी कंपनियों से मुकाबला आसान नहीं

जियो के सामने ग्लोबल टेलीकॉम टेक्नोलॉजी बाजार में पहले से स्थापित कंपनियों की बड़ी चुनौती है. Nokia, Ericsson, Huawei, ZTE और Samsung जैसे दिग्गज इस क्षेत्र में दशकों से काम कर रहे हैं. मिसाल के तौर पर Ericsson के पास करीब 27,000 रिसर्च, सालाना करीब 5 बिलियन डॉलर का R&D खर्च और दशकों में तैयार किए गए करीब 60,000 पेटेंट हैं.

इसके मुकाबले जियो के वित्तीय विवरण में अलग से R&D खर्च का आंकड़ा नहीं दिया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी का कुल वेतन खर्च करीब 700 मिलियन डॉलर है.

पेटेंट की संख्या से ज्यादा जरूरी है उसकी कमाई

रिपोर्ट का सबसे अहम सवाल यही है कि बड़ी संख्या में पेटेंट आवेदन अपने आप में किसी कंपनी की टेक्नोलॉजी क्षमता या व्यावसायिक सफलता साबित नहीं करते. किसी पेटेंट की असली अहमियत उसकी तकनीकी उपयोगिता, दिए गए अधिकारों की सीमा और उससे होने वाली व्यावसायिक कमाई से तय होती है. जियो ने टेक्नोलॉजी, 5G, AI और डिजिटल सेवाओं में अपनी क्षमता का विस्तार जरूर किया है, लेकिन इन पेटेंट और टेक्नोलॉजी से बड़े पैमाने पर लाइसेंसिंग आय हासिल करने की क्षमता अभी साबित होना बाकी है.

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