NSE IPO: SEBI से रास्ता साफ, पर सुप्रीम कोर्ट में अटका मामला, क्या सेटलमेंट से बनेगी बात
NSE IPO को सेबी से सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण लॉन्च अटका हुआ है. एनएसई आईपीओ के सेटलमेंट को अगर सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिल जाती है, तो NSE IPO की राह आगे बढ़ सकती है.
NSE IPO: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE IPO का इंतजार लंबे समय से निवेशकों को है. मगर को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामलों में फंसे इस आईपीओ को अब सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिलने का इंतजार है. सेबी से पहले ही इसे सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है. मामले में प्रस्तावित सेटलमेंट को अंतिम रूप देने की कोशिश की जा रही है.
क्या है मामला?
NSE यानी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज अपना IPO लाना चाहता है, लेकिन एक पुराने विवाद की वजह से यह काम सालों से अटका है. यह विवाद को-लोकेशन और डार्क फाइबर से जुड़ा है, जिसमें आरोप थे कि कुछ ट्रेडर्स को ट्रेडिंग में गलत फायदा मिला है. अब NSE ने सेबी से कहा है कि वह ₹1,388 करोड़ देकर मामला सेटल करना चाहता है. सेबी ने इसे सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है. मगर यह केस अभी सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है और सेबी खुद वहां अपीलकर्ता है. इसलिए सेबी अकेले फैसला नहीं कर सकता. अब सेबी को सुप्रीम कोर्ट से इजाज़त लेनी होगी कि सेटलमेंट के आधार पर केस बंद किया जाए. जब सुप्रीम कोर्ट मंज़ूरी देगा, तब सेबी NSE को IPO के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट देगा, इसके बाद ही इसे लॉन्च किया जा सकता है.
कोर्ट की मंजूरी क्यों जरूरी
सुप्रीम कोर्ट से जुड़े जानकारों के मुताबिक सेबी अपने स्तर पर मामला बंद नहीं कर सकता. प्रक्रिया के तहत सेबी को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा और इंटरलोक्यूटरी एप्लिकेशन दाखिल करना होगा. साथ ही सेटलमेंट के आधार पर अपील वापस लेने या निपटाने की अनुमति मांगनी होगी. सेबी के सेटलमेंट रेगुलेशंस के अनुसार, अगर कोई मामला अदालत में लंबित है, तो सेटलमेंट को कोर्ट के सामने रखा जाना ज़रूरी है. सुप्रीम कोर्ट यह देखेगा कि समझौता कानूनन सही है और जनहित के खिलाफ नहीं है. इसके बाद ही अपील का निपटारा होगा.
इंटरनल कमेटी करेगी जांच
इस प्रस्ताव की समीक्षा अब सेबी की इंटरनल कमेटी और हाई पावर्ड एडवाइजरी कमेटी करेगी. इसके बाद इसे सेबी के होल-टाइम मेंबर्स के पैनल के सामने अंतिम मंज़री के लिए रखा जाएगा. तय राशि चुकाने के बाद सेबी क्लोजर ऑर्डर जारी करेगा, जिसमें NSE की ओर से किसी भी तरह की गलती स्वीकार नहीं की जाएगी.
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कैसे तय होगी NSE IPO की राह?
द हिंदू बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक सेबी के चेयरपर्सन तुहिन कांता पांडे ने कहा है कि IPO के लिए नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट एक महीने में मिल सकता है. लेकिन दूसरे कानूनी जानकारों का मानना है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट सेटलमेंट को रिकॉर्ड कर अपील का निपटारा नहीं करता, तब तक NOC बिना शर्त मिलना मुश्किल है. सुप्रीम कोर्ट से मामला बंद होने के बाद ही NSE दोबारा DRHP दाखिल कर सकेगा. इसके बाद ICDR नियमों के तहत सेबी की डिस्क्लोज़र समीक्षा होगी, BSE से इन-प्रिंसिपल लिस्टिंग अप्रूवल लिया जाएगा और फिर बुक-बिल्डिंग व लिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू होगी.