PhonePe IPO आने से पहले कंपनी का बड़ा दावा, मजबूत कैश फ्लो और ESOP मॉडल पर भरोसा करेगी बाजार में एंट्री
डिजिटल पेमेंट कंपनी PhonePe का IPO इस साल बाजार में आने की तैयारी में है और इसे 2026 के सबसे चर्चित IPO में माना जा रहा है. कंपनी को इसके लिए सेबी से मंजूरी मिल चुकी है. यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल के रूप में आएगा जिसमें मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे.
भारत की डिजिटल पेमेंट कंपनी PhonePe का IPO इस साल बाजार में आने की तैयारी में है. इसे 2026 के सबसे चर्चित IPO में से एक माना जा रहा है. कंपनी को इसके लिए सेबी से मंजूरी मिल चुकी है. हालांकि अभी IPO की तारीख और इश्यू साइज की घोषणा नहीं हुई है. रिपोर्ट के अनुसार कंपनी अप्रैल तक इस प्रक्रिया को पूरा करने की योजना बना रही है. यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल के रूप में आ सकता है जिसमें मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे.
IPO में नई शेयर जारी नहीं करेगी कंपनी
कंपनी की फाइलिंग के अनुसार यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल होगा. इसका मतलब है कि कंपनी नए शेयर जारी नहीं करेगी. इसमें मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे. रिपोर्ट के मुताबिक करीब 50 लाख से ज्यादा शेयर बिक्री के लिए आ सकते हैं. इस IPO के जरिए कंपनी ऑपरेशन के लिए नया पैसा नहीं जुटाएगी.
कई बड़े निवेशक घटाएंगे अपनी हिस्सेदारी
IPO के जरिए कुछ बड़े निवेशक अपनी हिस्सेदारी कम करेंगे. Walmart कंपनी में करीब 12 फीसदी हिस्सेदारी कम करने की योजना बना रही है. इसके अलावा Tiger Global Management और Microsoft भी अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचकर बाहर निकलने की योजना बना रहे हैं. इन निवेशकों द्वारा कुल मिलाकर करीब 50.7 मिलियन शेयर बेचे जाने की संभावना है.
ESOP स्ट्रक्चर से कंपनी को मिली मजबूती
कंपनी का कहना है कि उसका ESOP स्ट्रक्चर कर्मचारियों और लीडरशिप को जोड़े रखने में महत्वपूर्ण रहा है. कंपनी ने ज्यादा कैश सैलरी देने के बजाय इक्विटी आधारित प्रोत्साहन पर जोर दिया. इससे कंपनी के स्थायी खर्च कम रहे और कर्मचारियों का हित कंपनी की लॉन्ग टर्म सफलता से जुड़ा रहा. यही वजह है कि कंपनी की मैनेजमेंट टीम लंबे समय से स्थिर बनी हुई है.
कैश फ्लो और मुनाफे की स्थिति मजबूत
कंपनी के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में वह फ्री कैश फ्लो के मामले में पाजिटिव रही. कंपनी ने ऑपरेट से करीब 1200 करोड़ रुपये से अधिक कैश जनरेट की. अगर ESOP से जुड़े नॉन खर्च खर्च को अलग कर दिया जाए तो कंपनी का एडजस्टेड प्रॉफिट करीब 630 करोड़ रुपये रहा. यह दिखाता है कि कंपनी का कमर्शियल नकदी के स्तर पर पहले से लाभ में है.
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रेवेन्यू के नए सोर्स से मिल रही मजबूती
कंपनी का कहना है कि अब उसका रेवेन्यू केवल UPI ट्रांजेक्शन पर निर्भर नहीं है. इंश्योरेंस और मर्चेंट सर्विसेज जैसे गैर नगद कारोबार अब कुल रेवेन्यू का करीब 42 फीसदी योगदान दे रहे हैं. इससे कंपनी को आगे की ग्रोथ के लिए पर्याप्त आंतरिक नकदी मिल रही है. इसी कारण कंपनी को विस्तार के लिए IPO से नया कैपिटल जुटाने की जरूरत नहीं पड़ रही है.
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