ICICI प्रूडेंशियल वैल्यू फंड के 22 साल पूरे, ₹1 लाख बना ₹46.6 लाख

ICICI प्रूडेंशियल वैल्यू फंड ने 22 साल पूरे कर लिए हैं. इस दौरान ₹1 लाख का निवेश बढ़कर ₹46.6 लाख हुआ. फंड ने 19.11% CAGR रिटर्न दिया. वहीं, ₹10,000 की मासिक SIP करीब ₹2.37 करोड़ बन गई.

ICICI प्रूडेंशियल वैल्यू फंड

Highlights

  • 22 साल में ₹1 लाख निवेश बढ़कर ₹46.6 लाख हो गया
  • ₹10,000 की मासिक SIP से ₹2.37 करोड़ बने
  • फंड ने 19.11% सालाना CAGR रिटर्न दिया है

ICICI प्रूडेंशियल वैल्यू फंड ने निवेश की दुनिया में 22 साल पूरे कर लिए हैं. इस दौरान फंड ने निवेशकों को लंबी अवधि में शानदार रिटर्न दिया है. 16 अगस्त 2004 को शुरू हुए इस फंड में शुरुआत के समय लगाया गया ₹1 लाख 31 जुलाई 2026 तक बढ़कर करीब ₹46.6 लाख हो गया. इस निवेश पर फंड ने 19.11% का सालाना CAGR रिटर्न दिया है.

₹1 लाख निवेश पर Nifty 50 से दोगुने से ज्यादा रकम

फंड के प्रदर्शन की तुलना अगर Nifty 50 TRI से करें तो अंतर काफी बड़ा दिखाई देता है. इसी अवधि में Nifty 50 TRI में ₹1 लाख का निवेश बढ़कर करीब ₹20.1 लाख हुआ. इसका सालाना CAGR 14.63% रहा. यानी 22 साल की अवधि में ICICI प्रूडेंशियल वैल्यू फंड ने अपने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया है. हालांकि, म्यूचुअल फंड में पिछला प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं देता.

₹10,000 की मासिक SIP बनी ₹2.37 करोड़

इस फंड में अगर किसी निवेशक ने शुरुआत से हर महीने ₹10,000 की SIP जारी रखी होती तो 31 जुलाई 2026 तक उसकी रकम करीब ₹2.37 करोड़ हो गई होती. इस दौरान निवेशक ने कुल करीब ₹26.4 लाख ही लगाए होते. इस निवेश पर सालाना CAGR करीब 17.04% रहा. वहीं, Nifty 50 TRI में इसी SIP से करीब 12.30% का CAGR रिटर्न मिलता.

तीन और पांच साल में भी बेहतर प्रदर्शन

कम अवधि के प्रदर्शन पर नजर डालें तो पिछले तीन साल में फंड ने 13.44% CAGR रिटर्न दिया है. इसी अवधि में Nifty 500 TRI का रिटर्न 12.29% रहा. पांच साल की अवधि में फंड का CAGR 16.05% रहा, जबकि Nifty 500 TRI ने 11.85% का रिटर्न दिया. इससे पता चलता है कि हाल की अलग-अलग अवधि में भी फंड ने अपने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया है.

₹61,102 करोड़ का AUM

31 जुलाई 2026 तक ICICI प्रूडेंशियल वैल्यू फंड का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹61,102 करोड़ था. यह भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का सबसे बड़ा एक्टिवली मैनेज्ड वैल्यू-ओरिएंटेड इक्विटी फंड बताया गया है. वैल्यू कैटेगरी के कुल AUM में इस फंड की हिस्सेदारी करीब 28% है. इससे इस स्कीम में निवेशकों के भरोसे का अंदाजा लगाया जा सकता है.

वैल्यू इन्वेस्टिंग पर फोकस

यह फंड ऐसी कंपनियों की पहचान करने की रणनीति अपनाता है, जिनके शेयर उनकी वास्तविक या अनुमानित कीमत से कम भाव पर मिल रहे हों. इसके लिए कंपनी के कारोबार, वैल्यूएशन और भविष्य की संभावनाओं को देखा जाता है. इस रणनीति में अलग-अलग मार्केट कैप और सेक्टर की कंपनियों में निवेश किया जाता है. इसका उद्देश्य लंबी अवधि में पूंजी में बढ़ोतरी हासिल करना है.

पोर्टफोलियो में वित्तीय कंपनियों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी

31 जुलाई 2026 तक फंड के नेट एसेट्स का 93.31% हिस्सा इक्विटी में निवेशित था. सेक्टर के हिसाब से सबसे ज्यादा 38.10% निवेश फाइनेंशियल सर्विसेज में है. इसके बाद हेल्थकेयर में 9.08%, FMCG में 9%, IT में 7.84% और ऑटोमोबाइल व ऑटो कंपोनेंट्स में 7.53% निवेश है.

लार्ज कैप शेयरों पर ज्यादा भरोसा

ICICI प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट के ED और CIO शंकरन नरेन के मुताबिक वैल्यू इन्वेस्टिंग को एक-दो साल के नजरिए से नहीं देखना चाहिए. उनके अनुसार, ऐसी कंपनियों में निवेश किया जाता है जिनकी कीमत आकर्षक हो, लेकिन बाजार में उनकी वास्तविक वैल्यू के मुकाबले कम आंकी जा रही हो. उन्होंने कहा कि मौजूदा बाजार में कई बार लार्ज कैप शेयर मिड और स्मॉल कैप के मुकाबले बेहतर वैल्यू दे सकते हैं. इसलिए फिलहाल पोर्टफोलियो का झुकाव लार्ज कैप कंपनियों की ओर है.

इस स्कीम को शंकरन नरेन, धर्मेश कक्कड़ और मासूमी झुरमरवाला संयुक्त रूप से मैनेज करते हैं. फंड का पोर्टफोलियो कई अलग-अलग सेक्टर में फैला हुआ है, जिससे निवेश में विविधता बनी रहती है.

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