SIP कर रहे हैं तो चौंका देंगे ये आंकड़े! Nifty50 का रिटर्न FD से भी कम; निवेशकों के लिए क्या है सबक

Nifty 50 की मासिक SIP ने पिछले 5 साल में सिर्फ 4.5% एक्सटेंडेड इंटरनल रेट ऑफ रिटर्न दिया, जो बैंक एफडी से भी कम है. 1 साल में रिटर्न -10.5% और 2 साल में -4.6% रहा. इसके मुकाबले Nifty Midcap 150 और Nifty Smallcap 250 TRI ने 5 साल में 14.89% और 15.34% रिटर्न दिया.

एसआईपी बनाम एफडी

Highlights

  • Nifty 50 की मासिक SIP ने पिछले 5 साल में सिर्फ 4.5% रिटर्न दिया है.
  • यह बैंक एफडी से भी कम है.
  • छोटी अवधि में तस्वीर और कमजोर रही है.

पिछले कुछ समय से शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव ने इक्विटी निवेशकों के रिटर्न पर असर डाला है. खासतौर पर Nifty 50 में SIP करने वाले निवेशकों के लिए हाल का प्रदर्शन चिंता बढ़ाने वाला रहा है. ACE MF के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 5 साल में Nifty 50 की मासिक SIP का XIRR (एक्सटेंडेड इंटरनल रेट ऑफ रिटर्न) सिर्फ 4.5% रहा है. यह रिटर्न बैंक एफडी से भी कम है.

छोटी अवधि में तस्वीर और कमजोर रही है. 2 साल की SIP का रिटर्न -4.6% और 1 साल का रिटर्न -10.5% रहा. हालांकि, लंबी अवधि में तस्वीर कुछ बेहतर है. 7 साल में Nifty 50 SIP का रिटर्न 8.35% और 10 साल में 9.44% रहा है.

Nifty 50 से ज्यादा रिटर्न मिडकैप-स्मॉलकैप ने दिया

हालिया दौर में शेयर बाजार के सभी हिस्सों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा है. जहां Nifty 50 का 5 साल का SIP रिटर्न सिर्फ 4.5% रहा, वहीं Nifty Midcap 150 ने 14.89% और Nifty Smallcap 250 TRI ने 15.34% का रिटर्न दिया. 7 साल की अवधि में भी दोनों इंडेक्स ने Nifty 50 के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया. इस दौरान Nifty Midcap 150 ने 19.22% और Nifty Smallcap 250 TRI ने 20.64% का रिटर्न दिया.

इससे साफ है कि हाल के वर्षों में सिर्फ बड़े शेयरों यानी Nifty 50 पर निर्भर रहने वाले निवेशकों का अनुभव मिडकैप और स्मॉलकैप निवेशकों से अलग रहा है.

क्या Nifty में नेगेटिव SIP रिटर्न खरीदारी का संकेत है?

ET की रिपोर्ट के मुताबिक, Nifty में 2 साल का नेगेटिव SIP रिटर्न अपने आप में खरीदारी का संकेत नहीं है. हालांकि, इससे यह जरूर पता चलता है कि पहले की तेजी के दौरान जो ऊंची वैल्यूएशन बनी थी, उसमें अब काफी कमी आई है. रिपोर्ट में बताया गया है कि, बाजार में हालिया गिरावट सभी हिस्सों में एक जैसी नहीं रही है. अगस्त के आखिरी तक मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स ने 9% से ज्यादा रिटर्न दिया था और आगे चलकर बाजार से मिलने वाला रिटर्न सिर्फ इंडेक्स की दिशा पर निर्भर नहीं रहेगा. ऐसे कारोबार को पहचानना ज्यादा अहम होगा, जो कमाई के अनुमान से बेहतर प्रदर्शन कर सकें और जिनकी वैल्यूएशन भी उचित हो.

SIP है, तो इसका मतलब मुनाफा तय नहीं

SIP निवेश में अनुशासन बनाए रखने और बाजार के उतार-चढ़ाव के दौरान खरीदारी की औसत लागत को संभालने में मदद करती है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि SIP हर स्थिति में रिटर्न देगी. अगर जिस इंडेक्स में निवेश किया जा रहा है, उसमें खुद रिटर्न नहीं है, तो SIP भी रिटर्न पैदा नहीं कर सकती.

मौजूदा 5 साल की अवधि पोस्ट-कोविड तेजी के बाद शुरू हुई और बाजार में कमजोरी के दौर में खत्म हुई. इसलिए इस अवधि को इक्विटी रिटर्न मापने के लिए एक कमजोर समय-खिड़की माना जा सकता है.

2021 से 2024 के बीच तस्वीर अलग थी

रिपोर्ट के मुताबिक, 17 सितंबर 2021 से 17 सितंबर 2024 के बीच Nifty 50 में एकमुश्त निवेश का रिटर्न 14% CAGR रहा, जबकि मासिक SIP का रिटर्न 21% था. इसके बाद के दो साल में एकमुश्त निवेश और SIP, दोनों का रिटर्न सपाट रहा. हालांकि Nifty 50 ने 6 साल और यहां तक कि 10 साल की अवधि में भी शून्य रिटर्न दिया है, हालांकि ऐसे मौके बहुत कम रहे हैं.

क्या इक्विटी का लंबी अवधि का भरोसा खत्म हो गया?

हाल के कमजोर रिटर्न को देखकर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि लंबी अवधि में इक्विटी का मामला खत्म हो गया है. पांच साल की अवधि में भी इक्विटी का रिटर्न सीधी रेखा में नहीं चलता. बाजार का प्रदर्शन आर्थिक विकास, कंपनियों की कमाई और वैल्यूएशन जैसे कई कारकों से प्रभावित होता है. 1999 से Nifty 50 TRI के 5 साल के औसत रोलिंग रिटर्न करीब 15% रहे हैं, जबकि सिर्फ 0.07% observations में नेगेटिव रिटर्न देखने को मिला है. यह आंकड़ा बताता है कि हालिया 5 साल का कमजोर प्रदर्शन लंबी अवधि के ऐतिहासिक प्रदर्शन से अलग है.

FD और शेयर बाजार में सबसे बड़ा फर्क

इक्विटी और बैंक एफडी को एक ही तरह से नहीं देखा जा सकता. एफडी में रिटर्न आम तौर पर पहले से तय होता है, जबकि शेयर बाजार में रिटर्न बाजार की चाल पर निर्भर करता है और इसमें जोखिम भी रहता है. इसी वजह से हाल में Nifty 50 की SIP का रिटर्न बैंक एफडी से कम होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि इक्विटी निवेश हमेशा कमजोर रहेगा. निवेश की अवधि और बाजार में प्रवेश का समय भी रिटर्न पर असर डालता है.

Nifty 50 को अब किस चीज का इंतजार?

जब बाजार लंबे समय तक गिरावट या एक दायरे में रहता है, तो रिटर्न कमजोर दिखाई देते हैं और अगर अगले 12 महीनों में Nifty 20% चढ़ता है, तो यही गणना काफी अलग दिखाई दे सकती है. Nifty 50 के बाहर के शेयरों का कुल संपत्ति बनाने में योगदान बढ़ रहा है और कुल मार्केट कैप में Nifty की हिस्सेदारी लगातार कम हुई है.

मिडकैप, स्मॉलकैप और माइक्रोकैप के शेयरों में बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला है, इसलिए इस हिस्से में निवेश करने वाले म्यूचुअल फंड का रिटर्न भी बेहतर दिखाई दे सकता है.

आगे क्या बदल सकता है?

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी तेजी के खत्म होने की स्थिति में लार्जकैप शेयरों में दोबारा रफ्तार आ सकती है. वहीं जैसे-जैसे कंपनियों की कमाई में सुधार होगा, बाजार का फोकस वैल्यूएशन से हटकर कमाई पर जा सकता है. ऐसे माहौल में सिर्फ इंडेक्स की दिशा से ज्यादा अहम शेयरों का सही चुनाव हो सकता है.

निवेशकों के लिए क्या सीख?

पिछले 5 साल के आंकड़े यह बताते हैं कि सिर्फ SIP करने से FD से ज्यादा रिटर्न की गारंटी नहीं मिलती, खासकर तब जब निवेश की शुरुआत तेज तेजी के बाद हुई हो और अवधि बाजार में गिरावट या कमजोरी के दौर में खत्म हुई हो.

SIP निवेश में अनुशासन और औसत खरीद लागत का फायदा देती है, लेकिन बाजार जोखिम को खत्म नहीं करती. इसलिए हाल के रिटर्न को देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय निवेश की अवधि, वैल्यूएशन और निवेश किए जा रहे इंडेक्स या फंड के प्रदर्शन को अलग-अलग देखना जरूरी है.

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