टाटा केमिकल्स और TMPV के शेयरों में 3% की गिरावट, लिस्टिंग की उम्मीदें कम होने के चलते टूटे शेयर
Tata Group Share Today: सोमवार को टाटा ट्रस्ट्स ने ग्रुप की दो कंपनियों को टाटा संस में मिलाने का प्रस्ताव रखा. टाटा संस, ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है और इसकी TCS, टाटा मोटर्स PV, टाटा स्टील और ट्रेंट जैसी लिस्टेड कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी है.
Highlights
- मर्ज हुई कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 1.05 लाख करोड़ रुपये होगा.
- टाटा ट्रस्ट्स ने ग्रुप की दो कंपनियों को टाटा संस में मिलाने का प्रस्ताव रखा.
- टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स की टाटा संस में 3.06% हिस्सेदारी है.
टाटा समूह की कंपनियों के शेयरों में मंगलवार 29 सितंबर को भी गिरावट दर्ज की गई. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस के रीस्ट्रक्चरिंग (पुनर्गठन) का प्रस्ताव रखा, ताकि ग्रुप को अपने शेयर लिस्ट कराने की रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की शर्त से बचा जा सके.
किस कंपनी की कितनी हिस्सेदारी?
लिस्टेड टाटा ग्रुप कंपनियों में, टाटा स्टील और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स की टाटा संस में 3.06% हिस्सेदारी है, जबकि टाटा केमिकल्स की हिस्सेदारी 2.53% है. टाटा पावर की हिस्सेदारी 1.65% है, जबकि इंडियन होटल्स, टाटा कंज्यूमर और टाटा इन्वेस्टमेंट की हिस्सेदारी क्रमशः 1.11%, 0.4% और 0.25% है.
शेयरों में कितनी गिरावट?
29 सितंबर को सुबह 10 बजे, टाटा केमिकल्स के शेयर 3 फीसदी गिरकर 622.55 रुपये पर ट्रेड कर रहे थे, जबकि टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन के शेयर क्रमशः 3 फीसदी और 2.2 फीसदी नीचे ट्रेड कर रहे थे.
मर्जर का प्लान
सोमवार को टाटा ट्रस्ट्स ने ग्रुप की दो कंपनियों को टाटा संस में मिलाने का प्रस्ताव रखा. टाटा संस, ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है और इसकी TCS, टाटा मोटर्स PV, टाटा स्टील और ट्रेंट जैसी लिस्टेड कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी है.
सोमवार के प्रस्ताव में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स को टाटा संस में मिलाना शामिल है. इससे यह कंपनी, जिसका मुख्य काम अभी सिर्फ निवेश होल्ड करना है, एक ऐसी कंपनी बन जाएगी जिसका अपना बड़ा ऑपरेटिंग बिजनेस और रेवेन्यू होगा.
ट्रस्ट्स ने एक बयान में कहा, ‘यह RBI द्वारा TSPL को ‘नॉन-बैंकिंग, नॉन-फाइनेंशियल कंपनी’ के तौर पर पहले (2004 के बाद) किए गए वर्गीकरण के भी अनुरूप होगा.’
NBFC कैटेगरी में है टाटा संस
कई टाटा ग्रुप बिजनेस की होल्डिंग कंपनी होने के नाते, टाटा संस को 2022 में कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी या ‘अपर-लेयर’ नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के तौर पर कैटेगराइज्ड किया गया था – जिससे यह RBI के उन नियमों के दायरे में आ गई जिनके तहत अधिक निगरानी की जरूरत होती है.
इस महीने की शुरुआत में RBI ने इस ग्रुप की नॉन-बैंक लेंडर के तौर पर डी-रजिस्टर करने की अर्जी को खारिज कर दिया, जिससे इसे पब्लिक लिस्टिंग की ओर बढ़ना पड़ सकता है.
1.05 लाख करोड़ रुपये होगा रेवेन्यू
चैरिटी ने कहा कि मर्ज हुई कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 1.05 लाख करोड़ रुपये होगा, जो इसके फाइनेंशियल एसेट्स (40,072 करोड़ रुपये) से होने वाली आय से कहीं अधिक है, और यह मर्ज हुई कंपनी की कुल आय का 64.3% है.’
ट्रस्ट ने टाटा संस बोर्ड को यह प्रस्ताव सौंपा है और सेंट्रल बैंक के सामने इसे रखने से पहले बोर्ड की मंजूरी की जरूरत होगी. यह प्रस्ताव ट्रस्ट और टाटा संस के बीच मतभेद के बाद आया है. टाटा संस में ट्रस्ट की 66% हिस्सेदारी है.
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