आखिरी 30 मिनट में क्या मार्केट में मचेगी उथल-पुथल? वीकली-मंथली F&O एक्सपायरी आज, साथ में CAS का भी लगेगा तड़का
Share Market Today: डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी कोई नई बात नहीं है, लेकिन क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) नई चीज है. इस साल 3 अगस्त को शुरू किए गए CAS की वजह से कीमतों में अचानक उतार-चढ़ाव और मार्केट में अनिश्चितता देखी गई है.
Highlights
- CAS के चलते कीमतों में अचानक उतार-चढ़ाव और मार्केट में अनिश्चितता देखी गई है.
- एक्सपायरी के दिन, निफ्टी में सेशन के आखिरी कुछ मिनटों में जबरदस्त तेजी देखी गई.
- ऑर्डर डालने का समय दोपहर 3:28 बजे से 3:30 बजे के बीच किसी भी समय बंद हो सकता है.
मंगलवार के ट्रेडिंग सेशन के दूसरे हिस्से में मार्केट में अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि आज ही वीकली और मंथली फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी है. निफ्टी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स आमतौर पर हर महीने के आखिरी मंगलवार को एक्सपायर होते हैं. अगर तय एक्सपायरी वाले दिन ट्रेडिंग की छुट्टी होती है, तो एक्सपायरी को उससे पहले वाले ट्रेडिंग दिन पर शिफ्ट कर दिया जाता है.
सेटलमेंट के तरीके में बदलाव का प्रस्ताव
डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी कोई नई बात नहीं है, लेकिन क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) नई चीज है. इस साल 3 अगस्त को शुरू किए गए CAS की वजह से कीमतों में अचानक उतार-चढ़ाव और मार्केट में अनिश्चितता देखी गई है. इसी वजह से सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट के तरीके में बदलाव का प्रस्ताव दिया है.
अगस्त F&O सीरीज की एक्सपायरी के दिन, निफ्टी में सेशन के आखिरी कुछ मिनटों में जबरदस्त तेजी देखी गई, जिससे यह दिन के निचले स्तर से लगभग 1% और पिछले क्लोज से 0.50% ऊपर चढ़ गया.
CAS क्या है?
मार्केट रेगुलेटर SEBI ने स्टॉक की कीमत तय करने की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नीलामी (ऑक्शन) पर आधारित एक नया सिस्टम बनाया है. CAS हर ट्रेडिंग दिन दोपहर 3:15 बजे से 3:35 बजे तक होता है, जो रेगुलर मार्केट के 3:15 बजे बंद होने के ठीक बाद शुरू होता है.
इस 20 मिनट के समय में निवेशक योग्य शेयरों की आधिकारिक क्लोजिंग कीमत तय करने में मदद के लिए मार्केट और लिमिट ऑर्डर दे सकते हैं.
ऑर्डर डालने का समय
ऑर्डर डालने का समय दोपहर 3:28 बजे से 3:30 बजे के बीच किसी भी समय बंद हो सकता है और इसका सही समय एक्सचेंज का सिस्टम अपने-आप तय करता है. इस तरह रैंडम समय पर बंद करने का मकसद आखिरी मिनट में स्टॉक की कीमतों में हेर-फेर को रोकना है.
जबकि कैश मार्केट की क्लोजिंग ऑक्शन दोपहर 3:35 बजे खत्म होती है, इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में ट्रेडिंग दोपहर 3:40 बजे तक जारी रहती है.
नीलामी के बाद, कैश मार्केट में दोपहर 3:50 बजे से 4:00 बजे तक ‘पोस्ट-क्लोज सेशन’ होता है, जिसमें निवेशक क्लोजिंग ऑक्शन सेशन से तय हुई आखिरी क्लोजिंग कीमत पर ही शेयर खरीद या बेच सकते हैं.
आखिरी मिनट में भारी उतार-चढ़ाव
हालांकि, डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के नए क्लोजिंग सिस्टम की वजह से सेशन के आखिरी कुछ मिनटों में मुख्य इंडेक्स में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया.
SEBI ने सेटलमेंट के तरीके में बदलाव का प्रस्ताव दिया है. 12 सितंबर को जारी एक कंसल्टेशन पेपर में यह सुझाव दिया गया था कि इंडेक्स और स्टॉक डेरिवेटिव्स के लिए एक्सपायरी-डे सेटलमेंट की कीमतों की गणना ‘ब्लेंडेड वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस’ (VWAP) तरीके से की जा सकती है.
इसमें लगातार ट्रेडिंग सेशन (CTS) के आखिरी 30 मिनट और क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के 10 मिनट के ट्रेड को शामिल किया जाएगा.
आखिरी 30 मिनट क्यों सबसे अहम हो सकते हैं?
आज के आखिरी 30 मिनट आम दिनों के मुकाबले अधिक अहम हो सकते हैं, क्योंकि निफ्टी में वीकली और मंथली एक्सपायरी दोनों हो रही हैं. इससे क्लोजिंग के समय पोजीशन में बड़े बदलाव, रोलओवर एक्टिविटी और उतार-चढ़ाव बढ़ सकते हैं.
चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर ने बताया कि CAS फैक्टर क्लोजिंग के समय कीमतों में उतार-चढ़ाव को और बढ़ा सकता है, जिससे टेक्निकल नजरिए से आखिरी क्लोजिंग लेवल अहम हो जाता है.
टेलर का मानना है कि शॉर्ट-टर्म रिकवरी की किसी भी कोशिश के लिए निफ्टी का 22,500 का लेवल एक अहम सपोर्ट जोन बना हुआ है.
अहम रेजिस्टेंस जोन
टेलर ने कहा, ‘अगर इंडेक्स इस लेवल के ऊपर बना रहता है, तो कुछ स्थिरता या 22,800-23,000 की तरफ रिकवरी दिख सकती है. हालांकि, 22,500 के नीचे जाने पर सेटअप और कमज़ोर हो जाएगा और इंडेक्स 22,182-22,100 की तरफ जा सकता है.’
टेलर ने कहा, ‘ऊपर की तरफ 23,000 अब एक अहम रेजिस्टेंस जोन बन गया है, क्योंकि यह लेवल पहले जून 2026 के स्विंग लो के आसपास मजबूत सपोर्ट के तौर पर काम कर चुका है. शॉर्ट-टर्म ट्रेंड तय करने में आखिरी 30 मिनट और इन अहम जोन के आसपास क्लोजिंग लेवल अहम होंगे.’
डिस्क्लेमर: Money9live कभी भी किसी शेयर, आईपीओ और म्यूचुअल फंड में निवेश की सलाह नहीं देता है. ये खबर केवल आपकी जानकारी के लिए है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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