8th Pay Commission: रेलवे पेंशनर्स की बड़ी मांगें, पेंशन से मेडिकल सुविधा तक बदलाव की उम्मीद
रेलवे सीनियर सिटिजन्स वेलफेयर सोसाइटी ने 8th Pay Commission के सामने पेंशनर्स के लिए कई अहम मांगें रखी हैं. संगठन ने पेंशन बराबरी के लिए OROP जैसी व्यवस्था, 5 फीसदी सालाना इंक्रीमेंट और बेहतर फिटमेंट फैक्टर की मांग की है. इसके अलावा मेडिकल सुविधाओं में सुधार, ग्रेच्युटी लिमिट की समीक्षा और पेंशन कम्यूटेशन बहाली की अवधि घटाने का सुझाव दिया गया है.

8th Pay Commission को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों के साथ पेंशनर्स की भी उम्मीदें बढ़ गई हैं. रेलवे सीनियर सिटिजन्स वेलफेयर सोसाइटी ने 8th Pay Commission को अपना मेमोरेंडम सौंपकर पेंशन और रिटायरमेंट से जुड़ी कई मांगें रखी हैं. संगठन का कहना है कि नए सैलरी स्ट्रक्चर का सीधा असर पेंशन पर भी पड़ता है. ऐसे में सैलरी और पेंशन में बैलेंस जरूरी है. संगठन ने पेंशन बराबरी, फिटमेंट फैक्टर, सालाना इंक्रीमेंट, मेडिकल सुविधा और रिटायरमेंट बेनिफिट में बदलाव की मांग की है. अगर इन सुझावों पर विचार होता है तो लाखों पेंशनर्स को फायदा मिल सकता है.
पेंशनर्स के लिए क्या है सबसे बड़ी मांग
CNBC TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे पेंशनर्स ने पेंशन में समानता को लेकर बड़ी मांग रखी है. संगठन ने अलग-अलग समय पर रिटायर हुए पेंशनर्स के बीच अंतर कम करने के लिए वन रैंक वन पेंशन यानी OROP जैसी व्यवस्था पर विचार करने को कहा है. उसका कहना है कि समान स्तर और समान सेवा अवधि वाले पेंशनर्स को फायदा मिलना चाहिए. इससे पुराने और नए पेंशनर्स के बीच पेंशन में अंतर कम हो सकता है. हालांकि अभी यह केवल संगठन की मांग है और इस पर सरकार या 8th Pay Commission का अंतिम फैसला नहीं आया है.
5 फीसदी सालाना इंक्रीमेंट की मांग
रेलवे पेंशनर्स ने मौजूदा 3 फीसदी सालाना इंक्रीमेंट की भी समीक्षा की मांग की है. संगठन के अनुसार महंगाई और लंबे करियर को देखते हुए 3 फीसदी की बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं है. इसके लिए सालाना इंक्रीमेंट को बढ़ाकर 5 फीसदी करने का सुझाव दिया गया है. इसके अलावा कुछ तय वर्षों की सेवा पूरी होने पर अतिरिक्त इंक्रीमेंट देने का विकल्प भी सुझाया गया है. इस मांग का मकसद कर्मचारियों की आय में बेहतर बढ़ोतरी और रिटायरमेंट के बाद पेंशन को मजबूत करना है.
फिटमेंट फैक्टर और पे मैट्रिक्स में बदलाव
8th Pay Commission के तहत फिटमेंट फैक्टर को लेकर भी पेंशनर्स ने सुझाव दिया है. संगठन चाहता है कि फिटमेंट फैक्टर केवल महंगाई की भरपाई तक सीमित न रहे बल्कि रियल इनकम में भी बेहतर बढ़ोतरी सुनिश्चित करें. इसके साथ ही 7th Pay Commission के पे मैट्रिक्स में अलग-अलग लेवल के बीच सैलरी अंतर की समीक्षा की मांग की गई है. खासकर मिडिल और हायर लेवल पर वित्तीय प्रगति को बेहतर बनाने की बात कही गई है. पेंशनर्स का कहना है कि सैलरी संशोधन का उचित असर पेंशन में भी दिखना चाहिए.
ग्रेच्युटी और पेंशन कम्यूटेशन पर भी मांग
रेलवे पेंशनर्स ने रिटायरमेंट से जुडे़ दूसरे फायदे बढ़ाने की भी मांग की है. इसमें ग्रेच्युटी की लिमिट की समय- समय पर समीक्षा और रिटायरमेंट से जुडे़ बकाया भुगतान का जल्द निपटारा शामिल है. संगठन ने पेंशन कम्यूटेशन की बहाली की अवधि को भी कम करने का सुझाव दिया है. मौजूदा 15 साल की अवधि को घटाकर करीब 10 से 12 साल करने की मांग की गई है. इसके अलावा MACP के तहत वित्तीय बढ़ोतरी के बीच 10 साल के अंतर की समीक्षा और करियर प्रोग्रेशन के बेहतर मौके देने की मांग भी रखी गई है.
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क्या अभी बढ़ेगी पेंशन
यह समझना जरूरी है कि रेलवे पेंशनर्स की ओर से रखी गई ये मांगें अभी अंतिम फैसला नहीं हैं. 8th Pay Commission इन सुझावों पर विचार कर अपनी सिफारिशें सरकार को देगा. इसके बाद सरकार सिफारिशों को स्वीकार करने या बदलाव करने पर फैसला लेगी. इसलिए फिलहाल पेंशन में कितनी बढ़ोतरी होगी या फिटमेंट फैक्टर कितना होगा, इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं है. पेंशनर्स के लिए अभी सबसे अहम बात यह है कि उनकी मांगें 8th Pay Commission के सामने पहुंच गई हैं और अब इन पर आयोग के रुख का इंतजार है.