मां-बाप को किराया दिखाकर क्लेम करते हैं HRA? 2026 ड्राफ्ट टैक्स रूल्स में मकान मालिक से रिश्ता होगा बताना, भरना पड़ेगा ये फॉर्म

2026 के ड्राफ्ट टैक्स नियमों में HRA क्लेम करने वाले सैलरीड कर्मचारियों को मकान मालिक से अपना रिश्ता बताना होगा. खासकर जब किराया रिश्तेदार को दिया जा रहा हो. असली रेंट एग्रीमेंट, बैंक ट्रांजैक्शन और सही दस्तावेज जरूरी होंगे. HRA छूट सैलरी, किराये और शहर के आधार पर तय होगी.

HRA Image Credit: @Money9live

अगर आप सैलरीड कर्मचारी हैं और HRA (हाउस रेंट अलाउंस) क्लेम करते हैं तो 2026 के ड्राफ्ट आयकर नियमों के तहत अब आपको मकान मालिक से अपना रिश्ता भी बताना पड़ सकता है. खासकर तब, जब आप किराया अपने माता-पिता, रिश्तेदार या परिवार के किसी सदस्य को देते हैं. सरकार इस कदम के जरिए किराये के लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ाना चाहती है और फर्जी HRA क्लेम पर रोक लगाना चाहती है.

क्या करना होगा

ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक, कर्मचारियों को HRA क्लेम करते समय फॉर्म 124 (जो फॉर्म 12BB से जुड़ा है) में मकान मालिक से संबंध का खुलासा करना होगा. टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि रिश्तेदार को किराया देना गलत नहीं है लेकिन ट्रांजैक्शन वास्तविक होना चाहिए और इसके लिए सही दस्तावेज जरूरी होंगे.

HRA क्लेम करते समय क्या-क्या ध्यान रखें

  • लिखित रेंट एग्रीमेंट जरूर बनाएं
  • किराया बैंक ट्रांसफर या चेक से दें
  • मकान मालिक अपनी आयकर रिटर्न में किराया आय दिखाए
  • सालाना किराया ₹1 लाख से ज्यादा हो तो PAN देना जरूरी
  • फॉर्म में मकान मालिक से अपना रिश्ता सही-सही बताएं

HRA छूट कैसे तय होती है

HRA पर मिलने वाली टैक्स छूट तीन में से जो सबसे कम होगी, वही मिलेगी. HRA पर सेक्शन 80C या 80D की तरह कोई फिक्स अधिकतम सीमा नहीं होती, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि HRA पूरी तरह अनलिमिटेड है.

HRA छूट तय करने के नियम

  • आपको जितना HRA मिला है (कंपनी से)
  • मेट्रो शहर (मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, दिल्ली) में रहने पर सैलरी का 50%
  • अन्य शहरों में रहने पर सैलरी का 40%
  • आपने जो किराया दिया है, उसमें से सैलरी का 10% घटाने के बाद बची रकम
  • इन तीनों में से जो राशि सबसे कम होगी, वही HRA की टैक्स छूट मानी जाएगी
  • यानी HRA की छूट आपकी सैलरी, शहर और दिए गए किराये पर निर्भर करती है
  • इसलिए HRA का फायदा लेने के लिए सही किराया, सैलरी स्ट्रक्चर और शहर का ध्यान रखना जरूरी है

रिश्तेदार को किराया देने पर क्या ध्यान रखें

आप माता-पिता या दादा-दादी को किराया देकर HRA क्लेम कर सकते हैं लेकिन किराया वास्तविक होना चाहिए. रेंट एग्रीमेंट, बैंक ट्रांसफर और सही टैक्स डिक्लेरेशन जरूरी है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पत्नी को किराया देकर HRA क्लेम करने पर टैक्स विभाग ज्यादा जांच कर सकता है.

कितना HRA कर सकते हैं क्लेम

मान लीजिए किसी कर्मचारी की सालाना कुल सैलरी ₹18 लाख है और वह मुंबई जैसे मेट्रो शहर में किराये के घर में रहता है. उसकी बेसिक सैलरी ₹7,20,000 और महंगाई भत्ता (DA) ₹1,80,000 है. यानी HRA कैलकुलेशन के लिए कुल सैलरी ₹9,00,000 मानी जाएगी. कर्मचारी को कंपनी से सालाना ₹3,60,000 HRA मिलता है और वह साल भर में ₹4,50,000 किराया देता है. अब नियम के अनुसार HRA छूट तीन में से जो सबसे कम होगी, वही मिलेगी.

विवरणराशि (₹)
मिला हुआ HRA3,60,000
किराया – सैलरी का 10%4,50,000 – 90,000 = 3,60,000
सैलरी का 50% (मेट्रो)4,50,000
मिलने वाली HRA छूट3,60,000

यहां तीनों में सबसे कम राशि ₹3,60,000 है, इसलिए कर्मचारी को इतनी ही HRA टैक्स छूट मिलेगी.

इसे भी पढ़ें: होम लोन लेते समय सैलरी से ज्यादा जरूरी है क्रेडिट स्कोर, जानिए कैसे तय होता है आपका लोन