बेटी और पिता की PPF रकम को लेकर कानूनी लड़ाई, क्या माता-पिता बच्चे के नाम का PPF पैसा निकाल सकते हैं?
दिल्ली हाई कोर्ट ने PPF को लेकर अहम फैसला दिया है. कोर्ट ने कहा कि बच्चे के नाम पर जमा PPF की रकम पर उसी का हक है. पिता बेटी के गुजारे-भत्ते की जिम्मेदारी निभाने के लिए उसकी रकम इस्तेमाल नहीं कर सकता.

क्या कोई पिता अपनी बेटी के नाम पर खोले गए PPF खाते में जमा पैसा निकालकर उसे बेटी के खर्च और देखभाल पर इस्तेमाल कर सकता है? दिल्ली हाई कोर्ट के सामने हाल ही में ऐसा ही एक मामला आया, जिसमें कोर्ट ने साफ किया कि बच्चे के नाम पर जमा PPF की रकम पर किसका हक है.
इस मामले में पिता ने अपनी नाबालिग बेटी के नाम पर खोला गया PPF खाता मैच्योर होने के बाद बंद कर दिया और पूरी रकम अपने निजी बैंक खाते में ट्रांसफर कर ली. पिता ने यह बात स्वीकार भी की. उनका कहना था कि उन्हें खाता बंद करने का अधिकार था और निकाली गई रकम बेटी की भलाई और जरूरतों पर ही खर्च की जा रही थी.
लेकिन सवाल यह था कि आखिर बेटी को अपने ही पिता के खिलाफ कोर्ट क्यों जाना पड़ा? कोर्ट ने क्या फैसला दिया और PPF की रकम पर असली हक किसका माना गया? आइए जानते हैं इस पूरे मामले की कहानी.
बेटी और पिता के बीच PPF को लेकर क्या हुआ?
दिल्ली के एक व्यक्ति ने 9 दिसंबर 1999 को अपनी नाबालिग बेटी के नाम पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की जनकपुरी शाखा में PPF खाता खोला था. यह खाता 31 मार्च 2016 को मैच्योर हो गया.
जिस बेटी के नाम पर यह PPF खाता था, वह 13 नवंबर 2016 को बालिग हो गई. इसके कुछ महीने बाद सितंबर 2017 में उसने बैंक से अपने नाबालिग PPF खाते को सामान्य खाते में बदलने और उसमें दर्ज पिता के नाम को अभिभावक के तौर पर हटाने के लिए संपर्क किया.
लेकिन बैंक ने ऐसा करने से मना कर दिया.
बैंक ने बेटी को बताया कि उसका PPF खाता 31 मार्च 2016 को ही मैच्योर हो चुका था और उसके पिता ने 18 अक्टूबर 2016 को खाता बंद करके पूरी रकम निकाल ली थी. इसके बाद बेटी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और 8,13,853.79 रुपये की पूरी रकम और उस पर आगे का ब्याज वापस दिलाने की मांग की.
पिता ने बेटी के नाम का PPF पैसा कैसे निकाला?
बेटी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि PPF खाता उसकी जानकारी और कानूनी प्रक्रिया के बिना बंद कर दिया गया और 8,13,853.79 रुपये की पूरी रकम निकाल ली गई. पैसा निकालते समय पिता ने बैंक को एक लिखित आश्वासन दिया था. इसमें उन्होंने कहा था कि यह रकम बेटी की उच्च शिक्षा और उसकी भलाई पर खर्च की जाएगी. इसके साथ उन्होंने PPF पासबुक और उम्र के प्रमाण के लिए पासपोर्ट की कॉपी भी जमा की थी. बेटी Technical Institute of Advanced Studies से BBA की पढ़ाई कर रही थी. उसकी सालाना फीस करीब 85,200 रुपये थी. उसका कहना था कि पैसे नहीं होने के कारण उसे पढ़ाई और दूसरे खर्च पूरे करने में परेशानी हो रही थी.
बेटी ने पिता के खिलाफ केस क्यों किया?
बेटी ने कोर्ट में बताया कि उसके माता-पिता के बीच वैवाहिक विवाद चल रहा था और वह अपनी मां के साथ रह रही थी. उसने आरोप लगाया कि पिता ने उसके नाम पर जमा पूरी रकम निकाल ली ताकि उसकी मां पर आर्थिक दबाव बनाया जा सके. इससे बेटी के लिए पढ़ाई और दूसरे खर्च पूरे करना मुश्किल हो गया.
दूसरी तरफ, पिता ने 8.13 लाख रुपये PPF खाते से निकालने की बात स्वीकार की. हालांकि, उन्होंने कहा कि उन्होंने यह पैसा किसी गलत इरादे से नहीं, बल्कि बेटी के हित में निकाला था. पिता का कहना था कि PPF खाता पहले ही मैच्योर हो चुका था, इसलिए उन्हें उसे बंद करने और रकम निकालने का अधिकार था. उनका दावा था कि पैसा बेटी की जरूरतों पर ही खर्च किया जा रहा था.
उन्होंने यह भी बताया कि देहरादून फैमिली कोर्ट के 2016 के आदेश के तहत वह 16 जून 2016 से 28 मई 2018 तक बेटी को हर महीने 12,000 रुपये का गुजारा भत्ता दे रहे थे. पिता के मुताबिक, अब तक वह करीब 6 लाख रुपये दे चुके थे. इसलिए उन्होंने मांग की कि इस रकम को PPF से निकाले गए पैसे में एडजस्ट किया जाए. उन्होंने उत्तराखंड हाई कोर्ट के आदेश के तहत अपनी पत्नी को दिए जा रहे 35,000 रुपये प्रति माह के गुजारा भत्ते का भी जिक्र किया. उनका तर्क था कि बेटी को इन भुगतानों का भी फायदा मिला है.
कोर्ट ने क्या कहा?
दिल्ली की ट्रायल कोर्ट ने 2023 में पिता की दलील को खारिज कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि अदालत के आदेश के तहत दिया गया गुजारा भत्ता बेटी के PPF पैसे में एडजस्ट नहीं किया जा सकता. इसके बाद ट्रायल कोर्ट ने पिता को बेटी की पूरी 8.13 लाख रुपये की रकम वापस करने का आदेश दिया. साथ ही इस रकम पर 8% ब्याज देने को भी कहा गया. इस फैसले के खिलाफ पिता दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचे.
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि क्या कोई पिता अपने बच्चे के नाम पर किए गए निवेश का पैसा बच्चे के गुजारे-भत्ते के लिए इस्तेमाल कर सकता है?कोर्ट ने साफ कहा कि बच्चे की परवरिश और रोजमर्रा के खर्च उठाना माता-पिता की कानूनी जिम्मेदारी है.
सिर्फ माता-पिता के बीच वैवाहिक विवाद होने की वजह से पिता बच्चे के नाम पर जमा पैसे को उसके गुजारे-भत्ते के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकता. ऐसा करने का मतलब होगा कि पिता अपनी कानूनी जिम्मेदारी पूरी करने के लिए बच्चे के ही पैसे का इस्तेमाल कर रहा है.
PPF की रकम पर किसका हक माना गया?
दिल्ली हाई कोर्ट ने साफ कर दिया कि PPF निवेश बेटी के नाम पर था, इसलिए 8.13 लाख रुपये की रकम पर बेटी का ही हक है. पिता इस रकम को अपनी तरफ से दिए गए गुजारे-भत्ते के बदले एडजस्ट नहीं कर सकते. यानी बेटी के पालन-पोषण का खर्च उठाना पिता की जिम्मेदारी है और इसके लिए बेटी की बचत का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने यह भी माना कि पिता ने बेटी को हर महीने 12,000 रुपये दिए थे, लेकिन यह भुगतान उनकी अपनी कानूनी जिम्मेदारी निभाने के लिए था. इसे बेटी के PPF पैसे से घटाया नहीं जा सकता.
पिता को पूरी रकम ब्याज समेत लौटानी होगी
दिल्ली हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए पिता को बेटी को 8,13,853.79 रुपये वापस करने का आदेश दिया. इसके साथ ही इस रकम पर सालाना 8% ब्याज भी देना होगा. कोर्ट ने ब्याज की दर उस समय लागू PPF ब्याज दर के आधार पर तय की. इस फैसले से साफ है कि अगर माता-पिता अपने नाबालिग बच्चे के नाम पर PPF या कोई अन्य निवेश करते हैं, तो सिर्फ पैसा जमा करने वाला होने के आधार पर वे उस रकम को अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए मनमाने तरीके से इस्तेमाल नहीं कर सकते. बच्चे के नाम पर मौजूद निवेश पर बच्चे के अधिकार को अहम माना जाएगा.
यह भी पढ़ें- EPFO ने दी बड़ी चेतावनी, एक क्लिक से खाली हो सकता है अकाउंट