विदेश भेजे जा रहे पैसों का हिसाब खंगाल रहा आयकर विभाग, 394 संस्थाएं जांच के घेरे में
आयकर विभाग ने विदेश भेजी गई बड़ी रकम के मामलों में देशभर में जांच शुरू की है. विभाग को ऐसी संस्थाओं का पता चला, जिनका कारोबार बेहद कम था या वे आयकर रिटर्न दाखिल नहीं कर रही थीं, लेकिन विदेश बड़ी रकम भेज रही थीं. जांच में करीब 394 संस्थाओं और 36 पेशेवरों को शामिल किया गया है. Form 15CB और Form 146 जारी करने वालों की भी जांच होगी.
Highlights
- आयकर विभाग ने विदेश भेजी गई बड़ी रकम के मामलों में देशभर में जांच शुरू की है.
- विभाग को ऐसी संस्थाओं का पता चला, जिनका कारोबार बेहद कम था या वे आयकर रिटर्न दाखिल नहीं कर रही थीं, लेकिन विदेश बड़ी रकम भेज रही थीं.
- जांच में करीब 394 संस्थाओं और 36 पेशेवरों को शामिल किया गया है.
विदेश भेजे जा रहे बड़े पैमाने पर पैसों को लेकर आयकर विभाग ने देशभर में जांच शुरू की है. विभाग को डेटा विश्लेषण और जमीनी जानकारी से ऐसे कई मामलों का पता चला है, जहां कुछ संस्थाएं बहुत कम या बिना किसी कारोबार के बड़ी रकम विदेश भेज रही थीं. अब विभाग इन संस्थाओं के साथ-साथ उनके पीछे मौजूद लोगों और विदेशी रकम भेजने से जुड़े प्रमाणपत्र जारी करने वाले पेशेवरों की भी जांच कर रहा है.
आयकर विभाग ने 18 अगस्त 2026 को यह देशव्यापी जांच शुरू की है. इसमें करीब 394 संस्थाओं और 36 पेशेवरों को शामिल किया गया है. इन 394 संस्थाओं में 117 ऐसी संस्थाएं हैं, जो देश की अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे राज्यों में स्थित हैं.
बड़ी रकम विदेश भेजने वाली संस्थाएं जांच के घेरे में
विभाग के मुताबिक, पिछले तीन साल में विदेश भेजी गई रकम से जुड़े आंकड़ों और जमीनी जानकारी का विश्लेषण किया गया. इसमें कई ऐसी संस्थाओं की पहचान हुई, जिन्होंने बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा विदेश भेजी थी. इनमें से कुछ संस्थाएं या तो आयकर रिटर्न दाखिल नहीं कर रही थीं या फिर बहुत कम कारोबार दिखा रही थीं. वहीं, उनके द्वारा विदेश भेजी गई रकम काफी ज्यादा थी.
विभाग को इन संस्थाओं के बताए कारोबार और विदेश भेजी गई रकम के बीच भी कोई साफ संबंध नजर नहीं आया.
फर्जी संस्थाओं के जरिए पैसे भेजने का शक
विभाग की एक तलाशी कार्रवाई में फर्जी धर्मार्थ ट्रस्टों का एक नेटवर्क सामने आया था. इन ट्रस्टों पर फर्जी दान और योगदान के बदले गलत तरीके से एंट्री देने का आरोप था. इसके बाद की शुरुआती जांच में पता चला कि विदेश पैसा भेजने वाली कुछ संस्थाएं अपने बताए पते पर काम भी नहीं कर रही थीं.
विदेश भेजी गई रकम के लिए माल ढुलाई, सॉफ्टवेयर आयात या सलाहकार सेवाओं के पेमेंट जैसे कारण बताए गए थे. लेकिन विभाग की जमीनी जानकारी में इन दावों और वास्तविक गतिविधियों के बीच मेल नहीं मिला.
15CB प्रमाणपत्र जारी करने वाले पेशेवर भी जांच के दायरे में
आयकर विभाग ने विदेश भेजे गए पैसों से जुड़े Form 15CB प्रमाणपत्रों की भी जांच की है. विभाग के मुताबिक, बड़ी संख्या में ऐसे प्रमाणपत्र कुछ ही पेशेवरों के एक छोटे समूह ने जारी किए थे. साथ ही, विदेश भेजी गई रकम कुछ गिनी-चुनी संस्थाओं के समूह तक पहुंच रही थी. इससे विभाग को इन लेनदेन की जांच की जरूरत महसूस हुई.
Form 15CB और Form 146 के तहत विदेश भेजी जाने वाली रकम की कर देनदारी से जुड़ी जानकारी की जांच करना जरूरी होता है. प्रमाणपत्र जारी करने वाले Accountant को खातों और दूसरे जरूरी दस्तावेजों के आधार पर यह जांच करनी होती है कि विदेश भेजी जा रही रकम पर टैक्स बनता है या नहीं.
394 संस्थाएं और 36 पेशेवर जांच के घेरे में
आयकर विभाग की इस देशव्यापी जांच में करीब 394 संस्थाओं को शामिल किया गया है. इनमें 117 संस्थाएं अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे राज्यों के जिलों में स्थित हैं. इसके अलावा 36 ऐसे पेशेवरों को भी जांच में शामिल किया गया है, जिन्होंने Form 15CB प्रमाणपत्र जारी किए हैं.
विभाग का फोकस खास तौर पर ऐसी संस्थाओं, उनके पीछे मौजूद लोगों और विदेशी रकम भेजने से जुड़े प्रमाणपत्र जारी करने वाले पेशेवरों पर है.
Accountants को भी विभाग की चेतावनी
आयकर विभाग ने कहा है कि Form 15CB और Form 146 जारी करने वाले Accountants को प्रमाणपत्र देने से पहले पूरी सावधानी बरतनी चाहिए. उन्हें संबंधित लेनदेन, जरूरी दस्तावेजों और उससे जुड़े तथ्यों की ठीक से जांच करनी चाहिए. विभाग ने साफ किया है कि इन प्रमाणपत्रों की व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बनाए रखने में पेशेवरों की अहम भूमिका है.
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