नोटबंदी में कैश जमा करने वालों के लिए जरूरी खबर, अगर नहीं दी सोर्स की सही जानकारी तो अटक सकता है पैसा

नोटबंदी के दौरान 32 लाख रुपये कैश जमा करने के मामले में ITAT ने टैक्सपेयर्स को 10.78 लाख रुपये की राहत दी है. ट्रिब्यूनल ने सास द्वारा सोना बेचने से मिली 2.84 लाख रुपये की रकम को स्वीकार किया. हालांकि, बिना खरीदार की पहचान वाले कैश मेमो के आधार पर 8.37 लाख रुपये की रकम को अस्पष्ट माना गया.

32 लाख रुपये कैश जमा करने के मामले में ITAT का फैसला. Image Credit: jayk7/Moment/Getty Images

Highlights

  • 32 लाख रुपये कैश जमा करने के मामले में ITAT का फैसला.
  • टैक्सपेयर्स को कुल 10.78 लाख रुपये की राहत मिली
  • सोने की बिक्री से मिली 2.84 लाख रुपये की रकम स्वीकार.

नोटबंदी के दौरान अगर आपने बैंक में बड़ी रकम कैश जमा की थी, तो यह खबर आपके काम की है. 32 लाख रुपये कैश जमा करने के एक मामले में इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल यानी ITAT ने टैक्सपेयर्स को आंशिक राहत दी है. ITAT ने सोने की बिक्री से मिली 2.84 लाख रुपये की रकम को स्वीकार कर लिया है. वहीं, 8.37 लाख रुपये की रकम के सोर्स का पर्याप्त सबूत नहीं मिलने पर राहत देने से इनकार कर दिया. ऐसे में यह फैसला बताता है कि कैश जमा करने पर उसके सोर्स का सबूत कितना जरूरी है.

कैश जमा का पूरा मामला क्या था

मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, टैक्सपेयर्स ज्वेलरी बनाने और सोने की बिक्री का कारोबार करती थी. उसने 10 नवंबर 2016 को अपने Syndicate Bank खाते में 32 लाख रुपये नकद जमा किए थे. यह रकम नोटबंदी की घोषणा के कुछ समय बाद जमा की गई थी. टैक्सपेयर्स ने बताया कि कैश उसके शुरुआती कैश बैलेंस, सोने की बिक्री और Pigmy Deposit की मैच्योरिटी से आया था. आयकर अधिकारी ने 12.84 लाख रुपये की रकम को सही माना था.

19.15 लाख रुपये को बताया गया था इनकम

आयकर अधिकारी ने बाकी 19.15 लाख रुपये को Section 69A के तहत अस्पष्ट पैसा माना था. इसके बाद टैक्सपेयर्स की कुल इनकम 24.09 लाख रुपये तय की गई. जबकि रिटर्न में उसने 4.94 लाख रुपये की इनकम दिखाई थी. टैक्सपेयर्स ने इस फैसले को पहले CIT Appeal के सामने चुनौती दी. वहां उसे 7.95 लाख रुपये की राहत मिली. इसके बाद 11.21 लाख रुपये की रकम पर विवाद बना रहा और मामला ITAT पहुंचा.

सास के सोने की बिक्री से मिली राहत

ITAT के सामने टैक्सपेयर्स ने बताया कि उसकी सास ने करीब 9.51 लाख रुपये का सोना बेचा था. इस बिक्री से मिली रकम को भी बैंक में जमा कैश का सोर्स बताया गया था. टैक्सपेयर्स ने इस ट्रांजेक्शन के सपोर्ट में कंफर्मेशन लेटर भी दिए थे. ITAT ने माना कि सोने की बिक्री का तथ्य स्वीकार किया गया था और संबंधित पुष्टि भी उपलब्ध थी. इसलिए 2.84 लाख रुपये की रकम को स्वीकार करते हुए इसे हटाने का आदेश दिया गया.

8.37 लाख रुपये की रकम पर राहत नहीं

टैक्सपेयर्स ने बाकी रकम को साबित करने के लिए सोने की बिक्री से जुड़े कैश मेमो पेश किए थे. लेकिन इन मेमो में ग्राहकों के नाम या उनकी पहचान की जानकारी नहीं थी. कथित खरीदारों की ओर से कोई पुष्टि भी पेश नहीं की गई. न ऑफिसर के सामने और न ही CIT Appeal या ITAT के सामने ऐसे डॉक्यूमेंट दिए गए. इसलिए ITAT ने 8.37 लाख रुपये की रकम को अस्पष्ट माना और इस पर की गई कार्रवाई को बरकरार रखा.

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बड़े कैश ट्रांजेक्शन में सबूत जरूरी

ITAT के इस फैसले से टैक्सपेयर्सओं के लिए एक अहम बात सामने आती है. बैंक खाते में जमा बड़ी नकद रकम के सोर्स को साबित करने के लिए केवल कैश मेमो काफी नहीं हो सकता. डॉक्यूमेंट में लेनदेन करने वाले व्यक्ति की पहचान और रकम के सोर्स की जानकारी होना जरूरी है. इस मामले में परिवार की सदस्य द्वारा बेचे गए सोने की रकम को इसलिए राहत मिली क्योंकि उसकी पुष्टि उपलब्ध थी. यानी कैश का सोर्स जितना साफ होगा, टैक्स जांच में स्थिति उतनी मजबूत होगी.