ITR फाइल करने जा रहे हैं? जान लीजिए Section 87A का गणित, ₹12 लाख तक की आय पर ऐसे बचेगा टैक्स
ITR फाइलिंग से पहले टैक्स रिबेट समझना बेहद जरूरी है. नई टैक्स व्यवस्था में 12 लाख तक की आय पर बड़ी राहत मिलती है. जानिए Section 87A, मार्जिनल रिलीफ और रिबेट क्लेम करने का आसान तरीका, ताकि टैक्स कम किया जा सके.

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने का समय करीब आते ही टैक्सपेयर्स के बीच गुणा-भाग शुरू हो जाता है. हालांकि अब ई-फाइलिंग पहले से कहीं अधिक आसान हो गई है, लेकिन पहली बार रिटर्न भरने वालों के लिए ‘छूट’ (Rebate) और ‘कटौती’ (Deduction) के बीच का अंतर समझना आज भी किसी चुनौती से कम नहीं है. अगर आपकी कमाई एक तय सीमा के भीतर है, तो सरकार आपको टैक्स में बड़ी राहत देती है, जिसे ‘रिबेट’ कहा जाता है.
आइए जानते हैं कि नई और पुरानी टैक्स व्यवस्था में आपको कितनी राहत मिल सकती है और इसका दावा कैसे किया जाता है.
क्या है टैक्स रिबेट और आपको कितनी मिलेगी छूट?
टैक्स रिबेट का सीधा मतलब है आपके द्वारा देय टैक्स में से एक निश्चित राशि की कटौती. यह मुख्य रूप से मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों को राहत देने के लिए दी जाती है.
- Old Regime: यदि आपकी आय ₹5 लाख तक है, तो आपको ₹12,500 तक की रिबेट मिलती है.
- New Regime: यहां राहत और भी ज्यादा है. ₹12 लाख तक की आय पर ₹60,000 तक की रिबेट का प्रावधान है.
रिबेट लागू करने का तरीका
Clear Tax की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, रिबेट का दावा धारा 87A (Section 87A) के तहत किया जाता है. खास बात यह है कि यह छूट 4% स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर (Cess) जोड़ने से पहले ही कुल टैक्स पर लागू की जाती है. ध्यान रहे, रिबेट और डिडक्शन (जैसे 80C) अलग-अलग चीजें हैं. रिबेट सीधे आपके फाइनल टैक्स बिल को कम करती है.
ITR फाइलिंग में रिबेट का दावा कैसे करें?
- ग्रॉस टोटल इनकम: सबसे पहले वित्त वर्ष की अपनी कुल कमाई जोड़ें.
- कटौती घटाएं: निवेश, टैक्स बचत आदि के आधार पर लागू छूट और कटौती (Deductions) को घटाएं.
- टैक्सेबल इनकम: इसके बाद जो शुद्ध कर योग्य आय बचेगी, उसे ITR में घोषित करें.
- रिबेट का दावा: यदि आपकी आय निर्धारित सीमा (नई व्यवस्था में 12 लाख) के भीतर है, तो धारा 87A के तहत रिबेट का दावा करें. इनकम टैक्स विभाग अब ITR-2 और ITR-3 जैसे अपडेटेड फॉर्म में इसे क्लेम करने की सुविधा देता है.
क्या है ‘मार्जिनल रिलीफ’?
नई टैक्स व्यवस्था में यह उन लोगों के लिए वरदान है जिनकी आय ₹12 लाख की सीमा से थोड़ी ही ज्यादा है. यदि आपका टैक्स आपकी बढ़ी हुई आय से अधिक बन रहा है, तो आपका टैक्स केवल उतनी ही राशि तक सीमित कर दिया जाता है जितना आपने ₹12 लाख से ज्यादा कमाया है.
इन परिस्थितियों में नहीं मिलेगी रिबेट
धारा 87A की छूट हर तरह की कमाई पर लागू नहीं होती. निम्नलिखित स्थितियों में आप रिबेट नहीं मांग सकते:
- शेयर बाजार से लाभ: धारा 112A के तहत लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) और धारा 111A के तहत शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG) पर यह छूट नहीं मिलती.
- विशेष आय: लॉटरी या गेम शो से जीती गई राशि पर.
- कैटेगरी: कंपनियां, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) और गैर-निवासी भारतीय (NRI) इस रिबेट के पात्र नहीं हैं.
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Rebate vs Deduction vs Exemption
अक्सर लोग इनमें उलझ जाते हैं. इसे सरल शब्दों में समझें:
- छूट (Exemption): यह आय के उन स्रोतों पर मिलती है जिन्हें टैक्स के दायरे से बाहर रखा गया है.
- कटौती (Deduction): यह आपकी ग्रॉस आय को कम करती है (जैसे LIC या PPF में निवेश).
- रिबेट (Rebate): यह अंत में आपके कैलकुलेटेड टैक्स अमाउंट को घटाती है और केवल धारा 87A के तहत उपलब्ध है.