घर खरीदने जा रहे हैं? होम लोन अप्रूवल से पहले समझ लें क्रेडिट स्कोर का गणित, वरना बढ़ सकती है EMI

घर खरीदने की योजना बना रहे हैं तो होम लोन लेने से पहले क्रेडिट स्कोर का गणित समझना बेहद जरूरी है. बैंक सबसे पहले आपके क्रेडिट प्रोफाइल, सिबिल स्कोर, आय और EMI क्षमता को देखते हैं. आमतौर पर 700+ स्कोर अच्छा माना जाता है, जबकि 750+ स्कोर बेहतर ब्याज दर और तेज मंजूरी दिला सकता है.

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Home Loan Credit Score: अगर आप घर खरीदने की योजना बना रहे हैं और होम लोन लेने का विचार कर रहे हैं, तो सिर्फ अच्छी आय या डाउन पेमेंट काफी नहीं है. बैंक और वित्तीय संस्थान सबसे पहले आपके क्रेडिट स्कोर पर नजर डालते हैं. यही स्कोर तय करता है कि आपको लोन मिलेगा या नहीं, कितना मिलेगा और किस ब्याज दर पर मिलेगा. भारत में आमतौर पर 700 या उससे अधिक क्रेडिट स्कोर को होम लोन के लिए अच्छा माना जाता है. हालांकि, अगर आप सबसे बेहतर ब्याज दर, आसान मंजूरी और आकर्षक ऑफर चाहते हैं, तो 750 या उससे ऊपर का स्कोर बेहतर माना जाता है.

क्या होता है क्रेडिट स्कोर

क्रेडिट स्कोर एक संख्यात्मक स्कोर होता है, जो आमतौर पर 300 से 900 के बीच होता है. यह आपकी कर्ज चुकाने की क्षमता और वित्तीय अनुशासन को दिखाता है. जितना ज्यादा स्कोर होगा, उतना ही बैंक का भरोसा आप पर मजबूत माना जाएगा.

भारत में इसे अक्सर सिबिल स्कोर कहा जाता है, लेकिन यह स्कोर सिर्फ एक संस्था ही नहीं, बल्कि ट्रांसयूनियन सिबिल, एक्सपीरियन, इक्विफैक्स और CRIF Highmark जैसी एजेंसियां भी जारी करती हैं. कई बैंक लोन मंजूरी से पहले एक से अधिक ब्यूरो की रिपोर्ट देखते हैं.

कितना क्रेडिट स्कोर होना चाहिए

एक्सपर्ट के अनुसार:

  • 700 से कम स्कोर – लोन मंजूरी मुश्किल हो सकती है या ब्याज दर ज्यादा लग सकती है.
  • 700 से 749 स्कोर – लोन मिलने की अच्छी संभावना, लेकिन बेहतर डील जरूरी नहीं.
  • 750 से ऊपर स्कोर – बेहतरीन माना जाता है, कम ब्याज दर और तेज मंजूरी की संभावना बढ़ती है.
  • 800+ स्कोर – सबसे बेहतर, बैंक ऐसे ग्राहकों को कम जोखिम वाला मानते हैं.

होम लोन लेने से पहले इन 5 बातों का रखें ध्यान

मजबूत क्रेडिट प्रोफाइल: सिर्फ स्कोर ही नहीं, आपका पूरा वित्तीय इतिहास भी महत्वपूर्ण है. समय पर भुगतान और कम डिफॉल्ट रिकॉर्ड लाभ देता है.

  • आय की स्थिरता: आपकी मासिक आय इतनी होनी चाहिए कि EMI चुकाने में दबाव न बने.
  • ब्याज दर से आगे भी देखें: प्रोसेसिंग फी, हिडन चार्जेज, इंश्योरेंस कॉस्ट, लेट पेमेंट चार्जेज जैसी चीजें भी जांचें.
  • सही टेन्योर चुनें: लंबी अवधि EMI कम करती है, लेकिन कुल ब्याज बढ़ा सकती है. छोटी अवधि EMI बढ़ाती है, लेकिन कुल लागत घटा सकती है.
  • फोरक्लोजर रूल्स समझें: अगर आप लोन जल्दी चुकाना चाहें, तो पहले से नियम समझ लें.

कैसे सुधारें क्रेडिट स्कोर

अगर स्कोर कम है, तो घबराने की जरूरत नहीं. इसे सुधारा जा सकता है:

  • सभी EMI और बिल समय पर भरें
  • क्रेडिट कार्ड बकाया कम रखें
  • बार-बार लोन आवेदन न करें
  • क्रेडिट रिपोर्ट नियमित जांचें
  • गलत एंट्री मिले तो सुधार करवाएं

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