ITR प्रोसेस हो गया, फिर भी नहीं आया टैक्स रिफंड? ये हो सकते हैं बड़े कारण

अगर आपका ITR प्रोसेस हो चुका है लेकिन टैक्स रिफंड अभी तक बैंक खाते में नहीं आया है, तो इसकी कई वजहें हो सकती हैं. आमतौर पर ई-वेरिफिकेशन के बाद रिफंड आने में 4 से 5 सप्ताह का समय लगता है. जानिए रिफंड में देरी के प्रमुख कारण और किन बातों की जांच करना जरूरी है.

ITR फाइल Image Credit: CANVA

ITR Refund Status: अगर आपने समय पर इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल कर दिया है और आपका रिटर्न “Processed” भी दिखा रहा है, लेकिन अभी तक टैक्स रिफंड आपके बैंक खाते में नहीं पहुंचा है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. कई मामलों में रिटर्न प्रोसेस होने और रिफंड खाते में आने के बीच कुछ समय लगता है. हालांकि, अगर तय समय के बाद भी रिफंड नहीं मिलता है, तो इसकी वजह जानना जरूरी है.

कब मिलता है ITR रिफंड?

इनकम टैक्स विभाग के मुताबिक, रिफंड की प्रक्रिया तभी शुरू होती है जब टैक्सपेयर्स अपने ITR का ई-वेरिफिकेशन पूरा कर देता है. आमतौर पर ई-वेरिफिकेशन के बाद 4 से 5 सप्ताह के भीतर रिफंड बैंक खाते में जमा हो जाता है. अगर इस अवधि के बाद भी रिफंड नहीं मिलता है, तो टैक्सपेयर को अपने रजिस्टर्ड ईमेल और मोबाइल पर आए किसी संदेश या नोटिस की जांच करनी चाहिए. साथ ही, इनकम टैक्स के ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर रिफंड का स्टेटस भी देखना चाहिए.

रिफंड मिलने के लिए क्या जरूरी है?

इनकम टैक्स विभाग रिफंड जारी करने से पहले कुछ जरूरी शर्तों की जांच करता है. इसके लिए,

  • PAN का आधार से लिंक होना जरूरी है.
  • रिफंड का दावा करते हुए ITR सही तरीके से दाखिल किया गया हो.
  • ई-फाइलिंग पोर्टल का यूजर आईडी और पासवर्ड सक्रिय हो.

किन वजहों से रिफंड अटक सकता है?

रिफंड जारी होने के बावजूद कई कारणों से पैसा बैंक खाते में नहीं पहुंच पाता. इनमें सबसे आम वजहें हैं,

  • गलत बैंक खाता नंबर दर्ज होना.
  • PAN का निष्क्रिय होना.
  • बैंक खाते का प्री-वैलिडेशन नहीं होना.
  • बैंक खाते में दर्ज नाम और PAN पर दर्ज नाम का मेल नहीं खाना.
  • IFSC कोड गलत होना.
  • ITR में दिया गया बैंक खाता बंद हो जाना.
  • बैंक खाता फ्रीज या डॉर्मेंट होना.
  • रिफंड ट्रांसफर के दौरान बैंक की तकनीकी समस्या या ट्रांजैक्शन रिजेक्ट होना.
  • पिछले वर्षों की बकाया टैक्स डिमांड के बदले रिफंड का समायोजित हो जाना.
  • ITR, TDS या इनकम के विवरण में गड़बड़ी मिलने पर अतिरिक्त जांच की जरूरत पड़ना.

टैक्स नोटिस को नजरअंदाज न करें

अगर ITR में किसी तरह की विसंगति पाई जाती है, तो इनकम टैक्स विभाग टैक्सपेयर को नोटिस या सूचना भेज सकता है. ऐसे किसी भी नोटिस का समय पर जवाब देना जरूरी है. अगर नोटिस को नजरअंदाज किया जाता है या उसमें बताई गई जानकारी को सही तरीके से नहीं समझा जाता, तो रिफंड एडजस्ट हो सकता है और आगे की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है.

इसलिए टैक्सपेयर को नियमित रूप से ई-फाइलिंग पोर्टल और अपने रजिस्टर्ड ईमेल की जांच करते रहना चाहिए और किसी भी नोटिस पर समय रहते कार्रवाई करनी चाहिए.

फर्जी मैसेज और ईमेल से रहें सावधान

इनकम टैक्स विभाग की ओर से नोटिस मिलने पर घबराने की जरूरत नहीं है. साइबर ठग अक्सर टैक्स नोटिस के नाम पर फर्जी ईमेल और मैसेज भेजकर लोगों को ठगने की कोशिश करते हैं. इसलिए किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और केवल आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग इन करके ही अपनी जानकारी और नोटिस की पुष्टि करें.

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