जीरो TDS के लिए भरना होगा Form 128, प्रॉपर्टी से लेकर इन ट्रांजैक्शन के लिए जरूरी! अप्रैल से बदलेंगे नियम

इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत NIL या लोअर TDS के लिए नया Form 128 लागू किया गया है जो पुराने Form 13 की जगह लेगा. इस फॉर्म से प्रॉपर्टी समेत अन्य ट्रांजैक्शन पर कम या शून्य TDS सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई किया जा सकेगा. नए फॉर्म में दस्तावेज कम मांगे जाएंगे और प्रोसेस को आसान बनाने की कोशिश की गई है.

इनकम टैक्स एक्ट 2025 Image Credit: Canva/ Money9

इनकम टैक्स एक्ट 2025 के लागू होने के साथ ही अब प्रॉपर्टी और अन्य ट्रांजैक्शन पर NIL या लोअर TDS के लिए नया Form 128 लागू किया गया है. यह फॉर्म पुराने Form 13 की जगह लेगा. नियमों का मकसद वही है- टैक्सपेयर को कम या शून्य TDS सर्टिफिकेट दिलाना लेकिन प्रोसेस को थोड़ा आसान और स्ट्रीमलाइन किया गया है. अगर कोई व्यक्ति प्रॉपर्टी बेच रहा है और उसे लगता है कि उस पर कम या NIL TDS बनता है तो वह एक तय अवधि के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से सर्टिफिकेट लेने के लिए इस नए फॉर्म के जरिए अप्लाई कर सकता है. उदाहरण के तौर पर अगर प्रॉपर्टी अप्रैल से अक्टूबर के बीच बिकनी है तो उसी अवधि के लिए लोअर या NIL TDS सर्टिफिकेट लिया जा सकता है. नए इनकम टैक्स नियम 2026 के ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने के बाद, नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा.

क्या बदला नए Form 128 में

नए Form 128 का मकसद और कंटेंट काफी हद तक पुराने Form 13 जैसा ही है लेकिन कुछ जरूरी बदलाव किए गए हैं. पहले Form 13 में पिछले चार साल के ITR की कॉपी अपलोड करनी पड़ती थी जबकि अब Form 128 में सिर्फ ITR की जरूरी डिटेल्स जैसे अकनॉलेजमेंट नंबर, फाइलिंग डेट, टैक्सेबल इनकम और टैक्स लाइबिलिटी देना होगा. इसी तरह पहले पेयर्स का TAN, PAN या आधार नंबर देना पड़ता था लेकिन अब सिर्फ TAN या PAN देना ही पर्याप्त होगा.

क्या छोटे टैक्सपेयर को मिलेगा फायदा

बजट 2026 में NIL TDS सर्टिफिकेट के लिए ऑटोमैटेड सिस्टम लाने की बात कही गई है. हालांकि फिलहाल Form 128 में छोटे टैक्सपेयर के लिए अलग से कोई ऑटोमैटिक प्रोसेस नहीं है. फॉर्म में चार कैटेगरी दी गई हैं- NPO, स्पेसिफाइड एंटिटी, बिजनेस/प्रोफेशन वाले व्यक्ति और अन्य. माना जा रहा है कि “अन्य” कैटेगरी में आने वाले छोटे टैक्सपेयर को भविष्य में ऑटोमैटेड सर्टिफिकेट मिल सकता है. Form 128 कानूनी तौर पर नया एप्लिकेशन फॉर्म है लेकिन बजट में जो ऑटोमैटिक सर्टिफिकेट सिस्टम की बात हुई थी वह अलग टेक्नोलॉजी बेस्ड प्रोसेस के जरिए लागू होगा. इससे कई लोगों को मैन्युअल अप्रूवल की जरूरत नहीं पड़ेगी.

अभी कैसे मिलेगा लोअर या NIL TDS सर्टिफिकेट

फिलहाल प्रोसेस मैन्युअल ही है. टैक्सपेयर e-filing पोर्टल पर फॉर्म भरता है. इसके बाद Assessing Officer इनकम और रिकॉर्ड जांचता है फिर मंजूरी मिलने पर सर्टिफिकेट जारी होता है. इसे पेयर्स को दिया जाता है फिर तय रेट पर TDS कटता है. प्रॉपर्टी बेचने वाले लोग पुराने नियमों के तहत सेक्शन 197 के तहत Form 13 भरकर लोअर या NIL TDS सर्टिफिकेट लेते थे. अब नए कानून में यही काम Form 128 से होगा.

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