LPG सिलेंडर पर होता है QR कोड, निकल जाती है पूरी कुंडली, किल्लत में आपकी मजबूरी का कोई नहीं उठा पाएगा फायदा
घरों में इस्तेमाल होने वाले LPG सिलेंडरों पर अब QR कोड लगाए जा रहे हैं. इस कोड को स्कैन करते ही सिलेंडर की पूरी जानकारी सामने आ जाती है, जैसे कब भरा गया, किस प्लांट से आया और किस डिस्ट्रीब्यूटर तक पहुंचा. तेल कंपनियों ने यह कदम सिलेंडर की ट्रैकिंग आसान बनाने, चोरी और कम वजन की शिकायतों को रोकने और डिस्ट्रीब्यूशन को पारदर्शी बनाने के लिए उठाया है.
QR Code on LPG Cylinder: अब घरों में इस्तेमाल होने वाले LPG सिलेंडर भी डिजिटल पहचान के साथ आ रहे हैं. कई गैस सिलेंडरों पर अब QR कोड लगाया जा रहा है, जिसे स्कैन करने पर उस सिलेंडर की पूरी “कुंडली” यानी उसकी जानकारी सामने आ जाती है. इससे यह पता चल जाता है कि सिलेंडर कब भरा गया, किस प्लांट से आया और उसकी ट्रैकिंग कैसे हुई. तेल कंपनियों ने इस पहल को गैस सिलेंडर की चोरी, कम वजन और वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए शुरू किया है.
क्या है LPG सिलेंडर का QR कोड?
QR कोड एक तरह का डिजिटल कोड होता है, जिसे मोबाइल फोन से स्कैन किया जा सकता है. LPG सिलेंडर पर लगाए गए इस कोड में सिलेंडर की पूरी जानकारी दर्ज रहती है. इसे स्कैन करने पर सिलेंडर का यूनिक आईडी नंबर, भरने की तारीख, बॉटलिंग प्लांट की जानकारी और वितरण से जुड़ी जानकारी सामने आ जाती है. QR कोड सिलेंडर की डिजिटल पहचान है, जिससे उसकी पूरी हिस्ट्री पता चल जाती है.
पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू हुई पहल
QR कोड वाले सिलेंडरों की शुरुआत एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 2022 में की गई थी. इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने दिल्ली के मदनपुर खादर बॉटलिंग प्लांट में QR कोड टैगिंग का परीक्षण किया. पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) ने 1 सितंबर 2022 से 3 महीने के लिए ऐसे सिलेंडर भरने और दिल्ली के दो डिस्ट्रीब्यूटर्स तक भेजने की अनुमति दी थी. बाद में इस अनुमति को बढ़ाकर 28 फरवरी 2023 तक कर दिया गया. 27 नवंबर 2022 तक IOCL ने कुल 23,827 QR टैग वाले 14.2 किलो LPG सिलेंडर इन डिस्ट्रीब्यूटर्स को भेजे थे. हालांकि अभी देश में सारे सिलेंडर पर यह कोड नहीं लगा है. सभी कंपनियां धीरे-धीरे इसे सभी सिलेंडर करने की तैयारी में हैं.
कैसे मिलती है सिलेंडर की पूरी जानकारी?
QR कोड स्कैन करते ही सिस्टम में मौजूद डेटा खुल जाता है. इससे यह पता चलता है कि सिलेंडर किस प्लांट में भरा गया, कब भरा गया और किस डिस्ट्रीब्यूटर के पास पहुंचा. इससे कंपनियों को सिलेंडर की ट्रैकिंग और ट्रेसिंग आसान हो जाती है. अगर कहीं सिलेंडर गायब हो जाए या गलत तरीके से इस्तेमाल हो, तो उसकी लोकेशन और इतिहास आसानी से पता लगाया जा सकता है.
चोरी-कम वजन की समस्या पर लगेगी लगाम
तेल कंपनियों के लिए गैस सिलेंडर की चोरी, गैस की चोरी (पिल्फरेज) और कम वजन वाले सिलेंडर की शिकायतें एक बड़ी समस्या रही हैं. QR कोड सिस्टम लागू होने से हर सिलेंडर की निगरानी संभव होगी. इससे यह पता लगाना आसान होगा कि सिलेंडर कहां गया और उसके साथ क्या हुआ. इस तकनीक से कंपनियों को बेहतर इन्वेंट्री मैनेजमेंट और सप्लाई चेन पर भी नियंत्रण मिलेगा.
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