सुकन्या समृद्धि योजना सहित इन स्मॉल सेविंग स्कीम्स की नहीं बदली ब्याज दर, पहली तिमाही के लिए जानें क्या है रेट
सरकार ने छोटे निवेशकों को राहत देते हुए अप्रैल-जून 2026 तिमाही के लिए स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. PPF, NSC, सुकन्या समेत सभी योजनाओं पर लगातार आठवीं तिमाही तक दरें स्थिर रखी गई हैं, जिससे निवेशकों को सुरक्षित और तय रिटर्न मिलता रहेगा.
Small Savings Schemes Rate Unchanged: सरकार ने छोटे निवेशकों को बड़ी राहत देते हुए एक बार फिर स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. वित्त मंत्रालय के ताजा नोटिफिकेशन के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (1 अप्रैल से 30 जून 2026) के लिए सभी प्रमुख योजनाओं पर वही दरें लागू रहेंगी, जो पिछले तिमाही (जनवरी-मार्च 2026) में थीं. खास बात यह है कि यह लगातार आठवीं तिमाही है जब सरकार ने इन योजनाओं की ब्याज दरों को स्थिर बनाए रखा है.
कौन-सी स्कीम्स हैं शामिल?
इन योजनाओं में पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC), सुकन्या समृद्धि योजना, सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम, किसान विकास पत्र (KVP) और पोस्ट ऑफिस डिपॉजिट जैसी लोकप्रिय स्कीमें शामिल हैं. सरकार हर तीन महीने में इनकी ब्याज दरों की समीक्षा करती है, लेकिन इस बार भी दरों को जस का तस रखा गया है.
क्या हैं मौजूदा ब्याज दरें?
अगर मौजूदा ब्याज दरों की बात करें तो सुकन्या समृद्धि योजना पर 8.2 फीसदी का सबसे ज्यादा रिटर्न मिल रहा है. वहीं, PPF और पोस्ट ऑफिस के 3 साल के टाइम डिपॉजिट पर 7.1 फीसदी ब्याज जारी रहेगा. नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) पर 7.7 फीसदी का रिटर्न मिलेगा. मंथली इनकम स्कीम (MIS) में निवेश करने वालों को 7.4 फीसदी ब्याज मिलता रहेगा, जबकि किसान विकास पत्र (KVP) पर 7.5 फीसदी ब्याज के साथ निवेश 115 महीनों में मैच्योर होगा. पोस्ट ऑफिस सेविंग अकाउंट पर ब्याज दर 4 फीसदी बनी हुई है.
छोटे निवेशकों का होगा फायदा
सरकार के इस फैसले से उन निवेशकों को राहत मिली है, जो सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न वाली योजनाओं में पैसा लगाते हैं. शेयर बाजार और अन्य जोखिम भरे निवेश विकल्पों में उतार-चढ़ाव के बीच स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स स्थिर रिटर्न का भरोसा देती हैं, इसलिए इनकी लोकप्रियता बनी रहती है. विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज दरों को स्थिर रखने के पीछे महंगाई, सरकारी बॉन्ड यील्ड और आर्थिक संतुलन जैसे कई कारक हैं. अगर सरकार इन दरों में ज्यादा बदलाव करती है तो इसका असर बैंकिंग सिस्टम और निवेश पैटर्न पर पड़ सकता है. ऐसे में फिलहाल स्थिरता बनाए रखना ही बेहतर रणनीति मानी जा रही है.
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