जल्दी ITR भरने की गलती न करें! जानें क्यों 15 जून से पहले रिटर्न फाइल करना बढ़ा सकता है देनदारी
अगर आप जल्दबाजी में 15 जून से पहले ITR फाइल करने की सोच रहे हैं, तो सावधान हो जाइए. टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, Form 16, AIS और Form 26AS पूरी तरह अपडेट होने से पहले रिटर्न दाखिल करने पर डेटा मिसमैच, टैक्स नोटिस और रिफंड में देरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. जानिए क्यों सही और एरर-फ्री ITR के लिए 15 जून तक इंतजार करना जरूरी माना जा रहा है.
इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने का सीजन शुरू होते ही बहुत से लोग आखिरी समय की हड़बड़ी और लेट फीस से बचने के लिए जल्दी से जल्दी अपना रिटर्न दाखिल करने की कोशिश में जुट जाते हैं. अगर आप भी ऐसा सोच रहे हैं, तो ठहरिए. टैक्स एक्सपर्ट्स की मानें तो जल्दीबाजी में उठाया गया यह कदम आपको फायदे की जगह भारी नुकसान पहुंचा सकता है. टैक्स नियमों के अनुसार, करदाताओं को कम से कम 15 जून तक अपना आईटीआर दाखिल करने से बचना चाहिए. आइए जानते हैं कि आखिर क्यों 15 जून से पहले रिटर्न फाइल करना एक बड़ी गलती साबित हो सकता है.
क्यों जरूरी है 15 जून का इंतजार?
टैक्स डिपार्टमेंट की गाइडलाइंस के मुताबिक, किसी भी वित्तीय वर्ष के खत्म होने के बाद उससे जुड़े कई जरूरी दस्तावेज पूरी तरह अपडेट होने में जून के मध्य तक का समय लग जाता है. खासकर वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज ‘फॉर्म 16’ (Form 16) होता है, जिसे जारी करने की अंतिम तारीख ही 15 जून तय की गई है.
अब अगर आप फॉर्म 16 के बिना केवल अपनी सैलरी स्लिप के भरोसे रिटर्न दाखिल कर देते हैं, तो कई तरह के डिडक्शन और टैक्स छूट छूटने का डर रहता है, जिससे आपकी टैक्स देनदारी बढ़ सकती है.
इन 3 मुख्य दस्तावेजों का अपडेट होना है जरूरी
जब तक टैक्स विभाग के पास आपके पैन (PAN) पर दर्ज सारा डेटा अपडेट नहीं होता, तब तक आईटीआर फाइल करना सुरक्षित नहीं माना जाता. 15 जून तक निम्नलिखित तीन दस्तावेज पूरी तरह अपडेट हो जाते हैं:
- फॉर्म 26AS (Form 26AS): कंपनियों और बैंकों द्वारा टीडीएस (TDS) रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 मई होती है. उनके रिटर्न भरने के बाद ही आपका कटा हुआ टैक्स फॉर्म 26AS में सही-सही दिखने लगता है.
- एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS): बैंक, म्यूचुअल फंड हाउस और शेयर ब्रोकर आपके द्वारा किए गए बड़े वित्तीय लेनदेन की जानकारी धीरे-धीरे टैक्स विभाग को भेजते हैं, जो जून के पहले-दूसरे हफ्ते तक एआईएस में अपडेट होती है.
- फॉर्म 16 (Form 16): इसमें आपकी कुल सैलरी, टैक्स डिडक्शन और कंपनी द्वारा काटे गए टीडीएस का पूरा मिलान होता है.
जल्दीबाजी की तो मिल सकता है इनकम टैक्स का नोटिस
यदि आप इन दस्तावेजों के पूरी तरह अपडेट होने से पहले ही अपना आईटीआर भर देते हैं, तो आपके द्वारा दी गई जानकारी और टैक्स विभाग के पास मौजूद डेटा में अंतर आ सकता है. ऐसी स्थिति में:
- टैक्स डिपार्टमेंट आपको डेटा मिसमैच का नोटिस भेज सकता है.
- आपको दोबारा रिवाइज्ड आईटीआर (Revised ITR) फाइल करना पड़ सकता है, जिससे कागजी कार्रवाई और परेशानी दोनों बढ़ जाएगी.
- आपके रिफंड में भी लंबी देरी हो सकती है.
यह भी पढ़ें: टैक्सपेयर्स अलर्ट! ITR भरने की नई तारीखें जारी, शेयर बाजार, विदेशी कमाई और FD वालों के लिए नए नियम जरूरी
केवल नौकरीपेशा ही नहीं, ये लोग भी रखें ध्यान
यह नियम सिर्फ नौकरीपेशा लोगों पर ही लागू नहीं होता. अगर आप फ्रीलांसर, कंसलटेंट, निवेशक, डॉक्टर-वकील जैसे प्रोफेशनल या छोटे बिजनेसमैन हैं, तो आपको भी 15 जून तक का इंतजार जरूर करना चाहिए. आपके क्लाइंट्स या बैंकों ने जो टीडीएस काटा है, वह 31 मई के बाद ही आपके टैक्स क्रेडिट में दर्ज होता है. इसलिए, सही और एरर-फ्री रिटर्न भरने के लिए 15 जून के बाद ही फाइलिंग की शुरुआत करें.
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