डिफॉल्ट करने पर भी कोई बैंक नहीं जब्त कर करेगा आपका ये पैसा, कोर्ट भी नहीं कर पाएगा कुर्क; ये कानून देता है खास सुरक्षा
आज के समय में कर्ज लेना काफी आसान हो गया है. बैंक और दूसरी वित्तीय संस्थान हमारी जमा पूंजी को गारंटी मानकर कुछ ही घंटों में लोन दे देते हैं. लेकिन कई बार यही कर्ज हमारे और हमारे परिवार के लिए बड़ा बोझ बन जाता है. जब हम इसे चुकाने में असमर्थ होते हैं, तो हमारी बचत खतरे में पड़ जाती है. हालांकि, कुछ ऐसी योजनाएं भी हैं जो ऐसी स्थिति में हमारी जमा पूंजी को कानूनी सुरक्षा प्रदान करती हैं.

Are Savings Safe From Loan Default India: आज के समय में कर्ज लेना बहुत आसान हो गया है, लेकिन कई बार लोग आर्थिक दबाव में आकर कर्ज के जाल में फंस जाते हैं. ऐसे में सबसे बड़ा डर यह होता है कि कहीं उनकी पूरी बचत खत्म न हो जाए. हालांकि भारतीय कानून कुछ खास बचत और निवेश योजनाओं को पूरी तरह सुरक्षित रखता है, ताकि मुश्किल समय में भी परिवार की आर्थिक सुरक्षा बनी रहे.
कौन-कौन सी बचत रहती हैं सुरक्षित?
Employees’ Provident Fund (EPF) and Gratuity
कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 की धारा 10(1) के तहत, ईपीएफ खाते में जमा राशि को न्यायालय द्वारा कुर्क नहीं किया जा सकता है, न ही इसे आवंटित किया जा सकता है. इसी तरह नौकरी छोड़ने या रिटायरमेंट पर मिलने वाली ग्रेच्युटी राशि भी सुरक्षित रहती है और उस पर किसी कर्जदाता का अधिकार नहीं होता. ग्रेच्युटी पेमेंट अधिनियम और सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 60 के तहत, ग्रेच्युटी को कुर्की से कानूनी रूप से सुरक्षा प्राप्त है.
PPF (पब्लिक प्रोविडेंट फंड)
Public Provident Fund (PPF) एक पॉपुलर निवेश विकल्प है, जो लगभग 7.1 फीसदी तक पोस्ट-टैक्स रिटर्न दे सकता है और सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट भी देता है.
PPF Act, 1968 के अनुसार इस फंड को कोर्ट कर्ज चुकाने के लिए जब्त नहीं कर सकती. हालांकि, आयकर विभाग डिफॉल्ट या धोखाधड़ी के मामलों में इसे अटैच कर सकता है.
NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम)
National Pension System (NPS) के Tier I खाते में जमा पैसा भी सुरक्षित रहता है. PFRDA Act, 2015 के तहत इस राशि को कोर्ट द्वारा कर्ज वसूली के लिए जब्त नहीं किया जा सकता.
MWP Act के तहत लाइफ इंश्योरेंस
Married Women’s Property Act के सेक्शन 6 के तहत खरीदी गई लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी भी सुरक्षित रहती है. यदि पॉलिसी इस एक्ट के तहत ली गई है, तो उसका पेमेंट सीधे पत्नी और बच्चों को मिलता है और कर्जदाता उस पर दावा नहीं कर सकते.
कानून क्या कहता है?
ये सभी स्कीमें लंबी अवधि की पारिवारिक सुरक्षा के लिए बनाई गई हैं, इसलिए इन्हें कर्जदाताओं से बचाया जाता है.
इसे भी पढ़ें- मणप्पुरम फाइनेंस के MD को SEBI ने भेजा वार्निंग लेटर, शेयर प्लेज खुलासे में देरी पड़ी भारी
उदाहरण के तौर पर, अगर किसी ने होम लोन लिया है और वह डिफॉल्ट करता है, तो बैंक घर बेचकर पैसा वसूल सकता है, लेकिन EPF या PPF जैसी सुरक्षित बचत से बाकी रकम नहीं ले सकता. साथ ही, EPF और PPF जैसी योजनाओं में 1.5 लाख तक की राशि पर कानूनी सुरक्षा की सीमा भी लागू होती है.