कहीं 4 तो कहीं 40 दिन, जानें पासपोर्ट बनवाने में राज्यों के बीच क्यों है इतना फर्क; विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट में खुलासा

2025 में पासपोर्ट मिलने का समय राज्य और शहर के हिसाब से काफी अलग रहा. गोवा और केरल में चार–पांच दिन में पासपोर्ट मिला, जबकि रायपुर में 40 दिन लगे. तत्काल सेवा तेज रही, लेकिन पुलिस वेरिफिकेशन बड़ी रुकावट बना. ऐसे में देशभर के लाखों आवेदन इसी स्टेज में अटके रहे हैं.

पासपोर्ट Image Credit: Money9live

भारत में पासपोर्ट बनवाना अब पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस राज्य और किस शहर में रहते हैं. कहीं पासपोर्ट चंद दिनों में हाथ में आ जाता है, तो कहीं इसके लिए हफ्तों इंतजार करना पड़ता है. विदेश मंत्रालय के ताजा आंकड़े बताते हैं कि 2025 में पासपोर्ट जारी होने की रफ्तार पूरे देश में एक जैसी नहीं रही.

विदेश मंत्रालय के डेटा के मुताबिक, 2025 में नॉर्मल कैटेगरी के तहत पासपोर्ट जारी होने का औसत समय गोवा और केरल के कुछ हिस्सों में सिर्फ चार से पांच वर्किंग डे रहा. वहीं छत्तीसगढ़ के रायपुर क्षेत्र में यही प्रक्रिया 40 वर्किंग डे तक खिंच गई.

शहरों में भी बड़ा अंतर

एक ही राज्य के भीतर भी बड़ा अंतर देखने को मिला. कर्नाटक के बेंगलुरु आरपीओ (Regional Passport Office) ने 2023 में औसतन सात दिन में पासपोर्ट जारी किए थे, लेकिन 2025 में यह समय बढ़कर 15 दिन हो गया. यह सुस्ती से ज्यादा बढ़ती मांग का संकेत माना जा रहा है.

दक्षिण भारत में केरल सबसे तेज राज्यों में बना रहा. कोच्चि और कोझिकोड आरपीओ ने औसतन पांच वर्किंग डे में पासपोर्ट जारी किए. तमिलनाडु का प्रदर्शन भी ठीक रहा. चेन्नई में औसत समय 11 दिन रहा, जबकि कोयंबटूर में यह 20 दिन से ज्यादा रहा, जो 2023 की तुलना में लगभग दोगुना है.

गोवा, महाराष्ट्र और केरल रहे टॉप

भारत में गोवा एक बार फिर सबसे आगे रहा, जहां औसत समय चार दिन रहा. वहीं महाराष्ट्र के बड़े शहरों में दबाव साफ दिखा. मुंबई में पासपोर्ट औसतन 10 दिन में जारी हुए, नागपुर में 22 दिन लगे और पुणे में 12 दिन से ज्यादा का समय लगा.
पूर्वी और मध्य भारत में स्थिति अपेक्षाकृत धीमी रही. ओडिशा के भुवनेश्वर आरपीओ में 2025 में औसत समय 32 दिन रहा, हालांकि यह 2024 के 40 दिनों से बेहतर है. छत्तीसगढ़ का रायपुर अब भी सबसे धीमा रहा, जहां नॉर्मल कैटेगरी में 40 दिन तक लगे.

तत्काल सेवा में ज्यादातर राज्यों में पासपोर्ट एक से 6 दिन का वर्किंग डे मिल गया, लेकिन यहां भी अंतर दिखा. रायपुर में 2025 में तत्काल पासपोर्ट के लिए 14 दिन तक लगे. वहीं गोवा, केरल और तमिलनाडु में एक से तीन दिन में पासपोर्ट जारी हो गए. कर्नाटक में तत्काल सेवा का औसत समय चार दिन रहा.

पुलिस वेरिफिकेशन की पेच

हालांकि पुलिस वेरिफिकेशन को पासपोर्ट जारी करने की समयसीमा में नहीं गिना जाता, लेकिन इसी स्टेज में सबसे ज्यादा देरी की शिकायतें सामने आईं. 1 दिसंबर 2025 तक देशभर में करीब 2.8 लाख आवेदन ऐसे थे, जिनकी पुलिस जांच 30 दिन से ज्यादा समय से लंबित थी.

इनमें महाराष्ट्र अकेले 1.2 लाख से ज्यादा लंबित मामलों के साथ सबसे आगे रहा. इसके बाद जम्मू-कश्मीर में 56,000 से ज्यादा, पश्चिम बंगाल में करीब 29,500 और मणिपुर में 15,000 से ज्यादा आवेदन लंबित थे. इसके उलट गुजरात, गोवा और हिमाचल प्रदेश में 50 से भी कम आवेदन पेंडिंग रहे, जबकि कर्नाटक में यह संख्या करीब 800 रही.

mPassport ऐप से मिलेगी पुलिस वेरिफिकेशन को रफ्तार

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, mPassport ऐप के लॉन्च से पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट अब सीधे और डिजिटल तरीके से पुलिस स्टेशन से ही भेजी जा रही है. इसके बावजूद शिकायतों में कमी नहीं आई. 2023 से 2025 के बीच पुलिस वेरिफिकेशन पूरा न होने या पीवीआर मिलने के बाद भी पासपोर्ट जारी न होने से जुड़ी शिकायतें 76,000 से ज्यादा रहीं.

मंत्रालय का कहना है कि जहां कुछ राज्यों में पासपोर्ट तेजी से जारी हो रहे हैं, वहां भी जांच में कोई ढील नहीं दी गई है. पिछले पांच साल में 1,343 शिकायतें ऐसे मामलों की मिलीं, जिनमें लोगों ने धोखाधड़ी से एक से ज्यादा पासपोर्ट बनवाए. इन सभी मामलों में पासपोर्ट अधिनियम 1967 के तहत पासपोर्ट जब्त या कैंसिल किए गए. इस खतरे से निपटने के लिए पासपोर्ट सेवा परियोजना 2.0 में मजबूत डुप्लीकेट डिटेक्शन सिस्टम जोड़ा गया है.

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