EPF पर संसद में छिड़ी बहस! क्या मिलेगा 10 फीसदी का ब्याज? जानें असली गणित

EPF के ब्याज दर को 10 फीसदी तक बढ़ाने की चर्चा हाल ही में तेज हुई हो गई है. सांसद विजयकुमार उर्फ विजय वसंत ने सरकार से पूछा कि क्या EPF ब्याज दर को 10 फीसदी करने पर विचार हो रहा है. इस पर श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने संसद में लिखित जवाब देते हुए स्थिति साफ कर दी.

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एम्पलाई प्रोविडेंट फंड (EPF) के ब्याज दर को 10 फीसदी तक बढ़ाने की चर्चा हाल ही में तेज हुई, जब लोकसभा में इस मुद्दे पर सवाल उठाया गया. सांसद विजयकुमार उर्फ विजय वसंत ने सरकार से पूछा कि क्या EPF ब्याज दर को 10 फीसदी करने पर विचार हो रहा है. इस पर श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने संसद में लिखित जवाब देते हुए स्थिति साफ कर दी. सरकार ने स्पष्ट किया कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है.

यूनियनों ने भी नहीं की 10 फीसदी ब्याज की मांग

सवाल यह भी था कि क्या मजदूर यूनियनों ने औपचारिक रूप से EPF ब्याज दर को 10 फीसदी तक बढ़ाने की मांग की है.
सरकार का जवाब साफ था कि EPFO को ऐसी कोई मांग प्राप्त नहीं हुई है. इसका मतलब यह है कि अभी तक इस तरह की बड़ी बढ़ोतरी के लिए न तो सरकार के स्तर पर पहल है और न ही यूनियनों की तरफ से दबाव.

कैसे तय होता है EPF का ब्याज?

financialexpress की रिपोर्ट के मुताबिक, यह भी समझाया कि EPF ब्याज दर कोई मनमाने तरीके से तय नहीं होती है. EPFO द्वारा घोषित ब्याज दर पूरी तरह उस आय पर आधारित होती है, जो PF के फंड को निवेश से प्राप्त होती है. यानी जितना रिटर्न EPFO अपने निवेश से कमाता है, उसी के आधार पर ब्याज तय किया जाता है.

10% ब्याज देना क्यों मुश्किल?

सरकार ने EPF स्कीम 1952 के एक अहम नियम का भी जिक्र किया. इसके मुताबिक, केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करना होता है कि ब्याज खाते से ज्यादा निकासी (overdrawal) न हो. आसान शब्दों में समझें तो EPFO उतना ही ब्याज दे सकता है, जितना वह कमाता है. अगर पर्याप्त रिटर्न नहीं मिलता और फिर भी 10 फीसदी ब्याज दिया जाता है, तो इससे फंड की वित्तीय स्थिति पर दबाव पड़ सकता है. यही वजह है कि इतनी बड़ी बढ़ोतरी फिलहाल व्यावहारिक नहीं मानी जा रही.

क्या EPF की तुलना FD या महंगाई से होती है?

एक और अहम सवाल था कि क्या EPF रिटर्न की तुलना महंगाई, बैंक FD या दूसरी छोटी बचत योजनाओं से की जाती है.
सरकार ने स्पष्ट कहा कि EPF ब्याज दर को किसी दूसरी निवेश विकल्प से सीधे तौर पर तुलना नहीं की जाती. क्योंकि यह पूरी तरह self-funded सिस्टम है, जो अपने निवेश से कमाई पर निर्भर करता है.

EPF का ब्याज तय कौन करता है?

EPF की ब्याज दर तय करने की प्रक्रिया भी सरकार ने स्पष्ट की. यह दर Central Board of Trustees (CBT) द्वारा सुझाई जाती है, जिसमें सरकार, नियोक्ता (Employers) और कर्मचारी तीनों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं. यानी यह फैसला सामूहिक रूप से लिया जाता है, न कि किसी एक पक्ष द्वारा.

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