प्रॉपर्टी का नहीं सुना होगा ऐसा फ्रॉड, एक ही फ्लैट 25 लोगों को बेचा, ₹500 करोड़ की चपत, हमेशा चेक करें ये 7 दस्तावेज

गुरुग्राम में सामने आए 500 करोड़ रुपये के बड़े रियल एस्टेट घोटाले ने प्रॉपर्टी खरीदने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक ही कमर्शियल यूनिट को 25 से अधिक लोगों को बेचने के इस मामले ने खरीदारों को भारी नुकसान पहुंचाया है. ऐसे में प्रॉपर्टी खरीदने से पहले जरूरी दस्तावेजों की जांच करना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है.

Property fraud Image Credit: Canva/ Money9

Gurugram ₹500 Crore Property fraud: गुरुग्राम में सामने आए एक बड़े रियल एस्टेट घोटाले ने प्रॉपर्टी खरीदने से पहले सतर्क रहने की जरूरत को एक बार फिर उजागर कर दिया है. मामला तब सामने आया जब कई खरीदारों को यह पता चला कि जिस कमर्शियल यूनिट को उन्होंने खरीदा था, उसे पहले ही दर्जनों लोगों को बेचा जा चुका है.

जानकारी के अनुसार, एक ही संपत्ति को 25 से अधिक लोगों को बेच दिया गया, जिससे खरीदारों के सामने गंभीर आर्थिक और कानूनी संकट खड़ा हो गया. इस पूरे मामले में करीब 500 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसने रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

इस तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए प्रॉपर्टी खरीदने से पहले सभी जरूरी दस्तावेजों की सावधानीपूर्वक जांच बेहद आवश्यक है. इस रिपोर्ट में ऐसे 7 महत्वपूर्ण दस्तावेजों के बारे में बताया गया है, जिन्हें किसी भी संपत्ति की खरीद से पहले अवश्य जांचना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी से बचा जा सके.

क्या है गुरुग्राम का 500 करोड़ का प्रॉपर्टी घोटाला?

Financial Express का एक रिपोर्ट के अनुसार, 32nd Avenue प्रोजेक्ट से जुड़े एक कमर्शियल फ्लोर (करीब 3000 वर्ग फुट) को 2021 से 2023 के बीच कई लोगों को बेचा गया. इस मामले में कंपनी के सीईओ को फरवरी 2026 में गिरफ्तार किया गया. अब तक 25 खरीदारों के प्रभावित होने की बात सामने आई है.

जांच में सामने आया कि:

  • एक ही प्रॉपर्टी को बार-बार बेचा गया.
  • नकली या भ्रामक एग्रीमेंट तैयार किए गए.
  • रजिस्ट्री प्रक्रिया को जानबूझकर टाला गया.
  • प्रॉपर्टी को खुद की ही कंपनी के जरिए किराए पर लेकर कंट्रोल बनाए रखा गया.

सिर्फ रजिस्ट्रेशन से मालिकाना हक तय नहीं होता

इस केस ने एक अहम सवाल उठाया है. अगर कई लोगों के पास रजिस्टर्ड दस्तावेज हैं, तो ऐसे में संपत्ति का असली मालिक कौन होगा?

FE की रिपोर्ट के अनुसार, जिस व्यक्ति का सौदा सबसे पहले हुआ (execution date), उसे प्राथमिकता मिलती है. केवल रजिस्ट्रेशन होना पर्याप्त नहीं है. यानी, समय और सही प्रक्रिया सबसे महत्वपूर्ण है.

कागज नहीं, साफ टाइटल जरूरी

इस घटना से यह स्पष्ट हो गया कि सिर्फ दस्तावेजों का ढेर होना पर्याप्त नहीं है. सबसे जरूरी है कि प्रॉपर्टी का टाइटल यानी पूरी तरह साफ और वेरिफाई हो.

प्रॉपर्टी खरीदने से पहले जरूर जांचें ये 7 दस्तावेज

मदर डीड (Mother Deed)

यह मूल दस्तावेज होता है, जिससे पता चलता है कि प्रॉपर्टी शुरुआत से किन-किन लोगों ने खरीदें हैं. यानी प्रॉपर्टी के मालिक कब-कब बदले हैं.

सभी सेल डीड की चेन

  • नाम सही हैं या नहीं.
  • प्रॉपर्टी का डिटेल्स मैच करता है या नहीं.
  • हर ट्रांजैक्शन रजिस्टर्ड है या नहीं.

भार प्रमाण पत्र (Encumbrance Certificate)

इससे पता चलता है कि

  • संपत्ति पर कोई लोन है या वह गिरवी तो नहीं है.
  • कोई कानूनी विवाद तो नहीं है.

म्यूटेशन रिकॉर्ड

सरकारी रिकॉर्ड में मालिक का नाम अपडेट है या नहीं. यह एक महत्वपूर्ण संकेत है कि प्रॉपर्टी खरीदते समय उसका असली मालिक कौन है और आप प्रॉपर्टी किससे खरीद रहे हैं.

प्रॉपर्टी टैक्स रिकॉर्ड

इस डॉक्यूमेंट से पता चलता है कि –

  • टैक्स कौन भर रहा है.
  • पहले से कोई बकाया तो नहीं है.

अप्रूव्ड बिल्डिंग प्लान और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट

निर्माण कानूनी है या नहीं.
उपयोग की अनुमति है नहीं.

RERA रजिस्ट्रेशन (अगर लागू हो)

प्रोजेक्ट की जानकारी RERA पोर्टल पर जांचें. यह भी पता करें कि प्रमोटर और लेआउट में कोई गड़बड़ी तो नहीं है. इससे आप ये जान पाएंगे कि प्रॉपर्टी में कोई कानूनी पेंच तो नहीं है.

उठाएं ये चार कदम

  • वकील से टाइटल वेरिफिकेशन करवाएं.
  • सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में रिकॉर्ड जांचें.
  • पब्लिक नोटिस जारी करें. अगर पहले से कोई आपत्ति होगा तो वो सामने आ जाएगा.
  • कंपनी से जुड़ी जानकारी MCA (कॉर्पोरेट रजिस्ट्रार) से जांचें.

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