पेट्रोल से 20 रुपये सस्ता E85 ईंधन हुआ लॉन्च, जानें क्या है यह और किन वाहनों में होगा इस्तेमाल

केंद्र सरकार ने विश्व पर्यावरण दिवस 2026 पर E85 फ्यूल लॉन्च किया है. यह ईंधन 80-85% एथेनॉल और 14-19% पेट्रोल से बना है तथा केवल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में इस्तेमाल किया जा सकता है. सरकार के अनुसार E85 पेट्रोल से करीब 20 रुपये प्रति लीटर सस्ता होगा. फिलहाल इसकी शुरुआत 48 पेट्रोल पंपों से हुई है, जिसे आगे देशभर में विस्तार दिया जाएगा.

E85 fuel: विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के मौके पर केंद्र सरकार ने देश में E85 फ्यूल लॉन्च कर दिया है. केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने नई दिल्ली में इसकी शुरुआत की. सरकार का दावा है कि यह ईंधन पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में करीब 20 रुपये प्रति लीटर सस्ता होगा. अगर 5 जून को दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹102.12 प्रति लीटर है तो ऐसे में E85 फ्यूल ईंधन 20 रुपये सस्ता होकर 82.12 रुपये का मिलेगा. साथ ही इससे प्रदूषण कम करने, विदेशी मुद्रा बचाने और किसानों की इनकम बढ़ाने में भी मदद मिलेगी.

E85 फ्यूल क्या है?

E85 एक हाई-एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल है, जिसमें 80 से 85 प्रतिशत एथेनॉल और 14 से 19 प्रतिशत पेट्रोल होता है. इसे खासतौर पर फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (FFVs) के लिए तैयार किया गया है. ये वाहन E20 से लेकर E100 तक के एथेनॉल मिश्रण पर चल सकते हैं.

48 पेट्रोल पंपों से हुई शुरुआत

फिलहाल E85 फ्यूल देशभर में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के 48 रिटेल आउटलेट्स पर उपलब्ध कराया गया है. सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक इसे 500 पेट्रोल पंपों और दिसंबर 2027 तक करीब 5000 पेट्रोल पंपों तक पहुंचाने का है.

पेट्रोल से 20 रुपये सस्ता होगा ईंधन

सरकार के मुताबिक E85 की कीमत पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में करीब 20 रुपये प्रति लीटर कम रखी गई है. इसका मकसद घरेलू स्तर पर उत्पादित एथेनॉल का फायदा सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाना है.

किसानों और देश की अर्थव्यवस्था को होगा लाभ

इसे लेकर हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि 2014 में एथेनॉल ब्लेंडिंग का स्तर 1.53 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 20 प्रतिशत हो चुका है. इसके चलते देश को 1.84 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचाने और करीब 302 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के आयात को रिप्लेस करने में मदद मिली है. उन्होंने किसानों को देश का ‘अन्नदाता’ ही नहीं बल्कि ‘ऊर्जादाता’ भी बताया.

प्रदूषण में आएगी बड़ी कमी

सरकार का दावा है कि E85 पर चलने वाले फ्लेक्स-फ्यूल वाहन पारंपरिक पेट्रोल वाहनों की तुलना में जीवनकाल के दौरान ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में करीब 61 प्रतिशत तक कमी ला सकते हैं. इसके अलावा एथेनॉल का रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) करीब 108 होने के कारण इंजन की कार्यक्षमता भी बेहतर हो सकती है.

2030-31 तक एथेनॉल ब्लेंडिंग 26% पहुंचाने का लक्ष्य

सरकार का अनुमान है कि यदि नए दोपहिया और चारपहिया वाहनों में से 50 प्रतिशत फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक अपनाते हैं तो 312 करोड़ लीटर से अधिक एथेनॉल की मांग पैदा हो सकती है. इससे करीब 12,403 करोड़ रुपये सीधे किसानों तक पहुंच सकते हैं. साथ ही हर साल 15,151 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचत और 66.4 लाख मीट्रिक टन CO2 उत्सर्जन में कमी संभव है. सरकार का लक्ष्य 2030-31 तक देश में कुल एथेनॉल ब्लेंडिंग स्तर को करीब 26 प्रतिशत तक पहुंचाना है.

E85 को लेकर सरकार ने दूर की गलतफहमियां

सरकार ने स्पष्ट किया है कि E85 फ्यूल केवल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए है और सामान्य पेट्रोल वाहनों में इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. वहीं E20 ईंधन को लेकर सरकार का कहना है कि इसके कारण अब तक इंजन खराब होने या वाहन बंद पड़ने का कोई मामला सामने नहीं आया है. साथ ही E20 के इस्तेमाल से वाहन बीमा पर भी कोई असर नहीं पड़ता.

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