हरियाणा सरकार की नई पॉलिसी, अब सेंट्रलाइज्ड अकाउंट में आएगा नगर निगम की जमीन का पैसा, फंड के दुरुपयोग पर लगेगी रोक
हरियाणा सरकार ने नगर भूमि और रेवेन्यू रोड की बिक्री से मिलने वाली राशि को सेंट्रलाइज करने का फैसला लिया है. अब सभी शहरी निकायों की इनकम एक ही डायरेक्टर लेवल के बैंक खाते में जमा होगी. हर शहर के लिए अलग लेजर रखा जाएगा और बाद में उसी शहर में इंफ्रास्ट्रक्चर और राजस्व बढ़ाने वाली परियोजनाओं पर खर्च किया जाएगा.
Centralised Fund Management: हरियाणा सरकार ने नगर निगम और शहरी निकायों द्वारा बेची जाने वाली म्युनिसिपल लैंड और रेवेन्यू रोड से मिलने वाली अमाउंट को लेकर बड़ा फैसला लिया है. अब इन जमीनों की बिक्री से मिलने वाला पैसा सीधे एक सेंट्रलाइज बैंक खाते में जमा होगा. यह खाता डायरेक्टर लेवल पर ऑपरेट किया जाएगा. पहले यह अमाउंट संबंधित नगर निगम के पास ही रहती थी. सरकार का कहना है कि इससे फंड के दुरुपयोग पर रोक लगेगी और शहरों में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए धन उपलब्ध होगा. नए सिस्टम का असर गुरुग्राम जैसे महंगे शहरी क्षेत्रों में अधिक दिखेगा.
क्या है नई सेंट्रलाइज व्यवस्था
नई व्यवस्था के तहत सभी शहरी स्थानीय निकायों की भूमि बिक्री से प्राप्त राशि एक ही बैंक खाते में जमा की जाएगी. इस खाते को डायरेक्टोरेट कंट्रोल करेगा. हालांकि हर नगर निगम के लिए अलग लेजर अकाउंट बनाया जाएगा. इसमें यह दर्ज होगा कि किस शहर से कितनी राशि आई. पर्याप्त राशि जमा होने के बाद उसी शहर में रिवेन्यू बढ़ाने वाली प्रोजेक्ट पर खर्च किया जाएगा.
पहले कैसे काम करती थी सिस्टम
पहले यदि कोई नगर निगम अपनी जमीन प्राइवेट डेवलपर या खरीदार को बेचता था तो पूरी राशि उसी निगम के खाते में रहती थी. वह अपने स्तर पर उस पैसे का यूज करता था. इस सिस्टम में ट्रांसपेरेंसी और निगरानी को लेकर सवाल उठते रहे. अब सरकार ने इसे बंद कर दिया है और पूरी प्रक्रिया को सेंट्रलाइज कर दिया है.
सरकार का उद्देश्य और नीति में बदलाव
यह फैसला स्टेट लैंड रेट पॉलिसी में संशोधन के बाद लिया गया है. बेसिक पॉलिसी 25 नवंबर 2021 को लिस्ट हुई थी. 27 जून 2025 को धारा 5 3 c में संशोधन किया गया. इस संशोधन के बाद भूमि बिक्री की इनकम को सेंट्रलाइज तरीके से संभालने की अनुमति दी गई. विभाग ने सभी अधिकारियों को आदेश का पालन करने और सभी लेनदेन का डिटेल रिकॉर्ड रखने को कहा है.
गुरुग्राम और अन्य शहरों पर असर
हाई वैल्यू वाले शहरों जैसे गुरुग्राम में इस नीति का सबसे ज्यादा वित्तीय प्रभाव होगा. यहां नगर भूमि की कीमत काफी अधिक है. चालू वित्त वर्ष में नगर निगम ने जमीन बिक्री से 5 करोड़ रुपये की इनकम का अनुमान लगाया है. पिछले वित्त वर्ष में 3.4 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी. इससे पहले कई सालों में करोड़ों की जमीन निजी बिल्डरों को बेची गई थी.
रेवेन्यू रोड और अतिक्रमण का मामला
नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार 2018 में 26 एकड़ से अधिक सरकारी रेवेन्यू रोड भूमि पर बिल्डरों ने अतिक्रमण किया था. इसके बाद ऐसे मामलों में बढ़ोतरी हुई है. 25 से अधिक बिल्डरों ने ऐसी सड़क भूमि खरीदने के लिए आवेदन किया है. रेवेन्यू रोड मूल रूप से गांवों में खेतों तक पहुंच के लिए बनाई गई थीं. बाद में लाइसेंस प्राप्त कॉलोनियों के विकास के बाद ये नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आ गईं.
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आगे क्या होगा
नई नीति के तहत जब किसी शहर की भूमि बिक्री से पर्याप्त राशि जमा हो जाएगी तो उसी शहर में कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, पार्किंग और आधुनिक बाजार जैसे प्रोजेक्ट विकसित किए जाएंगे. सरकार का मानना है कि इससे शहरों की इनकम बढ़ेगी और बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी. साथ ही फंड के दुरुपयोग पर भी कंट्रोल रहेगा.
