मिनटों में हाईवे बनेगा रनवे, असम में 4.2 किलोमीटर लंबी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी तैयार, जानें खासियत
इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी यानी ELF, नेशनल हाईवे पर विकसित एक वैकल्पिक रनवे होता है. इसे भारतीय वायुसेना (IAF) के समन्वय से खास पेवमेंट क्वालिटी कंक्रीट (PQC) तकनीक पर बनाया जाता है, ताकि आधुनिक विमानों के भारी वजन और अत्यधिक तापमान को सहन किया जा सके.
भारत के पूर्वोत्तर में स्ट्रैटेजिक इंफ्रास्ट्रक्चर को नई मजबूती मिली है. असम के डिब्रूगढ़ जिले में मोरन बाईपास पर तैयार की गई 4.2 किलोमीटर लंबी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) देश को समर्पित हो गया है. इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. ऐसे में आइए जानते हैं यह क्या है और क्यों है इतना खास.
क्या है ELF और क्यों है खास?
इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी यानी ELF, नेशनल हाईवे पर विकसित एक वैकल्पिक रनवे होता है. इसे भारतीय वायुसेना (IAF) के समन्वय से खास पेवमेंट क्वालिटी कंक्रीट (PQC) तकनीक पर बनाया जाता है, ताकि आधुनिक विमानों के भारी वजन और अत्यधिक तापमान को सहन किया जा सके. मोरान ELF को ड्यूल-यूज एसेट के रूप में विकसित किया गया है. यह फाइटर जेट्स (40 टन तक), ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (74 टन तक) और हेलीकॉप्टर्स को सपोर्ट करने में सक्षम है.
ऐतिहासिक लैंडिंग और एरियल डिस्प्ले
उद्घाटन के दौरान राफेल और सुखोई Su-30MKI फाइटर जेट्स का एरियल डिस्प्ले भी हुआ. यह प्रदर्शन इस बात का संकेत था कि जरूरत पड़ने पर हाईवे को मिनटों में सैन्य रनवे में बदला जा सकता है.
यह सुविधा चीन सीमा (LAC) से लगभग 300 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. रक्षा अधिकारियों के अनुसार, किसी भी संघर्ष की स्थिति में जब प्रमुख एयरबेस निशाने पर हों, तब ELF जैसी सुविधाएं ऑपरेशनल बैकअप का काम करती हैं. इससे भारतीय वायुसेना को लैंडिंग के कई विकल्प मिलते हैं और एयर डिफेंस ग्रिड ज्यादा लचीला और सुरक्षित बनता है.
HADR ऑपरेशन्स में भी अहम भूमिका
ELF का महत्व केवल सैन्य उपयोग तक सीमित नहीं है. आपदा या आपातकालीन स्थितियों में यह भारी ट्रांसपोर्ट विमानों के जरिए राहत सामग्री, मेडिकल सहायता और रेस्क्यू टीमों को तेजी से पहुंचाने में मददगार साबित हो सकता है. पूर्वोत्तर जैसे संवेदनशील और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में यह सुविधा बेहद उपयोगी मानी जा रही है.
राष्ट्रीय ELF नेटवर्क का हिस्सा
मोरान सुविधा भारत की व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा पहल का हिस्सा है. यह देशभर में प्रस्तावित 28 ELF साइट्स में चौथी सुविधा है. इनमें से करीब 15 अब तक ऑपरेशनल हो चुकी हैं. यह नेटवर्क राजस्थान के रेगिस्तानों से लेकर उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे और अब पूर्वोत्तर की रणनीतिक सीमाओं तक फैलेगा.
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Assam Sentinel की रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHIDCL) ने भारतीय वायुसेना के साथ मिलकर NH-127 पर इस 4.2 किमी स्ट्रेच को एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड (ALG) में बदला. यह परियोजना भारत की ड्यूल-यूज इंफ्रास्ट्रक्चर रणनीति का महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है.
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