क्या आप भी चाहते हैं कि आपकी कार की माइलेज बढ़े? गियर शिफ्ट करने का तरीका अभी बदल दें; जानें सही टेक्नीक
अगर आप अपनी कार से बेहतर माइलेज और लंबे समय तक मजबूत इंजन चाहते हैं, तो गियर शिफ्ट करने की सही टेकनीक जानना बेहद जरूरी है. ऑटो एक्सपर्ट्स के अनुसार सही आरपीएम पर गियर बदलने से इंजन पर दबाव कम रहता है और गियरबॉक्स की उम्र बढ़ती है. कम स्पीड पर ऊंचे गियर में कार चलाना और क्लच का गलत इस्तेमाल इंजन को नुकसान पहुंचा सकता है.
Car mileage tips: पिछले 15 सालों से गाडियों के इंजन और गियरबॉक्स पर काम करने वाले अनुभवी मैकेनिकों का मानना है कि सही ड्राइविंग आदतें गाडी की उम्र तय करती हैं. हजारों इंजनों को खुलते और जुड़ते देखने के बाद उनका साफ कहना है कि शोरूम और सर्विस सेंटर अक्सर उन जरूरी बातों पर ध्यान नहीं देते, जिनसे इंजन लंबे समय तक मजबूत बना रह सकता है. अगर ड्राइवर गियर बदलने का सही तरीका अपनाएं, तो न सिर्फ माइलेज बेहतर रहता है बल्कि गियरबॉक्स भी सालों तक बिना परेशानी के चलता है. यह सिर्फ तकनीकी ज्ञान नहीं, बल्कि जमीन पर उतरा हुआ अनुभव है.
आरपीएम का सही इस्तेमाल क्यों है जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार गाडी का असली माइलेज और इंजन की लंबी उम्र सही आरपीएम पर गियर बदलने से जुड़ी होती है. जब 1500 से 2000 आरपीएम के बीच गियर बदला जाता है, तो इंजन पर दबाव कम रहता है और ईंधन सही तरीके से जलता है. वहीं 2500 आरपीएम से ऊपर जाकर बार-बार गियर बदलने से इंजन पर अतिरिक्त लोड पड़ता है, तापमान बढ़ता है और माइलेज घटने लगता है. लंबे समय में यह आदत इंजन के अंदरूनी हिस्सों को कमजोर कर सकती है.
किस गियर में कितनी स्पीड सही मानी जाती है
पहला गियर केवल गाडी को चलने की स्थिति में लाने के लिए होता है. 0 से 10 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड के बाद तुरंत दूसरा गियर डाल देना चाहिए. पहले गियर में ज्यादा देर तक चलाने से इंजन पर अनावश्यक दबाव पड़ता है. दूसरा गियर 10 से 20 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार के लिए सही माना जाता है. इस दौरान आरपीएम लगभग 1500 के आसपास रखना बेहतर होता है. ज्यादा आरपीएम पर चलाने से गियरबॉक्स के अंदर मौजूद सिंक्रोनाइजर रिंग जल्दी घिस सकती हैं. तीसरा गियर 20 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड के लिए सबसे संतुलित माना जाता है. शहर की ड्राइविंग में यही गियर टॉर्क और माइलेज के बीच सही संतुलन बनाए रखता है.
चौथा गियर 40 से 55 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पर इस्तेमाल करना चाहिए. इस स्पीड पर लगातार एक जैसी चाल रखने से इंजन स्मूथ रहता है और कंपन कम होता है. पांचवां गियर इकोनॉमी गियर होता है. 60 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड पर इसे डालना सही माना जाता है. 60 से 70 की स्थिर रफ्तार पर पांचवें गियर में चलाने से माइलेज में काफी सुधार देखा जा सकता है.
इंजन और गियरबॉक्स की सुरक्षा को लेकर बड़ी चेतावनी
विशेषज्ञ साफ तौर पर चेतावनी देते हैं कि कम स्पीड पर ऊंचे गियर में गाडी चलाना इंजन के लिए खतरनाक हो सकता है. जैसे 30 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड पर पांचवां गियर डालना इंजन नॉकिंग की स्थिति पैदा करता है, जिससे पिस्टन और कनेक्टिंग रॉड पर बुरा असर पड़ता है. इसके अलावा क्लच को फुटरेस्ट की तरह इस्तेमाल करना भी भारी नुकसान पहुंचा सकता है. क्लच पर हल्का सा पैर टिके रहने से क्लच प्लेट धीरे-धीरे घिसती जाती है और जल्दी बदलने की नौबत आ जाती है.
सही ड्राइविंग से परफॉर्मेंस रहती है बरकरार
ऑटो एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ड्राइवर सही आरपीएम पर गियर बदलने की आदत डाल लें, तो गाडी ज्यादा माइलेज देती है और बीच रास्ते में खराब होने की आशंका भी कम हो जाती है. सही ड्राइविंग का मतलब है कम घर्षण, कम गर्मी और इंजन व गियरबॉक्स की लंबी उम्र. अब सवाल ड्राइवरों से है कि वे आमतौर पर किस आरपीएम पर गियर बदलते हैं. यही आदत तय करती है कि गाडी की लाइफ बढ़ रही है या धीरे-धीरे घट रही है.
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