India-US Trade Deal से सस्ता होगा कच्चा तेल, पीयूष गोयल ने कहा- IT सेक्टर को मिल सकता है बड़ा बूस्ट

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते में क्रूड ऑयल, LNG और LPG जैसी ऊर्जा जरूरतों को शामिल किया गया है, जिससे भारत को अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर आपूर्ति मिल सकेगी. दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार $500 अरब तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. स्टील, कोकिंग कोल और आईटी सेक्टर में भी इस समझौते से नए अवसर खुलने की उम्मीद है.

भारत-अमेरिका ट्रेड डील Image Credit: @x/piyush goyal

India US Trade Deal and Crude Oil: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार, 14 फरवरी को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते में भारत की ऊर्जा जरूरतों को खास जगह दी गई है. इस समझौते से भारत को कच्चा तेल यानी क्रूड ऑयल पहले से ज्यादा कंपटेटिव कीमतों पर मिल सकेगा. गोयल ने बताया कि दोनों देशों ने 2030 तक आपसी व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. सरकार इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए तेजी से काम कर रही है. इस प्रस्तावित 500 अरब डॉलर के व्यापार में कच्चा तेल, एलएनजी और एलपीजी जैसे भारत की ऊर्जा जरूरतें भी शामिल होंगी.

सस्ता मिलेगा तेल!

गोयल ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है और यहां ऊर्जा की मांग हर साल करीब 7 फीसदी की दर से बढ़ रही है. ऐसे में आयात बढ़ाने और सप्लायर्स की संख्या बढ़ाने से भारत को बेहतर दाम पर तेल मिल सकेगा और सप्लाई भी सुरक्षित रहेगी. पिछले हफ्ते भारत और अमेरिका ने एक अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा तैयार करने की घोषणा की थी. इसके तहत दोनों देश कई प्रोडक्ट्स पर आयात शुल्क घटाएंगे. अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी करेगा, जबकि भारत अमेरिकी औद्योगिक सामान और कई कृषि उत्पादों पर शुल्क कम या खत्म करेगा.

स्टील सेक्टर पर गोयल ने क्या कहा?

स्टील सेक्टर का जिक्र करते हुए गोयल ने कहा कि भारत फिलहाल हर साल करीब 140 मिलियन टन स्टील का प्रोडक्शन करता है और आने वाले वर्षों में इसे दोगुना करने की योजना है. इसके लिए बड़ी मात्रा में कोकिंग कोल की जरूरत होगी. अभी भारत लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये का कोकिंग कोल आयात करता है, जो आगे चलकर 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. उन्होंने बताया कि भारत फिलहाल कोकिंग कोल के लिए सिर्फ दो-तीन देशों पर निर्भर है. सप्लायर देशों की संख्या बढ़ाने से बेहतर दाम और स्थिर सप्लाई सुनिश्चित की जा सकेगी.

इन सेक्टरों पर अमेरिका पर है निर्भरता

गोयल ने यह भी कहा कि अमेरिका इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े प्रोडक्ट्स में मजबूत है. भारत इन क्षेत्रों में ज्यादा पहुंच चाहता है ताकि डेटा सेंटर जैसे सेक्टर में विस्तार किया जा सके. उन्होंने बताया कि भारत का आईटी निर्यात फिलहाल करीब 200 अरब डॉलर (लगभग 18 लाख करोड़ रुपये) है. अगर अमेरिका से अच्छी तकनीक और इक्विपमेंट तक बेहतर पहुंच मिलती है, तो यह आंकड़ा बढ़कर करीब 45 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. यानी कुल मिलाकर यह समझौता भारत के ऊर्जा, स्टील और आईटी जैसे प्रमुख क्षेत्रों के लिए नए अवसर खोल सकता है और दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों को नई मजबूती दे सकता है.

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