सुप्रीम कोर्ट ने RERA पर उठाए सवाल, कहा खरीदारों से ज्यादा बिल्डरों की मदद कर रही है संस्था, कामकाज के तरीके पर भी जताई नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने RERA की काम करने के तरीके पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह संस्था अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर पा रही है और केवल डिफॉल्ट करने वाले बिल्डरों को लाभ पहुंचा रही है. हिमाचल प्रदेश में RERA ऑफिस को शिमला से धर्मशाला ट्रांसफर करने के मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह टिप्पणी की.
Supreme Court on RERA: सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी यानी RERA की काम करने के तरीके पर सख्त टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि RERA अपने मकसद को पूरा करने में सफल नहीं दिख रही है. चीफ जस्टिस सूर्या कांत की अगुवाई वाली बेंच ने यहां तक कहा कि इसे समाप्त करने पर विचार किया जाना चाहिए. कोर्ट का कहना था कि यह संस्था डिफॉल्ट करने वाले बिल्डरों को ही ज्यादा फायदा पहुंचा रही है. यह टिप्पणी हिमाचल प्रदेश से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की गई.
क्या है पूरा मामला
मामला हिमाचल प्रदेश सरकार के उस फैसले से जुड़ा है जिसमें राज्य RERA कार्यालय को शिमला से धर्मशाला ट्रांसफर करने का फैसला लिया गया था. इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी. हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की अधिसूचना पर रोक लगा दी थी. कोर्ट ने कहा था कि नए कार्यालय के लिए वैकल्पिक जगह तक तय नहीं की गई.
हाई कोर्ट ने क्यों लगाई थी रोक
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि 13 जून 2025 की अधिसूचना अगली सुनवाई तक स्थगित रहेगी. कोर्ट ने यह भी कहा कि 18 आउटसोर्स कर्मचारियों को अन्य बोर्ड और निगमों में एडजस्ट करने का आदेश RERA के कामकाज को ठप कर सकता है. इसलिए इस पर रोक जरूरी है.
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने RERA की भूमिका पर सवाल उठाए. चीफ जस्टिस ने कहा कि सभी राज्यों को सोचना चाहिए कि RERA किसके लिए बनाई गई थी. उन्होंने टिप्पणी की कि यह संस्था केवल डिफॉल्ट करने वाले बिल्डरों को सुविधा दे रही है. कोर्ट ने कहा कि बेहतर होगा कि इस पर फिर से विचार किया जाए.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या दिया आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप किया. कोर्ट ने राज्य सरकार को RERA कार्यालय को शिमला से धर्मशाला ट्रांसफर करने की अनुमति दे दी. साथ ही अपीलीय प्राधिकरण को भी धर्मशाला ले जाने का निर्देश दिया गया. कोर्ट ने कहा कि इससे प्रभावित लोगों को असुविधा नहीं होनी चाहिए.
आगे क्या हो सकता है असर
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से RERA की कार्यप्रणाली पर देशभर में बहस तेज हो सकती है. कई राज्यों में पहले से ही RERA के कामकाज को लेकर शिकायतें उठती रही हैं. अब अदालत की इस टिप्पणी के बाद राज्यों पर सुधार या पुनर्गठन का दबाव बढ़ सकता है. रियल एस्टेट सेक्टर और घर खरीदार दोनों इस मामले पर नजर रखें हुए हैं.
