मोदी सरकार के 11 साल में कितना बदला सड़क नेटवर्क, रिकॉर्ड निर्माण के बाद अब क्यों आई गिरावट, क्या बजट देगा बूस्ट
देश की सड़कें बदलीं तो सही, लेकिन अब रफ्तार कुछ धीमी सी लग रही है. पिछले एक दशक में सड़क निर्माण ने कई रिकॉर्ड तोड़े, पर क्या अब वह चमक फीकी पड़ रही है? नया बजट क्या कोई नई जान फूंकेगा इस सेक्टर में? जानिए क्या हैं उम्मीदें.
पिछले 11 वर्षों (2014-25) में प्रधानमंत्री मोदी सरकार ने सड़क-परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर में अच्छी विकास की है. सरकार के आंकड़ों के मुताबिक राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) का नेटवर्क 2014 के लगभग 91,287 किमी से बढ़कर अब 1,46,000 किमी के आसपास पहुंच गया है,यानी करीब 60% की वृद्धि. इसी अवधि में एक्सप्रेसवे (हाई स्पीड कॉरिडोर) मात्र 93 किमी से बढ़कर करीब 3,052 किमी हो गए हैं.
तेज गति के बाद थमने लगी रफ्तार
हालांकि इतनी गति से वृद्धि के बाद हाल के वर्षों में सड़क निर्माण की रफ्तार धीमी पड़ गई है. वित्त वर्ष 2020-21 में एनएच का निर्माण रिकॉर्ड 36.5 किमी/दिन था, जबकि यह 2023-24 में 34 किमी/दिन और 2024-25 में करीब 29 किमी/दिन रह गया. उदाहरण के लिए, 2024-25 में कुल 10,660 किमी सड़कें बनीं, जबकि 2023-24 में यह 12,349 किमी थी. इस वित्त वर्ष (2025-26) की शुरुआत तक 17.06 किमी/दिन की रफ्तार दर्ज की गई है, जो पिछले दशक में सबसे धीमी गति है.

निर्माण गति में गिरावट के कारण
हाल में सड़क निर्माण धीमा होने के पीछे कई कारक हैं. केंद्रीय एजेंसियों द्वारा ठेके (एवॉर्ड) देने की गति पिछले दो वर्षों से सुस्त रही है; प्रतिवर्ष लगभग 8-9 हजार किमी सड़क ठेके पर दी जा रही हैं, जबकि निर्माण क्षमता 10-12 हजार किमी प्रति वर्ष से ऊपर है. इससे ऑर्डर बुक घटता जा रहा है.
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साथ ही, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सड़क-परिवहन बजट मात्र 2.72 लाख करोड़ रुपये तय हुआ (पिछले साल से केवल 3% की बढ़ोतरी), जबकि FY21-24 में इस क्षेत्र पर 19% CAGR बढ़त थी.
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मार्केट एक्सपर्ट के मुताबिक, निजी क्षेत्र को आकर्षित करने के लिए सरकार अब इन्फ्रास्ट्रक्चर इनविट, मॉनेटाइजेशन और पीपीपी मॉडल पर ध्यान केंद्रित कर रही है और छोटे कामों से हटकर बड़े एक्सप्रेसवे कॉरिडोर पर जोर दे रही है. गति में कमी की वजह मौसम संबंधी कारण भी रहे. 2022-23 के मॉनसून में भारी बारिश से 725 से अधिक सड़क परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं.
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बजट 2026-27 से उम्मीदें
विश्लेषकों का अनुमान है कि आगामी 2026-27 के केंद्रीय बजट में सड़क-निर्माण को लेकर बड़ा निवेश जारी रहेगा. पिछले वित्त में सड़क परिवहन पर खर्च 2.8 लाख करोड़ रुपये पार कर गया था और इस वर्ष भी यह ऊंचा रहने की संभावना है.
अब ध्यान मात्र किलोमीटर से हटकर गुणवत्ता, रखरखाव और जमीन पर काम में तेजी लाने से होगा. अर्थशास्त्रियों की राय है कि बजट में मशीनीकरण और कुशल जनशक्ति पर निवेश (प्रशिक्षण-कार्यक्रम, टैक्स इंसेंटिव) बढ़ाया जाएगा. साथ ही, ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस (रख-रखाव) पर खर्च बढ़ाने, और निजी निवेश (पब्लिक इन्विट, टोल-ट्रांसफर) को बढ़ावा देने की मांग की जा रही है.
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