क्या बजट में निकलेगा टैरिफ का तोड़, कारोबारियों को चाहिए टैक्स में छूट, सस्ता आयात और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस
क्या इस बार का बजट कारोबारियों की उम्मीदों पर खरा उतरेगा? अमेरिकी टैरिफ की मार झेल रहे उद्योग अब राहत की आस में हैं. टैक्स में छूट, सस्ते आयात और सरल नियमों की मांग तेज है. जानिए कैसे एक ऐलान बदल सकता है लाखों व्यवसायों की दिशा, हर निगाह अब बजट पर टिकी है.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को संसद में Union Budget 2026-27 पेश करेंगी. बीते कई महीनों से ट्रंप टैरिफ के चलते वस्त्र, ज्वेलरी, समुद्री भोजन जैसे श्रम-गहन उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. उद्योगों के सामने लागत बढ़ने और मांग घटने की चुनौतियां खड़ी हो गई हैं. अब ऐसे में कारपोरेट जगत उम्मीद कर रहा है कि आगामी बजट में सरकार संकटों का समाधान लेकर आएगी.
अमेरिकी टैरिफ का कारोबार पर असर
अमेरिकी टैरिफ से भारत के निर्यात को भारी झटका लगा है. भारतीय अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इससे देश की जीडीपी ग्रोथ में 30-80 बेसिस प्वाइंट तक की कमी आ सकती है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, टेक्सटाइल, आभूषण और झींगा निर्यातक सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं.
एफआईईओ के रल्हान का कहना है कि भारत से अमेरिका जाने वाले करीब 55% निर्यात अब वियतनाम, चीन और बांग्लादेश के निर्यातकों की तुलना में महंगा हो गया है, जिसके कारण बाजार हिस्सेदारी घट रही है. लाखों करोड़ रुपये के निर्यात पर असर पड़ा है और निर्यातक कई जगह उत्पादन रोकने को मजबूर हो गए हैं.
CNBC TV18 के हवाले से बीते सितंबर निर्मला सितारमण ने संकेत दिया था कि 50% के टैरिफ से प्रभावित हुए कारोबारियों के लिए सरकार राहत पैकेज तैयार करेगी. पहले ही बताया जा चुका है कि छोटे व्यवसायों और निर्यातकों के लिए 90 दिन तक के ब्याज बकाया ऋण पर क्रेडिट गारंटी की व्यवस्था की जाएगी. केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी कहते हैं कि प्रभावित उद्योगों को वित्तीय सहायता देने और उन्हें चीन, लैटिन अमेरिका, मध्य पूर्व जैसे नए बाजारों में विस्तार के उपाय मिलेंगे.
उद्योग की मांगें- टैक्स राहत और सस्ता आयात
उद्योग संगठन बड़े पैमाने पर बजट से कर छूट और आयात शुल्क में ढील की उम्मीदें रखे हुए है. भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (FIEO) ने बजट में इन्वर्टेड ड्यूटी ढांचे को खत्म करने की मांग की है, ताकि कच्चे माल पर आयात शुल्क तैयार माल जितना ही रहे.
इसके अलावा, पोशाक निर्यात संवर्धन परिषद (AEPC) चाहता है कि टेक्सटाइल उद्योग के लिए ऋणों पर ब्याज सब्सिडी बढ़ाई जाए और कपड़ा मशीनरी पर जीएसटी दर कम की जाए ताकि लागत में राहत मिले.
सीआईआई जैसी शीर्ष उद्योग संस्था ने भी सुझाव दिए हैं कि MSME और विनिर्माण को प्रेरित करने हेतु टैक्स में और राहत दी जाए, विशेषकर नई टेक्नोलॉजी में निवेश के लिए अतिरिक्त अवमूल्यन (डिप्रिसिएशन) की सुविधा फिर से शुरू हो. व्यापारियों का कहना है कि बजट में सस्ते आयात पर भी ध्यान दिया जाए. इस तरह अगर सरकार ये सुझाव के मद्देनजर अपने फैसले लेती है तो टैक्स छूट नए निवेश को बढ़ावा देंगी और कारोबार का भार कम करेंगी
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को सशक्त बनाने की मांग
इसके अलावा व्यापारियों के सबसे बड़ी संगठन, कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सामने अगले बजट को लेकर अपनी मांग रखी. CAIT के राष्ट्रीय महासचिव और चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने वित्त मंत्री को चिठ्ठी लिखकर मांग की है कि आत्मनिर्भर भारत के विजन को ध्यान में रखते हुए बजट 2026-27 में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, वोकल फॉर लोकल, लोकल फॉर ग्लोबल, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों को मजबूत करने के लिए आगामी बजट में विशेष प्रावधान शामिल करना जरूरी होगा.
उदाहरण के लिए, छोटे कारोबारियों के लिए ‘सिंगल विंडो’ कंप्लायंस सिस्टम लागू करने, अनावश्यक जांचों और नोटिस पर रोक लगाने तथा व्यापार कानूनों का अपराधीकरण (डिक्रिमिनलाइजेशन) जल्द से जल्द लागू करने की मांग की गई है.
इसके अलावा, कैट ने ‘वन नेशन-वन लाइसेंस’ की व्यवस्था की मांग की है ताकि सभी व्यापारिक लाइसेंस एक ही डिजिटल पोर्टल से मिलें और ऑटो-रिन्यूअल की सुविधा हो. वे डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा देने के लिए टेक्नोलॉजी अपनाने पर सब्सिडी और टैक्स छूट जैसी पहल भी चाहते हैं.
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सरकार की राहत योजना और संभावित कदम
सरकार राहत पैकेज की तैयारी कर रही है. पिछले साप्ताह में अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिए कि भारत द्वारा रूसी तेल आयात घटने पर अमेरिकी प्रशासन 25% टैरिफ हटा सकता है. बहरहाल, वर्तमान में 50% टैरिफ लागू हैं, इसलिए घरेलू बजट पर भी दबाव है.
आरबीआई और प्रमुख अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सरकारी खर्च में वृद्धि, कर राहत और ग्रामीण मांग बढ़ने से टैरिफ के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है
तमाम मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बजट में प्रभावित क्षेत्रों को समर्थन देने के लिए विशेष पैकेज हो सकता है. इसमें निवेश प्रोत्साहन, कर्ज पर गारंटी और सब्सिडी, तकनीकी उन्नयन योजनाएं और इन-इनवॉइसिंग समाधान शामिल हो सकते हैं.
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