ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को मिल सकता है अशोक चक्र; ISS जाने वाले पहले भारतीय; अंतरिक्ष में दिखाया था अदम्य साहस
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का नाम अशोक चक्र के लिए भेजा गया है. वह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन जाने वाले पहले भारतीय बने हैं. उन्होंने एक्सिओम चार मिशन के तहत जून 2025 में ISS की यात्रा की थी और करीब बीस दिन अंतरिक्ष में बिताए. इस दौरान उन्होंने साठ से अधिक वैज्ञानिक प्रयोग किए.
Ashok Chakra: भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र मिल सकता है. उनका नाम इस सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार के लिए भेजा गया है. वह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन जाने वाले पहले भारतीय बने हैं. अपने स्पेस मिशन के दौरान उन्होंने कठिन परिस्थितियों में अदम्य साहस और सूझबूझ का परिचय दिया. उनके इस योगदान ने भारत को वैश्विक मंच पर गौरव दिलाया है.
एक्सिओम चार मिशन के तहत ISS यात्रा
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने एक्सिओम चार मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा की थी. उन्होंने 25 जून 2025 को तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ उड़ान भरी. यह मिशन वैज्ञानिक अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण था. इस मिशन के जरिए भारत की उपस्थिति अंतरिक्ष क्षेत्र में और मजबूत हुई. शुभांशु ने मिशन के हर चरण में जिम्मेदारी से काम किया.
अंतरिक्ष में करीब बीस दिन गुजार
शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष में करीब बीस दिन का समय बिताया. वह 14 जुलाई को पृथ्वी पर वापस लौटे थे. इस दौरान उन्होंने 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोग किए. इन प्रयोगों में जैव चिकित्सा विज्ञान तंत्रिका विज्ञान कृषि और अंतरिक्ष तकनीक से जुड़े विषय शामिल थे. उनका काम भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए बेहद उपयोगी माना जा रहा है.
कठिन हालात में दिखाया अदम्य साहस
मिशन के दौरान शुभांशु को कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पडा. माइक्रोग्रैविटी और शारीरिक बदलावों के बीच उन्होंने पूरे धैर्य के साथ काम किया. विकिरण का खतरा और मानसिक दबाव भी मिशन का हिस्सा थे. इसके बावजूद वह पूरे समय शांत और केंद्रित रहे. यही कारण है कि उनकी बहादुरी को असाधारण माना जा रहा है.
अशोक चक्र के लिए क्यों किया गया अनुशंसा
अंतरिक्ष के प्रतिकूल माहौल में शुभांशु शुक्ला ने साहस और मानसिक दृढ़ता का परिचय दिया. उन्होंने जोखिम भरे हालात में भी मिशन की जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाया. यह साहस शांतिकाल में दुर्लभ माना जाता है. इसी कारण उनका नाम अशोक चक्र के लिए भेजा गया है. यह सम्मान उनकी बहादुरी को राष्ट्रीय पहचान देगा.
लखनऊ से अंतरिक्ष तक का सफर
शुभांशु शुक्ला उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं. बारहवीं के बाद उन्होंने एनडीए की परीक्षा पास की और वहीं से पढ़ाई पूरी की. वह वर्ष 2006 में भारतीय वायुसेना में शामिल हुए. वर्ष 2019 में उन्हें गगनयान मिशन के लिए अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना गया. उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का उदाहरण है.
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