₹92 प्रति डॉलर पर फिसला रुपया; चिंता का विषय बना कमजोर रुपया, आयात से लेकर विदेशी पढ़ाई और यात्रा तक सब होगा महंगा
जनवरी 2026 में रुपया डॉलर के मुकाबले 92 के स्तर तक गिर गया है. इसका सीधा असर आयात, विदेशी शिक्षा, विदेश यात्रा और महंगाई पर पड़ा है. तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी जैसे आयात महंगे होंगे. वहीं, निर्यातकों को कमजोर रुपये से फायदा मिलेगा क्योंकि उन्हें डॉलर के बदले ज्यादा रुपये मिलेंगे.
Rupee Depreciation: जनवरी 2026 में रुपया डॉलर के मुकाबले 92 तक गिर गया है. इस गिरावट का असर आयात, विदेशी शिक्षा, यात्रा और महंगाई पर पड़ेगा. वहीं, भारतीय निर्यातकों को इससे फायदा होगा, क्योंकि उन्हें एक डॉलर पर ज्यादा रुपये मिलेंगे. इस महीने रुपया 2 फीसदी से अधिक गिर चुका है. 2025 में विदेशी निवेशकों के लगातार पैसे निकालने और डॉलर की मजबूती के कारण रुपया 5 फीसदी तक गिर गया था. कमजोर रुपया आर्थिक गतिविधियों पर मिक्स असर डाल रहा है.
महंगा होगा आयात
कमजोर रुपया होने के कारण आयात महंगा हो जाएगा. भारत तेल, इलेक्ट्रॉनिक सामान, रसायन, मशीनरी और कीमती मेटल्स जैसे आयात पर निर्भर है. इंपोर्टर्स को वही सामान खरीदने के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने होंगे. पेट्रोल, डीजल और जेट ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी तेल आयात करता है.
महंगी होगी विदेशी शिक्षा
रुपया कमजोर होने से विदेश में पढ़ाई महंगी हो जाएगी. छात्रों को हर डॉलर के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने होंगे. अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और अन्य देशों में फीस और लिविंग एक्सपेंस बढ़ सकते हैं. इससे भारतीय परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है. विदेश यात्रा करने वाले लोग भी प्रभावित होंगे. डॉलर की कीमत बढ़ने से यात्रियों को अपने यात्रा खर्च के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने होंगे. टिकट, होटल और अन्य खर्च महंगे हो जाएंगे.
निर्यातकों को मिलेगा फायदा
कमजोर रुपया निर्यातकों के लिए फायदेमंद है. उन्हें एक डॉलर के बदले ज्यादा रुपये मिलेंगे. हालांकि, आयात पर निर्भर रहने वाली इंडस्ट्री जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स और ज्वैलरी को इसका लाभ सीमित मिलेगा. कम आयात वाले सेक्टर जैसे टेक्सटाइल्स ज्यादा फायदा उठा सकते हैं.
व्यापार घाटा और आयात डेटा
दिसंबर 2025 में भारत का आयात बढ़कर 63.55 बिलियन डॉलर पहुंच गया. व्यापार घाटा 25.04 बिलियन डॉलर रहा. क्रूड ऑयल आयात 14.4 बिलियन डॉलर और सिल्वर आयात 758 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया. वहीं, सोने का आयात घटकर 4.13 बिलियन डॉलर रह गया.
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आर्थिक संतुलन बनाना होगा
जानकारों का कहना है कि लंबी अवधि में आर्थिक स्थिरता के लिए भारत को ग्रोथ और महंगाई के बीच संतुलन बनाना होगा. साथ ही करेंसी मैनेजमेंट और व्यापार रणनीति पर ध्यान देना जरूरी है. इससे निर्यातकों को फायदा मिलेगा और आयात से जुड़े खर्च को नियंत्रित किया जा सकेगा.
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