महंगी कार खरीदने का है शौक, पर बजट नहीं? India-EU FTA से लग्जरी कार ₹45 लाख तक हो सकती है सस्ती

लग्जरी कार खरीदना अब सिर्फ सपना नहीं रह सकता. भारत और यूरोप के बीच होने वाली एक बड़ी ट्रेड डील ऑटो सेक्टर में हलचल मचा सकती है. इस समझौते से कीमतों, मैन्युफैक्चरिंग और प्रीमियम कार बाजार की दिशा बदलने के संकेत मिल रहे हैं. खासतौर पर हाई-एंड कार खरीदने वालों के लिए तस्वीर कुछ अलग हो सकती है.

India-EU FTA Image Credit: FreePik

India EU free trade agreement Impact: भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर, खासकर लग्जरी इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बाजार के लिए बड़ा मोड़ साबित हो सकता है. इस समझौते के तहत यूरोप से आने वाली कारों पर आयात शुल्क में भारी कटौती की चर्चा है. अगर यह डील तय होती है, तो भारत में लग्जरी EV की कीमतें नीचे आ सकती हैं और देश यूरोपीय कंपनियों के लिए एक अहम मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर उभर सकता है.

आयात शुल्क में बड़ी राहत की तैयारी

मौजूदा समय में भारत, यूरोप से आने वाली उन कारों पर करीब 100 फीसदी आयात शुल्क लगाता है, जिनकी लैंडेड कॉस्ट 40 हजार डॉलर यानी करीब 37 लाख रुपये से ज्यादा होती है. यह शुल्क सीधे तौर पर लग्जरी इलेक्ट्रिक कारों पर लागू होता है, जिनकी शुरुआती कीमत आम तौर पर एक करोड़ रुपये के आसपास होती है. प्रस्तावित FTA में इस शुल्क को घटाकर 10 से 15 फीसदी तक लाने की बात चल रही है. यानी जो कार पहले ₹1 करोड़ के आसपास पड़ रही थी, उसकी एक्स-शोरूम कीमत ₹40-45 लाख तक कम हो सकती है. इससे यूरोपीय लग्जरी EV भारत में पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा प्रतिस्पर्धी कीमत पर उपलब्ध हो सकती हैं.

लग्जरी EV की मांग में तेजी

भारत में लग्जरी EV का बाजार अभी छोटा है, लेकिन इसकी बिक्री बढ़ रही है. फिलहाल इस सेगमेंट में सालाना करीब 2,000 यूनिट की बिक्री होती है. जनवरी से नवंबर 2025 के बीच लग्जरी सेगमेंट में बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 10.7 फीसदी तक पहुंच गई, जबकि मास मार्केट में यह आंकड़ा 4.5 फीसदी रहा. इससे साफ है कि अमीर ग्राहक इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजी को तेजी से अपना रहे हैं.

लग्जरी ब्रांड्स अभी पूरी तरह EV पर निर्भर नहीं हैं. वे हाइब्रिड टेक्नोलॉजी को एक ट्रांजिशन के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं. माइल्ड हाइब्रिड से लेकर प्लग-इन हाइब्रिड तक, कई मॉडल बाजार में हैं. इसके साथ-साथ पूरी तरह इलेक्ट्रिक मॉडल भी धीरे-धीरे अपनी जगह बना रहे हैं. ऊंची कीमतों के बावजूद इन गाड़ियों में दिलचस्पी यह दिखाती है कि भारतीय ग्राहक अब परफॉर्मेंस के साथ-साथ सस्टेनेबिलिटी को भी महत्व दे रहे हैं.

भारत बन सकता है मैन्युफैक्चरिंग हब

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस समझौते का एक बड़ा असर मैन्युफैक्चरिंग पर भी पड़ सकता है. कई लग्जरी ब्रांड पहले से भारत में स्थानीय स्तर पर उत्पादन कर रहे हैं. FTA के बाद भारत से यूरोप और दूसरे बाजारों में एक्सपोर्ट के रास्ते और आसान होने की उम्मीद हैं. इससे भारतीय प्लांट्स का उत्पादन बढ़ेगा और रोजगार के नए मौके भी बन सकते हैं.

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बैटरी पासपोर्ट और नई तकनीक का दौर

FTA में सिर्फ टैरिफ ही नहीं, बल्कि बैटरी पासपोर्ट, डिजिटल वैल्यू एडिशन और सॉफ्टवेयर-आधारित मैन्युफैक्चरिंग जैसे नए नियम भी शामिल हो सकते हैं. बैटरी पासपोर्ट का मतलब है बैटरी के पूरे जीवनचक्र का डिजिटल रिकॉर्ड, जिससे सप्लाई चेन ज्यादा पारदर्शी बनेगी और चीन पर निर्भरता घटेगी.