जब FIIs बेच रहे हैं, तब बैंक, इंफ्रास्ट्रक्चर और टेलीकॉम पर दांव क्यों लगा रही है न्यूयॉर्क की GQG, अडानी ग्रीन में भी मौका?
हालिया उतार-चढ़ाव और कमजोर प्रदर्शन के बावजूद भारतीय शेयर बाजार को लेकर एक बड़े वैश्विक निवेशकों का भरोसा कायम है. उसका मानना है कि मौजूदा सुस्ती अस्थायी है और चुनिंदा सेक्टर आने वाले समय में बाजार की दिशा बदल सकते हैं.
Share market news: भारतीय शेयर बाजार ने हाल के वर्षों में जिस तरह कमजोर प्रदर्शन किया है, उसने कई विदेशी निवेशकों को सतर्क कर दिया है. लेकिन इस गिरावट के बीच भी कुछ विदेशी निवेशक भारत की लॉन्ग ग्रोथ स्टोरी पर भरोसा बनाए हुए हैं. न्यूयॉर्क स्थित निवेश फर्म GQG पार्टनर्स का मानना है कि मौजूदा सुस्ती अस्थायी है और आने वाले समय में बैंकिंग सेक्टर की अगुवाई में कमाई में मजबूत वापसी देखने को मिल सकती है.
‘परफेक्ट स्टॉर्म’ से गुजर रहा था भारत, पर आएगी रफ्तार
ब्लूमबर्ग के हवाले से GQG पार्टनर्स के पोर्टफोलियो मैनेजर सुदर्शन मूर्ति ने कहा, भारतीय बाजार बीते कुछ समय से एक तरह के “परफेक्ट स्टॉर्म” का सामना कर रहा था. इसमें टैरिफ को लेकर चिंताएं, रुपये की कमजोरी, कंपनियों की धीमी कमाई और निवेशकों का पैसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े बाजारों की ओर जाना शामिल था. इसी वजह से भारतीय शेयरों का प्रदर्शन उभरते बाजारों के मुकाबले कमजोर रहा.
सुदर्शन मूर्ति का कहना है कि पांच तिमाहियों की सुस्ती के बाद अब कॉरपोरेट कमाई की रफ्तार दोबारा मिड-टीन्स यानी 14–16 प्रतिशत के स्तर पर लौट सकती है. उन्हें भरोसा है कि जैसे ही हालात सामान्य होंगे, निवेशकों का भरोसा भी लौटेगा. उन्होंने कहा कि चीन में लगाए गए हर एक डॉलर के मुकाबले GQG ने भारत में करीब नौ गुना ज्यादा निवेश किया है, जो भारत पर उनके भरोसे को दिखाता है.
विदेशी निवेशकों की निकासी के बीच अलग रुख
जहां एक ओर विदेशी निवेशकों ने पिछले साल भारतीय शेयरों से करीब 19 अरब डॉलर निकाले, वहीं GQG इस भीड़ से अलग नजर आता है. कमजोर कमाई, अमेरिका के साथ तनाव और रुपये की कमजोरी ने विदेशी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है, लेकिन GQG ने भारत में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखी है. रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के कुल 166 अरब डॉलर के एसेट्स में से 24 अरब डॉलर से ज्यादा भारत में निवेश हैं.
बैंक, इंफ्रास्ट्रक्चर और टेलीकॉम पर भरोसा
GQG के पोर्टफोलियो में ICICI बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया जैसे बड़े बैंक शामिल हैं. मूर्ति के मुताबिक, बैंकिंग सेक्टर में ग्रोथ फिर से रफ्तार पकड़ रही है, कर्ज की गुणवत्ता अच्छी है और वैल्यूएशन लंबे समय के लिहाज से आकर्षक हैं. उनका मानना है कि निफ्टी 50 में भारी हिस्सेदारी रखने वाले बैंक शेयर बाजार की रिकवरी में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
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भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत भी बढ़ेगी. मूर्ति ने कहा कि अडानी ग्रीन जैसी कंपनियां लगातार क्षमता बढ़ा रही हैं और इनके प्रोजेक्ट्स लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट्स पर आधारित होते हैं, जिससे कमाई को लेकर साफ तस्वीर मिलती है. GQG का निवेश तरीका आने वाले पांच साल की कमाई की संभावनाओं और मौजूदा वैल्यूएशन को देखकर फैसले लेने पर आधारित है. मूर्ति का मानना है कि लंबी अवधि में भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां कमाई की ग्रोथ सबसे बेहतर रह सकती है.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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