टेक्सटाइल सेक्टर को भी मिलेगा 0% रेसिप्रोकल टैरिफ का फायदा, पीयूष गोयल बोले- ट्रेड डील में आ सकती है डिटेल

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम ट्रेड डील भारतीय टेक्सटाइल और अपैरल इंडस्ट्री के लिए बड़ा अवसर बन सकती है. पीयूष गोयल के अनुसार, अमेरिका से इम्पोर्टेड कपास से बने भारतीय कॉटन गारमेंट्स को अमेरिकी बाजार में जीरो रिसिप्रोकल ड्यूटी का फायदा मिल सकता है. इससे टेक्सटाइल एक्सपोर्ट की लागत घटेगी और भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत होगी.

भारत-अमेरिका ट्रेड डील Image Credit: piyush goyal x

India US trade deal: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम ट्रेड डील भारतीय टेक्सटाइल और अपैरल इंडस्ट्री के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है. वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिया है कि अमेरिका से इम्पोर्टेड कपास का इस्तेमाल कर तैयार किए गए भारतीय कॉटन गारमेंट्स को अमेरिकी बाजार में जीरो रिसिप्रोकल ड्यूटी का फायदा मिल सकता है. यह व्यवस्था उस अंतरिम समझौते का हिस्सा होगी, जिस पर दोनों देश मार्च 2026 के आसपास हस्ताक्षर कर सकते हैं. इस कदम से भारतीय निर्यातकों की लागत घटेगी और वे एशियाई प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बेहतर स्थिति में आ सकते हैं.

टेक्सटाइल एक्सपोर्ट को क्या मिलेगा फायदा

पीयूष गोयल के अनुसार, प्रस्तावित डील के तहत अमेरिका भारत से आने वाले टेक्सटाइल और अपैरल प्रोडक्ट्स पर रिसिप्रोकल टैरिफ को घटाकर 18 फीसदी कर देगा. हालांकि, जिन गारमेंट्स का निर्माण अमेरिका से आयातित कपास से किया जाएगा, उन्हें इस रिसिप्रोकल हिस्से में पूरी छूट मिलेगी. यानी ऐसे प्रोडक्ट्स पर जीरो रिसिप्रोकल ड्यूटी लागू होगी.

हालांकि, मोस्ट फेवर्ड नेशन यानी MFN टैरिफ लागू रहेगा. इसके बावजूद, अमेरिकी कपास से बने भारतीय गारमेंट्स पर प्रभावी ड्यूटी घटकर करीब 3 फीसदी रह सकती है. इससे भारतीय कंपनियों की प्राइसिंग पावर मजबूत होगी और अमेरिका में उनकी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति सुधरेगी.

बांग्लादेश फैक्टर और बढ़ती प्रतिस्पर्धा

इस घोषणा को बांग्लादेश फैक्टर के संदर्भ में बेहद अहम माना जा रहा है. हाल ही में बांग्लादेश ने अमेरिका के साथ हुए ट्रेड अरेंजमेंट में अनुकूल शर्तें हासिल की हैं. इस समझौते के तहत बांग्लादेश को लगभग 19 फीसदी की कम रिसिप्रोकल टैरिफ रेट मिली है, साथ ही अमेरिका की कपास और फाइबर से बने कुछ रेडीमेड गारमेंट्स पर जीरो ड्यूटी एक्सेस भी मिला है.

आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच बांग्लादेश का अमेरिका को रेडीमेड गारमेंट एक्सपोर्ट करीब 7.6 बिलियन डॉलर रहा, जबकि इसी अवधि में भारत का एक्सपोर्ट लगभग 3.26 बिलियन डॉलर ही रहा. यही वजह है कि भारतीय टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स बांग्लादेश को मिले फायदे को लेकर चिंतित थे.

किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं

पीयूष गोयल ने साफ किया कि इस ट्रेड डील में भारतीय किसानों के हितों की पूरी सुरक्षा की गई है. उनके मुताबिक, भारत में उत्पादित करीब 90 फीसदी से 95 फीसदी कृषि उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा गया है. चावल, गेहूं, डेयरी उत्पाद, दालें, खाद्य तेल और कई फल-सब्जियों जैसे संवेदनशील कृषि और खाद्य उत्पादों पर किसी तरह की टैरिफ रियायत नहीं दी गई है, ताकि घरेलू किसानों और फूड सिक्योरिटी पर कोई असर न पड़े.

किन प्रोडक्ट्स पर मिली सीमित रियायत

सरकार ने कुछ चुनिंदा कृषि उत्पादों पर सीमित रियायतें दी हैं. इनमें बादाम, अखरोट, पिस्ता, सेब, क्रैनबेरी और सोयाबीन ऑयल शामिल हैं. इन पर टैरिफ रेट कोटा के जरिए नियंत्रित तरीके से छूट दी गई है. कुल मिलाकर, प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील से जहां टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर को नई गति मिलने की उम्मीद है, वहीं सरकार का दावा है कि इसमें किसानों और घरेलू हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है.

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