एयरपोर्ट पर फिर मचेगी अफरा-तफरी? केबिन क्रू को आराम देने के नियमों पर बवाल, IndiGo–Air India ने मांगी राहत
सरकार के केबिन क्रू फटीग नियमों पर IndiGo और Air India समेत एयरलाइंस ने राहत की मांग की है, उनका कहना है कि सख्त प्रावधानों से फ्लाइट शेड्यूल और ऑपरेशंस प्रभावित हो सकते हैं. नए नियमों से लागत और लॉजिस्टिक्स बढ़ने की चिंता है. एयरलाइंस को डर है कि बिना तैयारी लागू हुए नियमों से फिर फ्लाइट कैंसिलेशन और एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी की स्थिति बन सकती है.
Cabin Crew Fatigue Rules: एयरलाइंस केबिन क्रू को राहत देने के मकसद से सरकार ने हाल ही एयरलाइंस कंपनियों को फटीग नियमों (ऐसे नियम होते हैं जो पायलट और केबिन क्रू को ज्यादा काम और कम आराम की वजह से होने वाली थकान से बचाने के लिए बनाए जाते हैं) काे लागू करने की हिदायत दी थी. मगर नियमों को अमल में लाने के लिए जरूरी तैयारी की कमी के चलते देश की पॉपुलर एयरलाइंस कंपनी IndiGo को दिसंबर में करीब 4,500 फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ी थीं. इससे एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी मच गई थी. हजारों पैंसेजर्स को परेशानी झेलनी पड़ी थी. इस नियम को लेकर एयरलाइंस कंपनियां और सरकार दोबारा आमने-सामने आ गई हैं. ऐसे में एयरलाइंस को डर सता रहा है कि कहीं फिर से एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी ना मच जाए.
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo और Air India समेत टॉप कैरियर्स का प्रतिनिधित्व करने वाली फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने केबिन क्रू के लिए प्रस्तावित फटीग मैनेजमेंट नियमों को नरम करने की मांग की है. एयरलाइंस का कहना है कि सख्त नियम लागू हुए तो उड़ानों का शेड्यूल बिगड़ सकता है और ग्रोथ की रफ्तार थम सकती है. कंपनियां नहीं चाहतीं कि केबिन क्रू के नियमों से फिर ऑपरेशंस प्रभावित हों.
क्या है नियम?
सरकार ने अक्टूबर में ड्राफ्ट नियम पेश किए थे, जिनमें केबिन क्रू के लिए साप्ताहिक न्यूनतम आराम 36 घंटे से बढ़ाकर 48 घंटे करने का प्रस्ताव है. इसके साथ ही नाइट ऑपरेशंस में काम के घंटों पर सख्ती और लेओवर के दौरान हर फ्लाइट अटेंडेंट को अलग होटल रूम देने की अनिवार्यता शामिल है. सरकार का कहना है कि इन कदमों से ऑपरेशनल सेफ्टी बेहतर होगी और क्रू की थकान कम होगी.
FIA का तर्क
FIA का तर्क है कि सरकार के नियम के तहत हर क्रू मेंबर के लिए अलग होटल रूम अनिवार्य करना व्यावहारिक नहीं है. कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट्स पर होटल की सीमित उपलब्धता के कारण क्रू को दूर या कम सुविधाजनक जगह ठहराना पड़ सकता है, जिससे लागत और लॉजिस्टिक्स दोनों बढ़ेंगे. एयरलाइंस के मुताबिक इससे फ्लाइट प्लानिंग और रोस्टर मैनेजमेंट मुश्किल हो जाएगा.
FIA ने यह भी कहा है कि प्रस्तावित नियम कई मामलों में ग्लोबल स्टैंडर्ड्स से ज्यादा सख्त हैं. उदाहरण के तौर पर अल्ट्रा-लॉन्ग-हॉल फ्लाइट यानी ये 16 घंटे के बजाय 14 घंटे कर दी गई है, जिससे ड्यूटी लिमिट और जल्दी लागू हो जाएगी. एयरलाइंस का दावा है कि इससे अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो सकता है.
क्यों बढ़ी चिंता?
एयरलाइंस की चिंता बढ़ने की बड़ी वजह दिसंबर में IndiGo को पायलट फटीग नियमों के चलते परेशानी झेलनी पड़ी थी. ऐसे में कंपनियां नहीं चाहतीं कि केबिन क्रू के नियमों से दोबारा ऐसी दिक्कतें आए. FIA ने रेगुलेटर से मांग की है कि नियमों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए और कुछ प्रावधानों में ढील दी जाए.
अब सबकी नजर डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन के फैसले पर है कि सुरक्षा और कारोबार के बीच संतुलन कैसे बनाया जाता है. अगर नियम सख्ती से लागू हुए तो यात्रियों को भी शेड्यूल में बदलाव और कम फ्लाइट विकल्पों का असर झेलना पड़ सकता है.
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