शेयर मार्केट निवेशकों को मिल सकती है राहत! पूंजी की लागत और कंप्लायंस बोझ घटाने की तैयारी: सेबी चीफ
भारतीय पूंजी बाजार को ज्यादा मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में नियामकीय स्तर पर बड़े बदलावों के संकेत मिले हैं. बाजार की लागत, तकनीकी ढांचे और नियमों के असर को लेकर नए सिरे से मंथन हो रहा है. आने वाले समय में निवेशकों और बाजार सहभागियों के लिए अहम फैसले देखने को मिल सकते हैं.
भारतीय पूंजी बाजार को वैश्विक स्तर पर ज्यादा मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में सेबी अब नियमों की सख्ती के साथ-साथ उनकी लागत और असर पर भी नए सिरे से सोच रहा है. नियामकीय बोझ अगर ज्यादा हुआ तो इसका सीधा असर बाजार की गति, निवेश और भरोसे पर पड़ता है. इसी सोच के साथ सेबी ने साफ संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में उसका फोकस पूंजी की लागत घटाने और नियमों को ज्यादा व्यावहारिक बनाने पर रहेगा.
पूंजी की लागत घटाने पर जोर
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने गुरुवार कहा कि पूंजी की लागत किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम होती है और इसे कम किया जाना चाहिए. उन्होंने माना कि अगर नियमों का पालन करना समय और पैसे दोनों के लिहाज से भारी पड़ता है, तो बाजार की प्रतिस्पर्धा कमजोर होती है. सेबी अब यह सुनिश्चित करना चाहता है कि नियम जरूरी हों, लेकिन उनकी वजह से कारोबार और निवेश पर अनावश्यक बोझ न पड़े. सेबी चीफ के मुताबिक, हर नियामकीय कदम की लागत और उसकी दक्षता पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है.
डिपॉजिटरी में आई तकनीकी गड़बड़ी
पिछले हफ्ते एनएसडीएल में आई तकनीकी खराबी के कारण शेयरों और फंड के सेटलमेंट में दिक्कतें सामने आई थीं. इस पर बोलते हुए सेबी प्रमुख ने एक्सचेंज, डिपॉजिटरी, क्लियरिंग कॉरपोरेशन और ब्रोकिंग कम्युनिटी की सराहना की. उन्होंने कहा कि पूरे सिस्टम ने दिन-रात काम करके निवेशकों को संभालने की कोशिश की. सेबी चीफ ने साफ किया कि गड़बड़ी के बाद उसकी जड़ तक जाकर जांच की गई है और जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं.
सेबी का मानना है कि बाजार के तेजी से बढ़ने के साथ पुराने यानी लीगेसी सॉफ्टवेयर में तकनीकी खामियां सामने आ सकती हैं. ऐसे मामलों में सिर्फ तात्कालिक समाधान नहीं, बल्कि मध्यम और लंबी अवधि के सुधार जरूरी हैं. इसमें जरूरत पड़ने पर वेंडर्स को सिस्टम मजबूत करने, पुराने सॉफ्टवेयर को अपडेट करने या पूरी तरह बदलने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं.
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रेगुलेटरी इम्पैक्ट असेसमेंट की तैयारी
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सेबी ने नियमों के असर को परखने के लिए एक नई कमेटी बनाई है और अपने आर्थिक व नीति विश्लेषण विभाग में अलग वर्टिकल भी तैयार किया है. NISM का सेंटर फॉर रेगुलेटरी स्टडीज इस पर रिसर्च करेगा. साथ ही, मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन की अध्यक्षता वाली एक्सटर्नल एक्सपर्ट्स कमेटी इस ढांचे को तैयार करने में मदद करेगी. सेबी दूसरे देशों के मॉडल का अध्ययन करेगा, लेकिन भारतीय हालात के मुताबिक अपना अलग ढांचा विकसित करने पर जोर रहेगा.
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