UP ने जमकर भरा सरकारी खजाना, टोल कलेक्शन में नंबर-1; महाराष्ट्र-गुजरात छूटे पीछे
वित्त वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा हाईवे टोल रेवेन्यू जुटाने वाला राज्य बन गया है. राज्य ने नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे पर 8,862.12 करोड़ रुपये का टोल कलेक्शन कर राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात को पीछे छोड़ दिया. वहीं, पूरे देश में टोल कलेक्शन बढ़कर 68,483 करोड़ रुपये हो गया और एनुअल पास स्कीम समेत कुल 70,278.18 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है.

Highway Toll Collection: देश में नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे के तेजी से विस्तार का असर अब टोल कलेक्शन के आंकड़ों में भी साफ दिखाई दे रहा है. वित्त वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा हाईवे टोल रेवेन्यू जुटाने वाला राज्य बनकर उभरा है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि उत्तर प्रदेश ने नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे पर 8,862.12 करोड़ रुपये का टोल जुटाया. इस मामले में उत्तर प्रदेश ने राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों को पीछे छोड़ दिया है.
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है. यही वजह है कि राज्य में वाहनों की आवाजाही बढ़ी है और टोल से होने वाली आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
राजस्थान दूसरे और महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर
टोल कलेक्शन के मामले में राजस्थान दूसरे स्थान पर रहा, जहां वित्त वर्ष 2025-26 में 7,317.51 करोड़ रुपये का टोल कलेक्शन हुआ. इसके बाद महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर रहा, जहां 7,053.71 करोड़ रुपये का टोल कलेक्शन दर्ज किया गया. वहीं, गुजरात में 6,352.38 करोड़ रुपये का टोल कलेक्शन हुआ और वह चौथे स्थान पर रहा. कर्नाटक 4,779.37 करोड़ रुपये के टोल कलेक्शन के साथ शीर्ष पांच राज्यों में शामिल रहा.
उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ा हाईवे नेटवर्क
उत्तर प्रदेश में हाल के वर्षों में सड़क बुनियादी ढांचे पर बड़े पैमाने पर निवेश हुआ है. राज्य में कई नए एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे विकसित किए गए हैं, जिससे लंबी दूरी की यात्रा पहले की तुलना में आसान हुई है. इसी का असर टोल से होने वाली आय पर भी देखने को मिला.
आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में इस समय 141 संचालित टोल प्लाजा हैं. यह संख्या पूरे देश में दूसरी सबसे अधिक है. राजस्थान 172 टोल प्लाजा के साथ पहले स्थान पर है. वहीं, महाराष्ट्र में 105, मध्य प्रदेश में 98 और कर्नाटक में 68 संचालित टोल प्लाजा हैं.
देशभर में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा टोल कलेक्शन
केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में टोल कलेक्शन लगातार बढ़ रहा है. सरकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे से 61,408.15 करोड़ रुपये का यूजर शुल्क प्राप्त हुआ था. वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 68,483 करोड़ रुपये हो गया.
इसके अलावा, सरकार द्वारा निजी वाहनों के लिए शुरू की गई Annual Pass Scheme से 1,795.18 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हुई. इस तरह वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार की कुल टोल प्राप्ति 70,278.18 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई.
क्यों बढ़ रही है टोल से कमाई
टोल कलेक्शन बढ़ने के पीछे कई प्रमुख कारण हैं. सबसे बड़ा कारण देशभर में तेजी से बन रहे नए नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे हैं. इसके अलावा, माल ढुलाई में बढ़ोतरी, निजी वाहनों की संख्या में लगातार इजाफा और बेहतर सड़क संपर्क के कारण भी हाईवे पर ट्रैफिक बढ़ा है. जैसे-जैसे नए हाईवे चालू हो रहे हैं, वैसे-वैसे टोल प्लाजा की संख्या और उनसे होने वाली आय भी बढ़ रही है.
सरकार का मानना है कि सड़क बुनियादी ढांचे में लगातार निवेश से यात्रा का समय कम हो रहा है, लॉजिस्टिक्स कॉस्ट घट रही है और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल रही है. ऐसे में आने वाले वर्षों में टोल कलेक्शन में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
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