अब बिना झंझट के मिल सकते हैं अनक्लेम्ड शेयर, सरकार बदलने जा रही है पूरा सिस्टम; जानें क्या होगा फायदा

अगर आपके पुराने शेयर या डिविडेंड कई साल से बिना क्लेम के पड़े हैं तो जल्द ही उन्हें वापस पाना आसान हो सकता है. सरकार नई डिजिटल और पेपरलेस सिस्टम लाने की तैयारी में है. नए पोर्टल पर AI और डेटा एनालिटिक्स की मदद से दस्तावेजों का वेरिफेकेशन होगा और निवेशकों को बार बार कागजात जमा नहीं करने होंगे.

कई साल से बिना क्लेम के पड़े हैं तो जल्द ही उन्हें वापस पाना आसान हो सकता है. Image Credit: Canva/ Money9

Highlights

  • सरकार अनक्लेम्ड शेयर और डिविडेंड वापस लेने की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस बनाने की तैयारी में है.
  • नए पोर्टल में AI, डेटा एनालिटिक्स, DigiLocker और Aadhaar आधारित वेरिफिकेशन से क्लेम प्रक्रिया तेज होगी.
  • निवेशकों को बार बार दस्तावेज जमा नहीं करने होंगे और एक ही प्लेटफॉर्म पर क्लेम से लेकर भुगतान तक की सुविधा मिलेगी.

IEPFA Digital Portal: अगर आपके पुराने शेयर या डिविडेंड कई साल से बिना क्लेम के पड़े हैं तो जल्द ही उन्हें वापस पाना आसान हो सकता है. केंद्र सरकार इस पूरे प्रोसेस को डिजिटल और पेपरलेस बनाने की तैयारी कर रही है. नई सिस्टम में निवेशकों को बार-बार एक ही डॉक्यूमेंट जमा नहीं करने होंगे. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स की मदद से क्लेम की जांच और वेरिफेकेशन किया जाएगा. इससे क्लेम का प्रोसेस पहले के मुकाबले तेज और आसान होने की उम्मीद है.

नई डिजिटल सिस्टम पर काम कर रही है सरकार

इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार कर रही है जो IEPFA को एमसीए21 पोर्टल और अन्य सरकारी प्लेटफॉर्म से जोड़ेगा. यह प्लेटफॉर्म डिपॉजिटरी, रजिस्ट्रार, बैंक, डिजिलॉकर और आधार वेरिफेकेशन जैसी सर्विस से भी जुड़ा होगा. सभी सिस्टम API के जरिए आपस में जानकारी शेयर करेंगे. इससे निवेशकों को अलग -अलग जगह डॉक्यूमेंट जमा करने की जरूरत कम होगी.

AI और डेटा एनालिटिक्स करेंगे कई काम

नई सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल किया जाएगा. इनकी मदद से डॉक्यूमेंट का वेरिफेकेशन, जानकारी की जांच और क्लेम की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा. निवेशक की सहमति मिलने के बाद ही अलग- अलग सरकारी और रेगुलेटरी संस्थानों से जरूरी जानकारी ली जाएगी. इससे पूरी प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और ट्रांसपेरेंट बनेगी.

सात साल तक क्लेम नहीं होने पर क्या होता है

मौजूदा नियमों के अनुसार अगर कोई शेयर, डिविडेंड या मैच्योर डिबेंचर सात साल तक क्लेम नहीं किया जाता है तो उसे इन्वेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड अथॉरिटी के पास ट्रांसफर कर दिया जाता है. इसके बाद निवेशक या उनके कानूनी उत्तराधिकारी को उसे वापस पाने के लिए अप्लाई करना पड़ता है. अभी यह प्रक्रिया काफी समय लेने वाली मानी जाती है.

एक ही पोर्टल से होगा पूरा काम

नई सिस्टम में एक ही पोर्टल पर क्लेम जमा करने से लेकर डॉक्यूमेंट वेरिफेकेशन, आवेदन की स्थिति देखने, कमी दूर करने और पेमेंट तक की सुविधा मिलेगी. इससे निवेशकों को कई अलग अलग संस्थानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. पूरी प्रक्रिया एक ही जगह से पूरी की जा सकेगी. इससे समय और मेहनत दोनों की बचत होगी.

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आसान मामलों का होगा जल्दी निपटारा

सरकार नई सिस्टम में रिस्क के आधार पर क्लेम की जांच करेगी. जिन मामलों में सभी डॉक्यूमेंट और डिजिटल वेरिफेकेशन पूरे होंगे, उनका निपटारा तेजी से किया जाएगा. वहीं जटिल मामलों की विस्तार से जांच होगी. इससे फर्जी क्लेम पर रोक लगाने के साथ- साथ सही निवेशकों को जल्द राहत देने में भी मदद मिलेगी.