रियल एस्टेट पर पश्चिम एशिया संकट की मार, 7% कम बिके यूनिट, वैल्यू भी ₹1.60 लाख करोड़ से घटकर ₹1.51 लाख करोड़ पहुंची
Anarock की रिपोर्ट के अनुसार वेस्ट एशिया तनाव के चलते तिमाही आधार पर हाउसिंग सेल्स 7% घटी और वैल्यू भी कम हुई है. बढ़ती निर्माण लागत और कमजोर निवेशक सेंटिमेंट से रियल एस्टेट सेक्टर पर दबाव दिखा. हालांकि सालाना आधार पर डिमांड मजबूत है, जिससे लॉन्ग टर्म ग्रोथ की उम्मीद बरकरार है.
West Asia Conflict hits Real Estate: भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में इस समय दोहरी तस्वीर देखने को मिल रही है. एक तरफ हाउसिंग डिमांड सालाना आधार पर मजबूत बनी हुई है, तो दूसरी ओर पश्चिम एशिया संकट के चलते वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में शॉर्ट टर्म में दबाव नजर आ रहा है. प्रॉपर्टी कंसल्टेंट Anarock की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पिछली तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2025) के मुकाबले इस बार तस्वीर थोड़ी कमजोर रही.पश्चिम एशिया संकट की मार प्रॉपर्टी पर भी पड़ी है. जिससे बिक्री घटने समेत इसकी वैल्यू भी कम हुई है.
रिपोर्ट के मुताबिक सेल्स वॉल्यूम 7% घटकर 1,08,970 यूनिट से नीचे आ गया है. वहीं वैल्यू भी ₹1.60 लाख करोड़ से घटकर ₹1.51 लाख करोड़ रह गई है. यह गिरावट बाजार में हालिया महीनों में अनिश्चितता बढ़ने की ओर इशारा करता है.
वेस्ट एशिया तनाव का असर
एनरॉक ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी के मुताबिक ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया में तनाव ने सीधे तौर पर रियल एस्टेट सेक्टर को प्रभावित किया है. इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल से निर्माण लागत बढ़ गई है. जिससे बिल्डर्स की लागत और प्रोजेक्ट प्राइसिंग पर दबाव आया है. निवेशकों का सेंटिमेंट भी कमजोर हुआ है. खासकर मार्च महीने में इस दबाव को ज्यादा महसूस किया गया, जहां बायर्स ने खरीदारी को टालना शुरू कर दिया.
विदेशी निवेशकों ने भी रोका कदम
भारत के रियल एस्टेट में विदेशी निवेशकों की भी बड़ी हिस्सेदारी रहती है, लेकिन मौजूदा जियोपॉलिटिकल तनाव के चलते इन निवेशकों ने नई खरीदारी फिलहाल रोक दी है. इससे हाई-वैल्यू डील्स और लक्जरी सेगमेंट पर असर पड़ा है.
सालाना आधार पर बढ़त
तिमाही आधार पर भले ही रियल एस्टेट सेक्टर पर दबाव हो, लेकिन सालाना आधार पर इसमें बढ़ोतरी दर्ज की गई है. एनरॉक की रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी से मार्च 2026 के दौरान देश के टॉप-7 शहरों में कुल 1,01,675 घरों की बिक्री हुई, जो पिछले साल इसी अवधि के 93,280 यूनिट्स के मुकाबले करीब 9% ज्यादा है. अगर बिक्री की वैल्यू की बात करें तो जनवरी से मार्च तिमाही में इसमें भी बढ़ोतरी देखने को मिली है. कुल बिक्री ₹1.51 लाख करोड़ रही, पिछले साल इसी अवधि में यह ₹1.42 लाख करोड़ थी. यानी वैल्यू के हिसाब से करीब 6% की बढ़त दर्ज हुई, जो बाजार में मांग बने रहने का संकेत देती है.
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लॉन्ग टर्म में मजबूत है सेक्टर
शॉर्ट टर्म भले ही रियल एस्टेट सेक्टर में दबाव दिख रहा हो, लेकिन जानकरों को उम्मीद है कि लॉन्ग टर्म में सेक्टर की बुनियादी ताकत बरकरार है.चूंकि शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है, होम लोन की उपलब्धता बेहतर है और एंड-यूजर डिमांड मजबूत बनी हुई है. यही वजह है कि सालाना आधार पर बिक्री अभी भी बढ़त दिखा रही है. अगर वैश्विक तनाव कम होता है और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर होती हैं, तो रियल एस्टेट सेक्टर में फिर से तेजी लौट सकती है
