रिकॉर्ड लो पर पहुंचा रुपया, डॉलर के मुकाबले ₹94.82 पर बंद; तेल की कीमतों और FII बिकवाली से बढ़ा दबाव
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के चलते रुपया 86 पैसे टूटकर 94.82 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, फिलहाल करेंसी पर दबाव बना रह सकता है. मालूम हो कि पिछले कुछ कारोबारी सत्र में डॉलर के मुकाबले रुपये में भारी गिरावट देखी गई है.
Rupees Record Low against Dollar: शुक्रवार, 27 मार्च को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले बड़ी गिरावट के साथ अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ. रुपये में 86 पैसे की कमजोरी आई और यह 94.82 प्रति डॉलर (प्रोविजनल) पर आकर ठहरा. वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और डॉलर की मजबूती ने रुपये पर दबाव बढ़ाया है. इसके साथ ही पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने भी बाजार की अनिश्चितता को बढ़ाया, जिसका असर भारतीय मुद्रा पर साफ दिखा.
नए लो पर पहुंचा रुपया
इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया 94.18 के स्तर पर खुला और कारोबार के दौरान पहली बार 94.50 के पार निकल गया. अंत में यह और फिसलकर नए रिकॉर्ड लो 94.82 पर बंद हुआ. इससे पहले बुधवार यानी 25 मार्च को भी रुपया 20 पैसे टूटकर 93.96 के स्तर पर बंद हुआ था. गुरुवार को रामनवमी के कारण बाजार बंद रहे थे.
क्यों गिर रहा रुपया?
रुपये की इस गिरावट के पीछे घरेलू शेयर बाजारों में आई भारी कमजोरी भी एक बड़ा कारण रही. सेंसेक्स 1,690 अंकों से ज्यादा गिरकर 73,583 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी में भी करीब 487 अंकों की गिरावट दर्ज की गई. इसके अलावा विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी रुपये पर दबाव बनाए रखा. एक्सचेंज डेटा के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बुधवार को 1,805 करोड़ रुपये से अधिक की शुद्ध बिकवाली की. वैश्विक संकेतों की बात करें तो डॉलर इंडेक्स, जो 6 प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत को मापता है, 0.11 फीसदी की बढ़त के साथ 100 के आसपास बना रहा. वहीं, ब्रेंट क्रूड की कीमतें भी 109.8 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं, जिससे भारत जैसे आयातक देशों की चिंता बढ़ गई है.
क्या है एक्सपर्ट की राय?
LKP सिक्योरिटीज के वीपी (रिसर्च एनालिस्ट- कमोडिटी और करेंसी) जतीन त्रिवेदी के मुताबिक, “रुपये में गिरावट का सिलसिला जारी है और यह करीब 0.80 फीसदी टूटकर 94.70 के आसपास पहुंच गया है. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत के इंपोर्ट बिल पर दबाव बढ़ा रही है, जिससे रुपये पर असर पड़ रहा है. लंबे समय तक ऊंचे क्रूड प्राइस बने रहने की आशंका ने करेंसी और समग्र आर्थिक परिदृश्य दोनों पर दबाव डाला है.”
कहां है रुपये का सपोर्ट लेवल?
उन्होंने आगे जोड़ा, “डॉलर की मजबूत मांग और एनर्जी बेस्ड महंगाई के जोखिम भी रुपये को कमजोर बनाए हुए हैं. तकनीकी तौर पर 94.00 अब एक अहम रेजिस्टेंस लेवल बन गया है, जबकि 95.00 के आसपास अगला सपोर्ट देखा जा रहा है. जब तक कच्चे तेल की कीमतों में ठोस गिरावट नहीं आती, तब तक रुपये पर दबाव बना रह सकता है.”
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