बड़ी बिकवाली! बायबैक के एक्स-डेट पर टूटे Wipro के शेयर, जानें क्या है पूरा मामला ?
रिकॉर्ड डेट के बाद नए निवेशकों को बायबैक का लाभ नहीं मिलता, इसलिए बायबैक से जुड़ा अतिरिक्त मूल्य (प्रीमियम) शेयर के भाव से निकल जाता है. इसके अलावा, जो निवेशक केवल बायबैक के लाभ के लिए शेयर खरीदते हैं, वे एक्स-डेट के बाद अपनी होल्डिंग बेचने लगते हैं. इससे शेयर पर बिकवाली का दबाव बढ़ जाता है.

आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी Wipro के शेयर शुक्रवार को भारी दबाव में नजर आए. कंपनी का शेयर NSE पर शुरुआती कारोबार में करीब 8 प्रतिशत तक गिरकर 188.15 रुपये पर पहुंच गया. इस गिरावट की मुख्य वजह स्टॉक का 15,000 करोड़ रुपये के बायबैक कार्यक्रम के लिए एक्स-डेट पर कारोबार करना है. 4 जून निवेशकों के लिए आखिरी दिन था, जब वे बायबैक का लाभ लेने के लिए कंपनी के शेयर खरीद सकते थे. अब एक्स-डेट के बाद नए खरीदार इस बायबैक के पात्र नहीं रहेंगे.
15,000 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा बायबैक
22 मई 2026 को विप्रो ने अपने अब तक के सबसे बड़े बायबैक कार्यक्रम की रिकॉर्ड डेट की घोषणा की थी. कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) ने चौथी तिमाही के नतीजों के दौरान बताया था कि निदेशक मंडल ने 250 रुपये प्रति शेयर के भाव पर 15,000 करोड़ रुपये के शेयर बायबैक को मंजूरी दी है, जो शेयरधारकों की स्वीकृति के अधीन है. कंपनी के अनुसार यह उसका अब तक का सबसे बड़ा बायबैक होगा और इसके तहत लगभग 5.7 प्रतिशत पेड-अप इक्विटी कैपिटल वापस खरीदी जाएगी. बायबैक प्रक्रिया FY27 की पहली तिमाही में पूरी होने की उम्मीद है.
शेयरधारकों को नकद लौटाने पर फोकस
कंपनी मैनेजमेंट का कहना है कि वह हमेशा अपने शेयरधारकों को नकदी का बड़ा हिस्सा लौटाने की नीति पर काम करती रही है. FY26 के दौरान कंपनी ने डिविडेंड के रूप में करीब 1.3 अरब डॉलर शेयरधारकों को वितरित किए. इसके साथ FY26 तक के तीन वर्षों का कुल पेआउट रेशियो 88 प्रतिशत रहा.
प्रमोटर समूह भी लेगा हिस्सा
कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया है कि प्रमोटर और प्रमोटर समूह के सदस्यों ने प्रस्तावित बायबैक में भाग लेने की इच्छा जताई है. बायबैक प्रक्रिया की निगरानी और क्रियान्वयन के लिए कंपनी ने एक विशेष समिति भी गठित की है.
एक्स-डेट पर शेयर क्यों गिरता है?
शेयर बाजार में अक्सर देखा जाता है कि किसी कंपनी का शेयर बायबैक के एक्स-डेट पर दबाव में आ जाता है. इसकी वजह तकनीकी होती है, न कि कंपनी के कारोबार में कोई कमजोरी. जब कोई कंपनी बायबैक की घोषणा करती है, तो वह शेयरधारकों को मार्केट प्राइस से ऊंचे दाम पर अपने शेयर बेचने का मौका देती है. इस लाभ का फायदा उठाने के लिए निवेशक रिकॉर्ड डेट से पहले शेयर खरीदते हैं.
रिकॉर्ड डेट के बाद नए निवेशकों को बायबैक का लाभ नहीं मिलता, इसलिए बायबैक से जुड़ा अतिरिक्त मूल्य (प्रीमियम) शेयर के भाव से निकल जाता है. इसके अलावा, जो निवेशक केवल बायबैक के लाभ के लिए शेयर खरीदते हैं, वे एक्स-डेट के बाद अपनी होल्डिंग बेचने लगते हैं. इससे शेयर पर बिकवाली का दबाव बढ़ जाता है.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.