डॉलर, तेल और युद्ध के जोखिमों के बीच भारत कितना सुरक्षित? RBI के जारी ताजा डेटा के क्या हैं मायने
वैश्विक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर आई है. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार देश का विदेशी मुद्रा भंडार 682.3 अरब डॉलर पर पहुंच गया है, जो करीब 11 महीने के आयात खर्च को कवर करने के लिए पर्याप्त है.
वैश्विक बाजार में जारी उथल-पुथल और पश्चिम एशिया के तनाव के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे से एक बेहद राहत भरी खबर आई है. भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को देश के विदेशी मुद्रा भंडार के ताजा आंकड़े जारी किए. उन्होंने बताया कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 682.3 अरब डॉलर के मजबूत स्तर पर पहुंच गया है. यह रकम इतनी बड़ी है कि बिना किसी बाहरी मदद के देश के करीब 11 महीने के आयात का खर्च आसानी से उठाया जा सकता है.
संकट के बीच मजबूत बफर
चालू वित्त वर्ष की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, “29 मई, 2026 तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 682.3 अरब डॉलर था. यह मानक पैमानों पर पूरी तरह सुरक्षित और पर्याप्त है.” उन्होंने भरोसा दिलाया कि यह भंडार किसी भी बाहरी आर्थिक झटके से निपटने के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच है. अगर बाजार में कोई उतार-चढ़ाव आता है, तो रिजर्व बैंक के पास स्थिति को संभालने के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं.
क्यों मजबूत हो रही है भारत की स्थिति?
गवर्नर ने उन प्रमुख कदमों का भी जिक्र किया जो देश के भुगतान संतुलन को मजबूत कर रहे हैं:
- विदेशी निवेश को बढ़ावा: बीमा क्षेत्र में 100% एफडीआई (FDI) की अनुमति और सीमावर्ती देशों के लिए एफडीआई नियमों में ढील.
- व्यापारिक समझौते: प्रमुख व्यापारिक भागीदार देशों के साथ नए समझौते.
- ऊर्जा क्षेत्र में सुधार: इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम और एनर्जी ट्रांजिशन पर सरकार का विशेष जोर.
उतार-चढ़ाव के बाद भी स्थिति काबू में
इस साल विदेशी मुद्रा भंडार में थोड़े उतार-चढ़ाव भी देखने को मिले हैं. फरवरी 2026 के आखिरी हफ्ते में यह भंडार 728.494 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था. हालांकि, इसके बाद पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष के कारण डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव बढ़ा, और केंद्रीय बैंक को बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा. इसके चलते भंडार में कुछ गिरावट आई और 22 मई को समाप्त सप्ताह में यह 681.384 अरब डॉलर पर था, जो अब सुधरकर 682.3 अरब डॉलर हो गया है.
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चुनौतियां और उम्मीदें
गवर्नर ने साफ किया कि साल 2025-26 में वैश्विक स्तर पर बढ़े टैरिफ और व्यापारिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत ने खुद को बखूबी संभाला है. हालांकि, ऊर्जा की बढ़ती कीमतें और वैश्विक व्यापार नीतियां अब भी चालू खाता घाटे (CAD) के लिए जोखिम बनी हुई हैं. लेकिन राहत की बात यह है कि देश को मिलने वाली विदेशी रेमिटेंस (प्रवासियों द्वारा भेजा जाने वाला धन) और सर्विसेज ट्रेड सरप्लस (सेवा व्यापार का मुनाफा) इस घाटे को पाटने में बड़ी भूमिका निभाएंगे.
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