विदेशी निवेशकों पर RBI मेहरबान! NRI-OCI के लिए बढ़ाई निवेश की सीमा, क्या शेयर बाजार में लौटेगी रौनक?
बाजार के जानकारों का मानना है कि इस फैसले से भारतीय कंपनियों में विदेशी निवेश बढ़ सकता है. खासकर उन कंपनियों को फायदा मिल सकता है जिनमें विदेशी निवेशकों की रुचि अधिक है. इसके अलावा यह कदम भारतीय कैपिटल मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ाने और निवेशकों के आधार को मजबूत करने में भी मददगार साबित हो सकता है.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी निवेशकों के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए Non-Resident Indians (NRI) और Overseas Citizens of India (OCI) के लिए भारतीय शेयर बाजार में निवेश के नियमों को आसान बनाने का ऐलान किया है. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को कहा कि स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड कंपनियों के इक्विटी शेयरों में निवेश की सीमा बढ़ाई जाएगी. इसके साथ ही RBI ने यह सुविधा सभी Individual Persons Resident Outside India (PROIs) को भी देने का फैसला किया है. यानी अब अन्य विदेशी व्यक्तिगत निवेशकों को भी NRI और OCI निवेशकों के समान अवसर मिलेंगे. अब देखना होगा कि क्या इस फैसले के बाद शेयर बाजार में रौनक लौटती है या नहींं?
विदेशी निवेशकों के लिए खुलेगा बड़ा मौका
RBI का यह कदम भारतीय कैपिटल मार्केट में विदेशी निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है. इससे विदेश में रहने वाले भारतीयों के साथ-साथ अन्य योग्य विदेशी निवेशकों के लिए भी भारतीय शेयरों में निवेश करना आसान होगा. RBI ने कहा कि इस फैसले का उद्देश्य निवेश प्रक्रिया को सरल बनाना और भारतीय कैपिटल मार्केट में निवेशकों की संख्या बढ़ाना है. नए नियमों और निवेश सीमा से जुड़ी विस्तृत गाइडलाइंस जल्द जारी की जाएंगी.
क्या है मौजूदा नियम?
फिलहाल Portfolio Investment Scheme (PIS) के तहत कोई भी NRI या OCI किसी लिस्टेड भारतीय कंपनी की पेड-अप इक्विटी कैपिटल में अधिकतम 5 फीसदी तक निवेश कर सकता है. वहीं, सभी NRI और OCI निवेशकों की कुल हिस्सेदारी किसी कंपनी में अधिकतम 10 फीसदी तक सीमित है.
RBI ने निवेश का दायरा कितना बढ़ाया?
RBI ने प्रस्तावित बदलाव के तहत-
- किसी एक NRI या OCI के लिए निवेश सीमा 5 फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी करने का प्रस्ताव रखा है.
- सभी NRI और OCI निवेशकों की कुल निवेश सीमा 10 फीसदी से बढ़ाकर 24 फीसदी की जाएगी.
- यही सुविधा अब सभी Individual Persons Resident Outside India (PROIs) को भी उपलब्ध होगी.
इससे भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों का दायरा काफी बढ़ जाएगा.
भारतीय बाजार को मिल सकता है फायदा
बाजार के जानकारों का मानना है कि इस फैसले से भारतीय कंपनियों में विदेशी निवेश बढ़ सकता है. खासकर उन कंपनियों को फायदा मिल सकता है जिनमें विदेशी निवेशकों की रुचि अधिक है. इसके अलावा यह कदम भारतीय कैपिटल मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ाने और निवेशकों के आधार को मजबूत करने में भी मददगार साबित हो सकता है.
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