क्या इस एक खबर से शेयर बाजार में अचानक आई बड़ी तबाही! आपका भी शेयरों में लगा है पैसा तो जान लें ये बात

अमेरिका-इजरायल-ईरान तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखी गई. सेंसेक्स 1500और निफ्टी 500 अंक से अधिक टूटकर दिन के निचले स्तर तक फिसल गए. इसी दौरान खबर आई कि भारत ने ट्रंप प्रशासन की नई व्यापार जांच के बाद अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील पर फिलहाल रोक लगा दी है और ‘वेट एंड वॉच’ रणनीति अपनाई है.

शेयर बाजार गिरावट Image Credit: ChatGPT

अमेरिका, इजरायल और ईरान में जारी जंग से दुनिया भर में जियो-पॉलिटिकल टेंशन बढ़ी हुई है जिसे लेकर दुनिया भर के शेयर बाजार बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं. भारतीय शेयर बाजार भी इससे अछूता नहीं रहा है और यहां भी निफ्टी-सेंसेक्स रोज नीचे गिरने का नया स्तर बना रहे हैं. 13 मार्च, शुक्रवार को बीएसई सेंसेक्स 590.20 अंक गिरकर 75,444.22 के स्तर और निफ्टी करीब 176.65 अंक गिरकर 23,462.50 पर खुला खुला लेकिन दोपहर के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट तेज हो गई. सेंसेक्स 1,579.82 अंक टूटकर 74,454.60 के दिन के निचले स्तर तक फिसल गया जबकि निफ्टी 23,112.00 के दिन के लो तक पहुंच गया. यह करीब 527.15 अंक तक टूट गया. क्या अमेरिकी से जुड़ी एक खबर ने बाजार को झटका दिया? आइये समझते हैं.

इस खबर के बाद आई बड़ी गिरावट

रॉयटर्स के अनुसार, भारत ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते (ट्रेड डील) पर फिलहाल रुकने का फैसला किया है और इसे कुछ महीनों के लिए टाल दिया है. रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से शुरू की गई नई जांच के कारण दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ताओं में नई अड़चन पैदा हो गई है. एजेंसी के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच पहले मार्च में एक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद थी जिसके बाद पूरा व्यापार समझौता किया जाना था लेकिन अब यह प्रक्रिया कई महीनों तक टल सकती है. इस खबर के सामने आते ही मार्केट धड़ाम हो गया क्योंकि इस फैसले से कई कंपनियों के प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है.

ट्रंप के इस फैसले के बाद भारत ने उठाया यह कदम

इस बार ट्रंप प्रशासन 16 बड़े ट्रेडिंग पार्टनरों को घेरने की तैयारी में है. ट्रंप प्रशासन ने बुधवार को 16 बड़े ट्रेडिंग पार्टनर देशों के खिलाफ नई व्यापार जांच शुरू करने का ऐलान किया है. इस कदम का मकसद अमेरिकी उद्योगों को बचाना और दुनिया भर में सस्ते माल की भरमार को रोकना बताया जा रहा है. जांच के घेरे में भारत भी है.

अमेरिका ने अब 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत एक नई जांच शुरू की है. इसमें यह देखा जाएगा कि क्या कुछ देशों में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में संरचनात्मक अतिरिक्त उत्पादन क्षमता है, जिससे अमेरिकी उद्योग प्रभावित हो सकता है. रॉयटर्स के मुताबिक, भारत इस जांच को दबाव बनाने की रणनीति मान रहा है ऐसे में भारत फिलहाल किसी समझौते को अंतिम रूप देने की जल्दबाजी में नहीं है.

‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति

एजेंसी के अनुसार, भारत अब अमेरिकी टैरिफ नीति में आगे होने वाले बदलावों को देखते हुए ‘वेट एंड वॉच’ रणनीति अपनाना चाहता है. यदि जरूरत पड़ी तो भारत इस मामले को विश्व व्यापार संगठन (WTO) में भी उठा सकता है.

क्या थी डील

भारत और अमेरिका के बीच लगभग एक साल तक चली बातचीत के बाद पिछले महीने एक व्यापार समझौते पर शुरुआती सहमति बनी थी. प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय आयात पर लगाए गए टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति जताई थी. फरवरी की शुरुआत में दोनों देशों के बीच एक अंतरिम ढांचे पर सहमति बनी थी. इसके तहत भारत से कुछ अहम प्रतिबद्धताओं की उम्मीद की गई थी, जिनमें रूसी तेल आयात को रोकना, अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क कम करना और करीब 500 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान की खरीद बढ़ाना शामिल था. हालांकि भारत ने रूसी तेल की खरीद पूरी तरह बंद नहीं की है, बल्कि केवल इसकी रफ्तार को कुछ हद तक धीमा किया है.

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