जून में विदेशी निवेशकों का रिकॉर्ड दांव, भारतीय बॉन्ड में लगाए 39640 करोड़ रुपये, अब क्या होगा असर?

जानकारों का कहना है कि पहले रुपये में ज्यादा उतार चढ़ाव होने की वजह से विदेशी निवेशक डेट मार्केट से दूरी बना रहे थे. अब हालात बेहतर हैं और उन्हें भारतीय बॉन्ड आकर्षक लग रहे हैं. हालांकि कुछ जानकारों का मानना है कि जून में आया रिकॉर्ड निवेश हर महीने जारी रहेगा, ऐसा मानना जल्दबाजी होगी.

विदेशी निवेशक और म्यूचुअल फंड Image Credit: Canva

जून 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय सरकारी बॉन्ड (G-Secs) में अब तक 39,640 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड निवेश किया है. यह किसी भी एक महीने में सरकारी बॉन्ड में आया अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश है. इससे पहले अगस्त 2024 में 22,005 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड निवेश हुआ था. सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया फैसलों के बाद विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी भारतीय डेट मार्केट में तेजी से बढ़ी है.

रिकॉर्ड निवेश की वजह क्या है?

सरकार और RBI ने विदेशी निवेशकों के लिए कुछ बड़े कदम उठाए हैं. इनमें पात्र सरकारी बॉन्ड निवेश पर कैपिटल गेन टैक्स में छूट देना और Fully Accessible Route (FAR) के तहत ज्यादा सरकारी सिक्योरिटीज को शामिल करना प्रमुख है. इन फैसलों का मकसद भारतीय बॉन्ड मार्केट में विदेशी निवेश बढ़ाना और बाजार को और गहरा बनाना है.

Bloomberg Index में शामिल होने की उम्मीद

बाजार के जानकारों का मानना है कि टैक्स छूट मिलने के बाद भारत के सरकारी बॉन्ड के Bloomberg Global Aggregate Bond Index में शामिल होने की संभावना और मजबूत हुई है. DBS Bank के एमडी और हेड ऑफ ट्रेडिंग Sameer Karyatt के मुताबिक, RBI के कदमों से रुपये में गिरावट को लेकर चिंता कम हुई है. वहीं टैक्स छूट के कारण विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ा है. उनका मानना है कि अगर ग्लोबल लेवल पर कोई बड़ा जियो-पॉलिटिकल संकट नहीं आता, तो यह निवेश जारी रह सकता है.

रुपये और बॉन्ड यील्ड पर दिखा असर

विदेशी निवेश बढ़ने से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है. 12 जून तक देश का विदेशी मुद्रा भंडार 672 अरब डॉलर था. वहीं, मई के आखिर में डॉलर के मुकाबले 96.96 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंचा रुपया अब मजबूत होकर 94.40 प्रति डॉलर पर बंद हुआ. इसी दौरान 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड भी करीब 20 बेसिस प्वाइंट घटकर 6.76 फीसदी पर आ गई. आमतौर पर बॉन्ड की कीमत बढ़ने पर उसकी यील्ड घटती है.

आगे भी जारी रह सकता है निवेश

जानकारों का कहना है कि पहले रुपये में ज्यादा उतार चढ़ाव होने की वजह से विदेशी निवेशक डेट मार्केट से दूरी बना रहे थे. अब हालात बेहतर हैं और उन्हें भारतीय बॉन्ड आकर्षक लग रहे हैं. हालांकि कुछ जानकारों का मानना है कि जून में आया रिकॉर्ड निवेश हर महीने जारी रहेगा, ऐसा मानना जल्दबाजी होगी.

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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.