जियो-पॉलिटिकल तनाव से दबाव में शेयर बाजार, मार्च के पहले पखवाड़े में FPIs ने ₹52704 करोड़ निकाले; DIIs ने संभाला मोर्चा
मिडिल ईस्ट में बढ़ते जियो-पॉलिटिकल तनाव के बीच विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से बड़ी रकम निकाल ली है. मार्च के पहले पखवाड़े में FPIs ने 52,704 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि 2026 में अब तक कुल निकासी 66,051 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. लगातार बिकवाली का असर बाजार पर दिखा और सेंसेक्स-निफ्टी में तेज गिरावट दर्ज की गई.
FPI Sell Off in March: वैश्विक स्तर पर बढ़ते जियो-पॉलिटिकल तनाव और ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच जारी संघर्ष का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है. विदेशी निवेशकों ने मार्च के पहले पखवाड़े में भारतीय इक्विटी बाजार से बड़े पैमाने पर पैसा निकाला है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) ने मार्च के पहले 15 दिनों में ही करीब 52,704 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं.
इस दौरान शुक्रवार को साल 2026 का सबसे बड़ा एक-दिवसीय आउटफ्लो दर्ज हुआ, जब विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार से 10,717 करोड़ रुपये की बिकवाली की. लगातार हो रही इस भारी बिकवाली ने बाजार की धारणा पर दबाव बढ़ा दिया है.
साल 2026 में अब तक 66 हजार करोड़ रुपये की निकासी
अगर पूरे साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2026 की शुरुआत से अब तक FPIs भारतीय शेयर बाजार से लगभग 66,051 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं. विदेशी निवेशकों की यह लगातार बिकवाली बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. विश्लेषकों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण विदेशी निवेशक जोखिम कम करने की रणनीति अपना रहे हैं.
फिलहाल ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहा संघर्ष 15वें दिन में पहुंच चुका है और अब तक किसी ठोस समाधान के संकेत नहीं मिले हैं. हालांकि एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में G7 नेताओं के साथ वर्चुअल बैठक में कहा कि ईरान जल्द ही आत्मसमर्पण के करीब है, लेकिन बाजार अभी भी इन घटनाक्रमों को लेकर सतर्क बना हुआ है.
फरवरी में दिखा था सकारात्मक रुख
दिलचस्प बात यह है कि फरवरी में विदेशी निवेशकों ने कुछ हद तक वापसी के संकेत दिए थे. उस महीने FPIs ने भारतीय बाजार में करीब 16,912 करोड़ रुपये का निवेश किया था. यह खरीदारी मुख्य रूप से कंपनियों के बेहतर तीसरी तिमाही (Q3) के नतीजों के बाद देखने को मिली थी. लेकिन मार्च में वैश्विक हालात बिगड़ने के साथ ही निवेशकों का रुख फिर से बदल गया और बिकवाली का दौर शुरू हो गया.
घरेलू निवेशकों ने संभाला मोर्चा
जहां विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को कुछ हद तक सहारा दिया है. शुक्रवार को DIIs ने करीब 9,977 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे. पिछले सप्ताह के दौरान FIIs ने कुल 31,824 करोड़ रुपये की नेट सेलिंग की, जबकि इसी अवधि में DIIs ने 37,740 करोड़ रुपये की नेट खरीदारी की.
बाजार में भारी गिरावट
विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखा. प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट दर्ज की गई और बाजार लगातार तीसरे दिन नुकसान के साथ बंद हुआ. कारोबार के दौरान निफ्टी 488.05 अंक यानी 2.06 फीसदी गिरकर 23,151.10 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 1,470.50 अंक यानी 1.93 फीसदी टूटकर 74,563.92 पर आ गया. इस गिरावट में सबसे ज्यादा दबाव मेटल, ऑटो और फाइनेंशियल सेक्टर के शेयरों पर देखने को मिला.
2025 में भी रहा बिकवाली का दबाव
अगर पिछले साल के रुझान को देखें तो 2025 में भी विदेशी निवेशकों का रुख काफी अस्थिर रहा था. पूरे साल के दौरान FIIs ने भारतीय बाजार से करीब 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी की. विश्लेषकों के अनुसार व्यापार समझौतों में देरी और भारतीय बाजार के अपेक्षाकृत ऊंचे वैल्यूएशन के कारण विदेशी निवेशकों का रुख सतर्क बना रहा.
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