₹348 से ₹11,900 तक का ट्रैप! सेमीकंडक्टर के नाम पर इस स्टॉक में हुई धड़ाधड़ खरीदारी, फिर भागे प्रमोटर और फंसे रिटेल निवेशक

RRP Semiconductor का शेयर कुछ ही महीनों में हजारों प्रतिशत चढ़ा, लेकिन इसके पीछे का कारोबार टिक नहीं पाया. जैसे ही प्रमोटरों ने हिस्सेदारी बेची, कंपनी का बिजनेस गायब होता दिखा और रिटेल निवेशक फंस गए. यह मामला बताता है कि सिर्फ तेजी देखकर निवेश करना कितना खतरनाक हो सकता है.

RRP Semiconductor stock Image Credit: AI Generated

RRP Semiconductor stock: शेयर बाजार में हर कुछ महीनों में एक ऐसी कहानी सामने आती है, जो निवेशकों को अमीर बनने के सपने दिखाती है और फिर वही सपना कई लोगों के लिए सबसे बड़ा सबक बन जाता है. RRP Semiconductor Ltd का मामला भी कुछ ऐसा ही है. एक ऐसा शेयर, जो कुछ ही महीनों में ₹348 से बढ़कर ₹11,902 तक पहुंच गया और अब ₹10,000 के आसपास ट्रेड कर रहा है. इस दौरान हजारों रिटेल निवेशक इसमें फंस गए, जबकि प्रमोटर चुपचाप अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचकर करोड़ों रुपये निकाल ले गए. इस रिपोर्ट में आज उसी कंपनी की बात.

35 साल पुरानी कंपनी, लेकिन सालों तक कोई कारोबार नहीं

RRP Semiconductor की शुरुआत साल 1989 में हुई थी. यानी यह कोई नई कंपनी नहीं है. लेकिन हैरानी की बात यह है कि FY14 से FY23 तक, पूरे दस साल से ज्यादा समय में कंपनी ने एक रुपये की भी बिक्री नहीं दिखाई. यह न कम बिक्री थी, न कमजोर कारोबार, बल्कि बिल्कुल शून्य.

FY24 में पहली बार कंपनी की बुक्स में करीब ₹3.8 मिलियन की बिक्री दिखाई दी, जो किसी भी गंभीर बिजनेस के लिए बेहद मामूली रकम है. इतने में तो एक छोटी ऑफिस टीम का खर्च भी मुश्किल से निकलता है.

अचानक आया कारोबार और चमकते नतीजे

असल कहानी FY25 में शुरू होती है. इसी साल कंपनी ने अचानक ₹315.9 मिलियन की बिक्री दिखाई. तिमाही आंकड़े भी देखने में काफी आकर्षक थे.

तिमाहीबिक्री (₹ मिलियन)
जून 202451.1
सितंबर 202456.6
दिसंबर 2024148.2
सोर्स- equitymaster.com

इसके साथ ही कंपनी ने 35% से 43% तक का ऑपरेटिंग मार्जिन दिखाया, जो किसी भी निवेशक को रोमांचित करने के लिए काफी है. खासकर तब, जब बात सेमीकंडक्टर जैसे हाई-टेक सेक्टर की हो.

सेमीकंडक्टर थीम और सोशल मीडिया का जादू

यही वह दौर था, जब भारत में सेमीकंडक्टर को लेकर जबरदस्त चर्चा चल रही थी. सरकार की योजनाएं, ग्लोबल चिप मैन्युफैक्चरिंग हब बनने के सपने और बड़ी-बड़ी घोषणाएं हर जगह थीं. ऐसे माहौल में एक स्टॉक, जिसके नाम में “Semiconductor” लिखा हो, अचानक बिक्री और मुनाफा दिखाने लगे और वह भी कुछ सौ रुपये के भाव पर, तो सोशल मीडिया पर शोर मचना तय था. इस शेयर को “हिडन जेम” बताया जाने लगा।

नतीजा यह हुआ कि स्टॉक ने ₹348 से ₹11,902 तक का सफर तय किया, यानी 3300% से ज्यादा का रिटर्न, वो भी एक साल से भी कम समय में.

अब शुरू हुआ प्रोमोटर्स का खेल

जब रिटेल निवेशक सपने देख रहे थे, उसी वक्त प्रमोटर कुछ और ही कर रहे थे. मार्च 2024 से जून 2024 के बीच प्रमोटर होल्डिंग में जो बदलाव आया, वह सबसे बड़ा रेड फ्लैग था.

  • प्रमोटर हिस्सेदारी: 74.5% → 1.28%
  • यानी 73.22% हिस्सेदारी सिर्फ तीन महीने में बेच दी गई
  • पब्लिक शेयरहोल्डिंग: 25.5% → 98.73%

यह कोई सामान्य हिस्सेदारी घटाना नहीं था. यह पूरी तरह से एग्जिट था. प्रमोटर ₹5,000 से ₹10,000 के बीच भावों पर शेयर बेचते रहे और रिटेल निवेशक लगातार खरीदते रहे.

FY25 की चमक ज्यादा दिन नहीं चली. इक्विटीमास्टर की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2025 की तिमाही में कंपनी ने ₹68.2 मिलियन की नेगेटिव बिक्री दिखाई. यह अपने आप में हैरान करने वाला आंकड़ा है. दिसंबर 2025 तक पहुंचते-पहुंचते बिक्री फिर से शून्य हो गई, ठीक उसी जगह जहां कंपनी पिछले दस सालों तक थी.

मुनाफे की हालत भी खराब हो गई:

  • दिसंबर 2024: ₹65.6 मिलियन मुनाफा
  • सितंबर 2025: ₹71.5 मिलियन घाटा
  • दिसंबर 2025: ₹1.4 मिलियन घाटा

यानि जो बिजनेस दिखाया जा रहा था, वह पूरी तरह गायब हो गया. इसी खेल के चलते RRP Semiconductor लिमिटेड इन दिनों SEBI और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) की कड़ी निगरानी में है. जैसे ही कंपनी के शेयरों में करीब 20 महीनों (अप्रैल 2024 से दिसंबर 2025) के दौरान आई असाधारण तेजी आई, सेबी ने अपने रडार में इस कंपनी के स्टॉक को ले लिया.

बैलेंस शीट ने दिया साफ संकेत

अगर सिर्फ कीमत से हटकर बैलेंस शीट देखी जाती, तो सच्चाई पहले ही सामने आ सकती थी.

  • Debtor days: 279 दिन
    मतलब ग्राहक लगभग 9 महीने तक पैसा नहीं दे रहे थे.
  • Debt to equity: 1.56
    जबकि असली कारोबार न के बराबर था.
  • Fixed assets: सिर्फ ₹0.1 मिलियन
    यानी करीब एक लाख रुपये. इससे सेमीकंडक्टर बिजनेस चलाना तो दूर, एक कारखाना भी नहीं खरीदा जा सकता.

लेकिन निवेशकों ने इन सभी रेड फ्लैग को इग्नोर किया. आज RRP Semiconductor करीब ₹10,238 के आसपास ट्रेड कर रहा है. यह आंकड़ा:

  • Book value का 1,470 गुना से ज्यादा वैल्यूएशन है
  • मार्केट कैप: ₹139.48 बिलियन
  • Trailing 12 महीने की बिक्री: -₹8.2 मिलियन

ये वैल्यूएशन बहुत गंभीर है, इसे ऐसे समझें की भारत की सबसे मजबूत और भरोसेमंद कंपनियां भी लंबे समय में 15-20 गुना बुक वैल्यू से ऊपर टिक नहीं पातीं.

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निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सबक

इस मामले से कुछ बेहद जरूरी बातें साफ होती हैं:

  • जब प्रमोटर तेजी में आक्रामक तरीके से शेयर बेचें, तो उसे नजरअंदाज न करें
  • बिना एसेट, बिना इंफ्रास्ट्रक्चर के अचानक दिखने वाला रेवेन्यू बेहद संदिग्ध होता है
  • सिर्फ थीम और सोशल मीडिया की चर्चा के आधार पर निवेश करना खतरनाक है

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.